29/09/2020
आपकी थोड़ी सी कठोरता बच्चे के जीवन के लिए लाभदायक साबित होगी
कैसे माता-पिता अपने लाड-प्यार के नाम पर अपने बच्चों को बिगाड़ देते हैं? इसका एक उदाहरण मैं आपको देना चाहता हूँ । मैं आपको एक बच्चे की कहानी सुना रहा हूँ जिसका नाम है ‘अजय’। जिस कोचिंग में मैं पहले पढ़ाता था उसमें उसने कक्षा 9 में दाखिला लिया । पढ़ने में बहुत कमजोर होने के कारण वह हमारी प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर सका था। लेकिन उसके माता-पिता ने बहुत दबाव दिया कि आप हमारे बच्चे को किसी तरह दाखिला दे दीजिए। वह पढ़ाई कर लेगा। हमने उस बच्चे को दाखिला दे दिया।
लेकिन दाखिले के तुरंत बाद ही हमें मालूम हो गया कि बच्चा पढ़ने में बहुत अनियमित था, कक्षा में समय पर नहीं आता था। इसके अलावा वह बहुत बार अनुपस्थित भी रहता था। दूसरी बात, बच्चे ने कक्षा में थोड़े समय बाद ही मंहगे-मंहगे मोबाइल लाने शुरू कर दिए थे। उन मंहगे मोबाइल से एक तकलीफ हमें यह भी थी कि कक्षा का माहौल खराब हो जाता था। शिक्षक भी मेरे पास उस बच्चे की शिकायत लेकर आते थे वो अधिकतर समय मोबाइल पर ही रहता था यहाँ तक कि लंच टाइम में भी मोबाइल पर रहता था और उसके साथ उसके दोस्त भी जो इन सब बातों के शौकीन होते थे वो भी मोबाइल पर लगे रहते थे। हमने कई बार माता-पिता को यह संदेश भेजा
लेकिन उनका हमेशा यह बहाना रहता था कि मामा ने लेकर दे दिया या चाचा ने लेकर दे दिया। हमने कई बार उससे मोबाइल ले भी लिया वह फिर 4-5 दिन बाद कहीं न कहीं से मोबाइल ले आता था। दूसरा, एक दिन शाम को जब मैं कोचिंग से बाहर निकल रहा था तो मैंने देखा कि वह रोड पर तेजी से बाइक चला रहा था। उस पर स्टंट कर रहा था। अपने दोस्त को बिठाकर इधर-उधर घूम रहा था और साथ में कुछ और छात्र जो बाहर खड़े थे उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। उस दिन जैसे ही उसकी नजर मुझसे मिली तो वह वहाँ से चला गया। लेकिन मैंने यह बात भी सुनी कि वह किसी न किसी रिश्तेदार की बाइक लेकर आता था और सड़क पर स्टंट करता था। बच्चा बहुत छोटा था उसने हेलमेट भी नहीं पहना होता था। हमने कई बार उसके माता-पिता को बोला कि आपका बच्चा ऐसे स्टंट कर रहा है तो उनका हमेशा यह बहाना रहता था कि सर, मानता ही नहीं सुनता ही नहीं। मामा की बाइक लेकर आ जाता है या चाचा की बाइक लेकर आ जाता है। वह ये नहीं जानते कि इतने छोटे बच्चे के हाथ में बाइक आने का मतलब है कि वो खुद का नुकसान तो जो करेगा सो करेगा लेकिन साथ में 2-3 लोगांे का और नुकसान कर देगा।
एक बार जब वह बहुत लम्बे समय तक कोचिंग में नहीं दिखा तो मैंने उसके दोस्तों से पूछा कि अजय क्यों नहीं आ रहा है तो मालूम हुआ कि उसे फूड पायजनिंग हो गई है जब वह ठीक होकर वापिस आया तो मैंने उससे जानना चाहा कि वह ऐसा क्या खाता है कि उसे बार-बार ऐसी समस्या हो जाती है। पता चला कि वह ज्यादातर कचैड़ी, समोसे, बर्गर आदि ही खाता था। दाल रोटी, सब्जी तो वह बहुत कम खाता था। जब उसके माता-पिता से बात की गई तो उनका यह कहना था कि अब क्या करें मानता ही नहीं है, सुनता ही नहीं है जब देखो तब जंक फूड ही खाना चाहता है । मेरा उनसे प्रश्न था कि ‘क्या वह कहीं कमाता है?’ तो वह चकित हुए मेरे प्रश्न से। ‘नहीं सर, अभी तो कक्षा 9 में ही पढ़ रहा है अभी कैसे कमायेगा?’ तो मैंने पूछा ‘जब कमाता नहीं है तो इसके पास यह सब खरीदने के पैसे कहाँ से आते हैं? आप देते हो पैसे या खुद कहीं से कमाता है? माता-पिता थोड़े से सकपका गए बोले ‘देते तो हम ही हैं।’ मैंने कहा, ‘आप पैसे क्यों देते हो जब आपको मालूम है कि यह कचैड़ी, समोसे ही खाएगा और बीमार होगा?‘ फिर वहाँ पर उन माता-पिता का आपस में ही झगड़ा शुरू हो गया। उस बच्चे की मम्मी कहने लगी कि
मैं कैसे मना करूँ इतना बड़ा बच्चा है। यह मेरी बात सुनता ही नहीं है। पापा बोले - कि यह उसकी सारी बातें मान लेती है लाड प्यार में बिगाड़ रखा है। मम्मी बताने लगी कि इसके पापा तो सुबह घर से चले जाते हैं रात आते हैं, संभालना तो मुझे पड़ता है कितना मुश्किल है इतने बड़े बच्चे को संभालना। कुल मिला कर उनका मानना था कि उस बच्चे को उन्होंने ज्यादा लाड प्यार देकर बिगाड़ दिया। मैने उनको बोला कि आज से 10-15 साल बाद जब यह बच्चा बड़ा हो जाएगा और पलट कर देखेगा तो इसकी इन आदतांे की वजह से जिन समस्याओं का सामना यह उस समय करेगा वे चाहे शारीरिक हों, मानसिक हों, भावनात्मक हों या फिर चाहे बौद्धिक हों यह आपको ही कसूरवार मानेगा और आपको बोलेगा कि मै तो नादान था आप तो समझदार थे । आपने समझदार होने के बावजूद मुझे क्यों नहीं रोका, क्यों नहीं टोका। मेरे साथ क्यों नहीं सख्त हुए। इसलिए अगर हमें बच्चे के साथ सख्त होना पड़ता है तो वह गलत नहीं है बल्कि उसके भविष्य के लिए जरूरी भी है। और हर माता-पिता को यह करना भी चाहिए कि अगर उनका बच्चा गलत है तो उसे रोकें उसके साथ सख्ती करें उसकी हर बात न मानें क्योंकि यह उसके भविष्य का सवाल है उसकी सारी जिंदगी उसकी उन्हीं अच्छी या बुरी आदतों पर टिकी होती है।
एक बात और आपसे अंत मे कहना चाहूँगा कि ‘‘अगर आप अपने बच्चे को कम उम्र में मँहगा मोबाइल और स्पीड बाइक दिला देते हैं तो उसको किसी और दुश्मन की जरूरत नहीं है। आप अकेले ही बहुत हैं।’’