09/18/2025
विचारणीय आलेख
शतक लगाने के सपने में खोया एक स्कूली बच्चा...
आजकल माता-पिता अपने बेटे से मैदान पर कदम रखते ही शतक लगाने की उम्मीद करते हैं। यह उम्मीद यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि बढ़ती ही जाती है। बच्चों को गाना भी सीखना चाहिए। पढ़ाई में भी अच्छे नंबर लाने चाहिए। माता-पिता को लगता है कि उन्हें हर क्षेत्र में शतक लगाना ही होगा। इन्हीं उम्मीदों के बोझ तले उनका बचपन खो रहा है। यह बात कोई नहीं समझता। आज मुझे सोलापुर के ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल के बच्चों से इसी विषय पर बातचीत करने का मौका मिला।
बच्चों से बात करते हुए मुझे भी कई बातें समझ में आईं। आज की पीढ़ी जेन Z है। उनकी आँखों में सपने तो हैं, लेकिन उनमें धैर्य की कमी है। आँखें खुलते ही वे चाहते हैं कि उनका सपना पूरा हो। उन्हें हर बात का तुरंत जवाब चाहिए, वे सब कुछ जल्दी से पा लेना चाहते हैं।
लेकिन ज़िंदगी ऐसी नहीं है। कुछ चीज़ें न चाहते हुए भी करनी पड़ती हैं। बच्चों को इस बात का एहसास होना चाहिए।
उनसे बात करते हुए मैंने उन्हें क्रिकेट का एक आसान सा उदाहरण दिया... हर दिन अलग होता है। कभी-कभी यह खुशी लाता है, कभी चुनौती, कभी असफलता। और कभी-कभी कुछ और. जब हम बल्लेबाजी करने जाते हैं, तो क्या हमें पहले से पता होता है कि गेंदबाज कौन सी गेंद फेंकने वाला है? वह बाउंसर, यॉर्कर, फुल टॉस... कुछ भी फेंक सकता है। कुछ गेंदें छोड़नी पड़ती हैं। कुछ खेलनी पड़ती हैं। कुछ बॉल्स छोड़नी पड़ती है और कुछ पर चौके लगाने लगाने का अवसर मिलता हैं। ज़िंदगी भी ऐसी ही है।
अगर आप हर गेंद पर शॉट लगाने की कोशिश करेंगे, तो विकेट गिरेगा ही। धैर्य ज़रूरी है। आपको सही मौके का इंतज़ार करना सीखना होगा।
आज की पीढ़ी हर चीज़ की जल्दी में है... चाहिये मतलब चाहिये। जो मांगो वो मिलना ही चाहिए। वे तब तक नहीं रुकते जब तक उन्हें वो मिल न जाए। वे सोचते हैं कि चूँकि उनके माता-पिता हमेशा देते हैं, इसलिए उन्हें भी कुछ भी मांगना चाहिए और वह कुछ भी तुरंत ही मिल जाना चाहिए। लेकिन मैं कहता हूँ, एक दिन, अपने माता-पिता की दी हुई एक भी चीज़ का इस्तेमाल न कर के गुजार के दिखाओ तो तुम्हें उनकी महत्ता समझ आ जायेगी
माता-पिता, शिक्षकों, रिश्तेदारों को उनके योगदान के लिए देखा जाना चाहिए। अगर हम 99 प्रतिशत अंक पाकर उनके साथ रूखा व्यवहार करें, उनसे लगातार बदतमीजी करें, तो जो कम अंक पाकर उनके चरणों में बैठा रहता है, वह महान है। ज़िंदगी सिर्फ़ अंकों के बारे में नहीं है। अंक आपकी मेहनत का प्रतिबिंब हैं। आप जितनी ज़्यादा मेहनत करेंगे, उतने ही बेहतर परिणाम पाएँगे। लेकिन कम अंक का मतलब असफलता नहीं है। निराश मत होइए। खेलिए, पूरे मन से खेलिए। लेकिन खेलों में भी आपको सम्मान, ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखनी चाहिए। अगर ये नहीं हैं, तो यह किसी भी खेल में जीत और हार के समान है।
जब तक किशोर हो, तब तक बचपन का आनंद लो. मज़े करो। लेकिन खुद पर भरोसा रखो। कुछ चीज़ें सीखने में समय लगता है, कुछ चीज़ें अनुभव से ही सीखी जा सकती हैं। क्रिकेट ने मुझे सिखाया... अच्छी गेंद का इंतज़ार करो। जब वो आए, तो उसे ठोकना ही होगा। ज़िंदगी भी ऐसी ही है।