Al-Quraan/In-Hindi

Al-Quraan/In-Hindi

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learn (Al-Quraan-Al-Kareem) In Hindi, And Understand Everything With Deeply, Only By Hindi Tarzuma Guidance

12/25/2021

Qur'an surah part of? Tell me,

12/09/2021
11/26/2021

आप क़ुरआन पढ़ते हो, तो बताओ यह आयत कौनसी सूरह की है, which of part this⬇️❓️

06/03/2021

93 सूरए अज़ जुहा, Suraah/Ad-Dhuhaa/The Early Hours
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
وَالضُّحَى {1}
وَاللَّيْلِ إِذَا سَجَى {2}
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَى {3}
وَلَلْآخِرَةُ خَيْرٌ لَّكَ مِنَ الْأُولَى {4}
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَى {5}
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَآوَى {6}
وَوَجَدَكَ ضَالًّا فَهَدَى {7}
وَوَجَدَكَ عَائِلًا فَأَغْنَى {8}
فَأَمَّا الْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ {9}
وَأَمَّا السَّائِلَ فَلَا تَنْهَرْ {10}
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ {11}
सूरए जुहा मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी ग्यारह (11) आयतें हैं
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ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम (1)
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले (2)
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ (3)
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है (4)
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ (5)
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी) (6)
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचा दिया (7)
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया (8)
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना (9)
माँगने वाले को झिड़की न देना (10)
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का जि़क्र करते रहना (11)
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सूरए अज़ जुहा ख़त्म/

06/02/2021

92/ सूरए अल लइल/Al-Lail/ The Night
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَى {1}
وَالنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّى {2}
وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْأُنثَى {3}
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّى {4}
فَأَمَّا مَن أَعْطَى وَاتَّقَى {5}
وَصَدَّقَ بِالْحُسْنَى {6}
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرَى {7}
وَأَمَّا مَن بَخِلَ وَاسْتَغْنَى {8}
وَكَذَّبَ بِالْحُسْنَى {9}
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَى {10}
وَمَا يُغْنِي عَنْهُ مَالُهُ إِذَا تَرَدَّى {11}
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَى {12}
وَإِنَّ لَنَا لَلْآخِرَةَ وَالْأُولَى {13}
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّى {14}
لَا يَصْلَاهَا إِلَّا الْأَشْقَى {15}
الَّذِي كَذَّبَ وَتَوَلَّى {16}
وَسَيُجَنَّبُهَا الْأَتْقَى {17}
الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّى {18}
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَى {19}
إِلَّا ابْتِغَاء وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَى {20}
وَلَسَوْفَ يَرْضَى {21}

सूरए अल लइल मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी इक्कीस (21) आयतें हैं
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ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
रात की क़सम जब (सूरज को) छिपा ले (1)
और दिन की क़सम जब ख़ूब रौशन हो (2)
और उस (ज़ात) की जिसने नर व मादा को पैदा किया (3)
कि बेषक तुम्हारी कोशिश तरह तरह की है (4)
तो जिसने सख़ावत की और अच्छी बात (इस्लाम) की तस्दीक़ की (5)
तो हम उसके लिए राहत व आसानी (6)
(जन्नत) के असबाब मुहय्या कर देंगे (7)
और जिसने बुख़्ल किया, और बेपरवाई की (8)
और अच्छी बात को झुठलाया (9)
तो हम उसे सख़्ती (जहन्नुम) में पहुँचा देंगे, (10)
और जब वह हलाक होगा तो उसका माल उसके कुछ भी काम न आएगा (11)
हमें राह दिखा देना ज़रूर है (12)
और आख़ेरत और दुनिया (दोनों) ख़ास हमारी चीज़े हैं (13)
तो हमने तुम्हें भड़कती हुयी आग से डरा दिया (14)
उसमें बस वही दाखि़ल होगा जो बड़ा बदबख़्त है (15)
जिसने झुठलाया और मुँह फेर लिया और जो बड़ा परहेज़गार है (16)
वह उससे बचा लिया जाएगा (17)
जो अपना माल (ख़ुदा की राह) में देता है ताकि पाक हो जाए (18)
और लुत्फ ये है कि किसी का उस पर कोई एहसान नहीं जिसका उसे बदला दिया जाता है (19)
बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीषान परवरदिगार की ख़ुषनूदी हासिल करने के लिए (देता है) (20)
और वह अनक़रीब भी ख़ुश हो जाएगा (21)
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सूरए अल लइल ख़त्म

05/30/2021

91/ सूरए अश शम्स Ash-Shams/ The Sun
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا {1}
وَالْقَمَرِ إِذَا تَلَاهَا {2}
وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا {3}
وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا {4}
وَالسَّمَاء وَمَا بَنَاهَا {5}
وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا {6}
وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا {7}
فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا {8}
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا {9}
وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّاهَا {10}
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَاهَا {11}
إِذِ انبَعَثَ أَشْقَاهَا {12}
فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ نَاقَةَ اللَّهِ وَسُقْيَاهَا {13}
فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنبِهِمْ فَسَوَّاهَا {14}
وَلَا يَخَافُ عُقْبَاهَا {15}

सूरए अश शम्स मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी पन्द्रह (15) आयतें हैं
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ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
सूरज की क़सम और उसकी रौषनी की (1)
और चाँद की जब उसके पीछे निकले (2)
और दिन की जब उसे चमका दे (3)
और रात की जब उसे ढाँक ले (4)
और आसमान की और जिसने उसे बनाया (5)
और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया (6)
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया (7)
फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया (8)
(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ (9)
और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा (10)
क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया, (11)
जब उनमें का एक बड़ा बदबख़्त उठ खड़ा हुआ (12)
तो ख़ुदा के रसूल (सालेह) ने उनसे कहा कि ख़ुदा की ऊँटनी और उसके पानी पीने से तअर्रुज़ न करना (13)
मगर उन लोगों पैग़म्बर को झुठलाया और उसकी कूँचे काट डाली तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों सबब से उन पर अज़ाब नाजि़ल किया फिर (हलाक करके) बराबर कर दिया (14)
और उसको उनके बदले का कोई ख़ौफ तो है नहीं (15)
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सूरए अश शम्स ख़त्म

05/25/2021

01/ सूरए फातेहा Al-Fatihah/ The Opening
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِِ {1}
الْحَمْدُ للّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ {2}
الرَّحْمـنِ الرَّحِيمِ {3}
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ {4}
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ {5}
اهدِنَــــا الصِّرَاطَ المُستَقِيمَ {6}
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنعَمتَ عَلَيهِمْ غَيرِ المَغضُوبِ عَلَيهِمْ وَلاَ الضَّالِّينَ {7}

सूरए फातेहा मक्का में नाजि़ल हुआ और इस की 7 आयते हैं
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शुरू करता हूँ ख़ु़दा के नाम से जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है (1)
सब तारीफ ख़ु़दा ही के लिए सज़ावार है (2)
और सारे जहाँन का पालने वाला बड़ा मेहरबान रहम वाला है (3)
रोज़े जज़ा का मालिक है (4)
ख़ु़दाया हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं (5)
तो हमको सीधी राह पर साबित क़दम रख (6)
उनकी राह जिन्हें तूने (अपनी) नेअमत अता की है न उनकी राह जिन पर तेरा ग़ज़ब ढ़ाया गया और न गुमराहों की (7)

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