12/13/2025
🎯 लौटती भारतीय सिनेमा की धार - ‘धुरंधर’
2025 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘धुरंधर’ ने भारतीय सिनेमा के बॉक्स ऑफिस पर एक स्पष्ट संदेश दिया है। यदि विषय में गंभीरता, निर्माण में धैर्य और प्रस्तुति में ईमानदारी हो, तो दर्शक उसे हाथों-हाथ स्वीकार करते हैं। एक सप्ताह में फिल्म का 300 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड कलेक्शन इस बात का प्रमाण है कि यह केवल एक व्यावसायिक सफलता मात्र नहीं, बल्कि दर्शकों के विश्वास की जीत भी है।
फिल्म के निर्देशक और निर्माता #आदित्य_धर इससे पहले 2019 में ‘Uri: The Surgical Strike’ जैसी प्रभावशाली फिल्म दे चुके हैं। गौर करने योग्य बात यह है कि आदित्य धर ने त्वरित सफलता की दौड़ में शामिल होने के बजाय लगभग छह वर्षों का समय लिया और 2025 में अपनी अगली फिल्म लेकर आए। यह अंतराल बताता है कि उनके लिए सिनेमा केवल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक गहन रचनात्मक प्रक्रिया है।
फिल्म की सफलता के बाद आदित्य धर और उनकी पत्नी #यामी_गौतम का हिमाचल प्रदेश स्थित माँ नैना देवी मंदिर जाकर दर्शन करना केवल एक व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि सफलता को वे अहंकार नहीं, बल्कि कृतज्ञता के भाव से देखते हैं। बॉलीवुड के उस हिस्से में, जहाँ धार्मिक- सांस्कृतिक आस्था को कई बार संदेह या व्यंग्य की दृष्टि से देखा जाता है, वहाँ इस प्रकार का सार्वजनिक आचरण अपने-आप में एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारतीय परंपरा आज भी रचनाकारों की चेतना में जीवंत है। राष्ट्र के व्यापकहित में जीवित होनी चाहिए।
आदित्य धर का कश्मीरी हिंदू पृष्ठभूमि से होना और ‘धुरंधर’ में बारामूला के मंदिर से जुड़ा मार्मिक दृश्य इस बात को और गहराई देता है। वह दृश्य केवल कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि कश्मीर के उस सांस्कृतिक दर्द और स्मृति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे लंबे समय तक अनदेखा किया गया। यही कारण है कि वह दृश्य कई दर्शकों की आँखें नम कर देता है क्योंकि वह बनावटी नहीं, अनुभूत सत्य से उपजा हुआ लगता है।
आदित्य धर और उनके सहयोगी #लोकेश_धर द्वारा स्थापित B62 Studios भी इसी सोच का विस्तार है। यह स्टूडियो बड़े कॉरपोरेट शोर से दूर, सीमित लेकिन केंद्रित दृष्टि से काम करता है। यह स्पष्ट है कि वे बजट से अधिक डिटेलिंग, रिसर्च और विश्वसनीयता पर भरोसा करते हैं। यही दृष्टिकोण उन्हें आज के भारतीय सिनेमा में अलग पहचान देता है।
कुछ लोग यह तुलना करते हैं कि यदि आदित्य धर इसी निरंतरता और धैर्य के साथ काम करते रहे, तो वे भारतीय सिनेमा में क्रिस्टोफर या जोनाथन नोलन जैसे कंटेंट-ड्रिवन ट्रेंड-सेटर बन सकते हैं। यह भविष्य की संभावना है, दावा नहीं। लेकिन उनके अब तक के काम में इसकी झलक अवश्य दिखाई देती है।
🌹अंततः ‘धुरंधर’ की सफलता यह सिद्ध करती है कि राष्ट्रीयता का बोध, सांस्कृतिक जड़ें और सिनेमाई गुणवत्ता - ये तीनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जब इन्हें ईमानदारी से जोड़ा जाता है, तो न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिलती है, बल्कि सिनेमा समाज से एक गहरा संवाद भी स्थापित करता है। यही ‘ #धुरंधर’ की असली जीत है। 🌹🙏
Kailash Chandra
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