10/08/2026
नज़र और शर्मगाह की हिफ़ाज़त
इस्लाम ने इंसान की इज़्ज़त, पाकीज़गी, हया और चरित्र की हिफ़ाज़त के लिए बहुत महत्वपूर्ण शिक्षाएँ दी हैं। इनमें नज़र की हिफ़ाज़त, शर्मगाह की हिफ़ाज़त और हराम कामों से बचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
1. नज़र नीची रखने का कुरआनी हुक्म
अल्लाह तआला फरमाता है:
قُل لِّلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا مِنْ أَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْ ۚ ذَٰلِكَ أَزْكَىٰ لَهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ
हिंदी अर्थ:
“ईमान वाले पुरुषों से कह दीजिए कि वे अपनी निगाहें नीची रखें और अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करें। यह उनके लिए अधिक पाकीज़ा है। निश्चय ही अल्लाह उनके कामों से पूरी तरह खबरदार है।”
(सूरह अन-नूर, 24:30)
इस आयत में अल्लाह तआला ने सबसे पहले नज़र की हिफ़ाज़त का आदेश दिया है। क्योंकि अक्सर गुनाह की शुरुआत एक नज़र से होती है और वही नज़र आगे चलकर इंसान को बड़े गुनाह की ओर ले जा सकती है।
2. महिलाओं के लिए भी यही हुक्म
अल्लाह तआला फरमाता है:
وَقُل لِّلْمُؤْمِنَاتِ يَغْضُضْنَ مِنْ أَبْصَارِهِنَّ وَيَحْفَظْنَ فُرُوجَهُنَّ وَلَا يُبْدِينَ زِينَتَهُنَّ...
हिंदी अर्थ:
“और ईमान वाली महिलाओं से कह दीजिए कि वे अपनी निगाहें नीची रखें, अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करें और अपनी ज़ीनत को जाहिर न करें…”
(सूरह अन-नूर, 24:31)
इससे पता चलता है कि हया और पाकीज़गी की ज़िम्मेदारी पुरुष और महिला दोनों की है।
3. अचानक पड़ जाने वाली नज़र
हज़रत जरीर बिन अब्दुल्लाह (रज़ि.) ने रसूलुल्लाह ﷺ से अचानक पड़ जाने वाली नज़र के बारे में पूछा।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
فَأَمَرَنِي أَنْ أَصْرِفَ بَصَرِي
हिंदी अर्थ:
“आप ﷺ ने मुझे आदेश दिया कि मैं अपनी निगाह फेर लूँ।”
(सहीह मुस्लिम, हदीस 2159a)
इससे हमें यह सीख मिलती है कि यदि अचानक किसी ऐसी चीज़ पर नज़र पड़ जाए जिसे देखना उचित नहीं है, तो तुरंत अपनी निगाह हटा लेनी चाहिए।
4. आँखों का ज़िना
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
فَالْعَيْنَانِ زِنَاهُمَا النَّظَرُ
हिंदी अर्थ:
“आँखों का ज़िना देखना है।”
आगे हदीस में ज़बान, कान, हाथ और पैरों के गुनाहों का भी उल्लेख किया गया है।
(सहीह मुस्लिम, हदीस 2657)
इसका अर्थ यह है कि इंसान को केवल बड़े गुनाह से ही नहीं, बल्कि उन रास्तों से भी बचना चाहिए जो उसे गुनाह की ओर ले जाते हैं।
5. नौजवानों के लिए नबी ﷺ की हिदायत
रसूलुल्लाह ﷺ ने नौजवानों को संबोधित करते हुए फरमाया:
يَا مَعْشَرَ الشَّبَابِ مَنِ اسْتَطَاعَ الْبَاءَةَ فَلْيَتَزَوَّجْ، فَإِنَّهُ أَغَضُّ لِلْبَصَرِ، وَأَحْصَنُ لِلْفَرْجِ
हिंदी अर्थ:
“ऐ नौजवानों की जमाअत! तुममें से जो निकाह की क्षमता रखता हो, उसे निकाह कर लेना चाहिए। क्योंकि यह निगाह को अधिक नीचा रखने वाला और शर्मगाह की अधिक हिफ़ाज़त करने वाला है।”
आगे फरमाया:
وَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَعَلَيْهِ بِالصَّوْمِ، فَإِنَّهُ لَهُ وِجَاءٌ
हिंदी अर्थ:
“और जो निकाह की क्षमता न रखता हो, उसे रोज़े रखने चाहिए, क्योंकि रोज़ा उसके लिए ढाल है।”
(सहीह बुखारी, हदीस 5066)
6. ज़िना के करीब जाने से भी मना किया गया
अल्लाह तआला फरमाता है:
وَلَا تَقْرَبُوا الزِّنَىٰ ۖ إِنَّهُ كَانَ فَاحِشَةً وَسَاءَ سَبِيلًا
हिंदी अर्थ:
“और ज़िना के करीब भी मत जाओ। निश्चय ही वह बहुत बड़ी बेहयाई है और बहुत ही बुरा रास्ता है।”
(सूरह अल-इसरा, 17:32)
ध्यान देने वाली बात यह है कि अल्लाह ने केवल ज़िना करने से नहीं रोका, बल्कि “ज़िना के करीब भी मत जाओ” कहा। यानी उन सभी रास्तों से बचना चाहिए जो इंसान को हराम संबंधों और बेहयाई की ओर ले जा सकते हैं।
आज के दौर में नज़र की हिफ़ाज़त
आज मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए नज़र की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
हमें चाहिए कि:
अश्लील तस्वीरों और वीडियो से बचें।
सोशल मीडिया पर गलत सामग्री को देखने से बचें।
किसी गैर-महरम को गलत नज़र से न देखें।
अचानक नज़र पड़ जाए तो तुरंत निगाह फेर लें।
अकेले में भी अल्लाह की निगरानी को याद रखें।
अच्छी और नेक संगत अपनाएँ।
निकाह की क्षमता हो तो निकाह करें।
निकाह की क्षमता न हो तो रोज़े रखें।
अपने मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखें।
निष्कर्ष
नज़र की हिफ़ाज़त केवल आँखों की हिफ़ाज़त नहीं, बल्कि दिल और चरित्र की हिफ़ाज़त भी है। जब इंसान अपनी निगाह को नियंत्रित करता है तो उसका दिल पाक रहता है और वह बहुत से गुनाहों से बच जाता है।
अल्लाह तआला फरमाता है:
ذَٰلِكَ أَزْكَىٰ لَهُمْ
“यह उनके लिए अधिक पाकीज़ा है।”
(सूरह अन-नूर, 24:30)
इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी नज़र, दिल, ज़बान और शर्मगाह की हिफ़ाज़त करे, हया और पाकीज़गी को अपनाए और अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चले।
अल्लाह तआला हमें नज़र की हिफ़ाज़त, हया, पाकीज़गी और नेक अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
09/08/2026
06/08/2026
05/08/2026
04/08/2026
03/08/2026
02/08/2026