31/10/2024
शुभ दीपावली
Shubh Deepawali
MSL is one of the premium libraries of PNG. The special collection of Library is of high national h
31/10/2024
शुभ दीपावली
Shubh Deepawali
24/10/2023
शिवजी ने ही रावण महाराज को रावण नाम दिया था | ऐसा कथाओं में बताया जाता है कि रावण महाराज शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता थे लेकिन शिवजी राजी नही थे तो उन्होंने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया | इसलिए शिवजी ने अपना एक पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया जिससे रावण महाराज की अंगुली दब गयी | दर्द के मारे रावण महाराज जोर से चिल्लाये लेकिन शिवजी की ताकत को देखते हुए उन्होंने शिव तांडव किया था | शिवजी को ये बहुत अजीब लगा कि दर्द में होते हुए भी उन्होंने शिव तांडव किया तो इसलिये उनका नाम रावण रख दिया जिसका अर्थ था जो तेज आवाज में दहाड़ता हो |
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
रावण महाराज को संगीत का बहुत शौक था उअर और वीणा बजाने में बहुत माहिर थे | ऐसा कहा जाता है कि रावण महाराज वीणा इतनी मधुर बजाते थे कि देवता भी उसका संगीत सुनने के लिए धरती पर आ जाते थे |
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
रावण महाराज एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ तत्व ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं के जानकार थे। उन्हें मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानते थे। उनके पास एक ऐसा विमान था जो मन की गति से चलता था, जो अन्य किसी के पास नहीं था। उस विमान को पुष्पक विमान से नाम से जाना जाता था।
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
जैन शास्त्रों में रावण महाराज को प्रति-नारायण माना गया है।
जैन धर्म के 64 शलाका पुरुषों में रावण महाराज की गिनती की जाती है।
जैन पुराणों अनुसार महापंडित रावण आगामी चौबीसी में तीर्थंकर की सूची में भगवान महावीर की तरह चौबीसवें तीर्थंकर के रूप में मान्य होंगे।
इसीलिए कुछ प्रसिद्ध प्राचीन जैन तीर्थस्थलों पर उनकी मूर्तियां भी प्रतिष्ठित हैं।
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
'रावण'... दुनिया में इस नाम का दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है।
राम तो बहुत मिल जाएंगे, लेकिन रावण नहीं।
रावण तो सिर्फ रावण है। राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को दशानन भी कहते हैं।
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
रावण दहन का हमें हक नहीं,
क्योकि हमें उतना ज्ञान नहीं,
परस्त्री हरण कर माता रूपी सम्मान दिया,
उतनी हममे मर्यादा नहीं
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
जैन शास्त्रों में रावण महाराज को प्रति-नारायण माना गया है।
जैन धर्म के 64 शलाका पुरुषों में रावण महाराज की गिनती की जाती है।
जैन पुराणों अनुसार महापंडित रावण आगामी चौबीसी में तीर्थंकर की सूची में भगवान महावीर की तरह चौबीसवें तीर्थंकर के रूप में मान्य होंगे।
इसीलिए कुछ प्रसिद्ध प्राचीन जैन तीर्थस्थलों पर उनकी मूर्तियां भी प्रतिष्ठित हैं।
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
रावण महाराज की जिंदगी ने हमें
एक बात यह भी सिखाई है की
छुपा के रखना अपने राज हर किसी से
चाहे वो अपने दोस्त हो या भाई
जय लंकेश महाराज
24/10/2023
शिवजी ने ही रावण महाराज को रावण नाम दिया था | ऐसा कथाओं में बताया जाता है कि रावण महाराज शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता थे लेकिन शिवजी राजी नही थे तो उन्होंने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया | इसलिए शिवजी ने अपना एक पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया जिससे रावण महाराज की अंगुली दब गयी | दर्द के मारे रावण महाराज जोर से चिल्लाये लेकिन शिवजी की ताकत को देखते हुए उन्होंने शिव तांडव किया था | शिवजी को ये बहुत अजीब लगा कि दर्द में होते हुए भी उन्होंने शिव तांडव किया तो इसलिये उनका नाम रावण रख दिया जिसका अर्थ था जो तेज आवाज में दहाड़ता हो |
जय लंकेश महाराज