04/12/2022
सावरकर पर राहुल जी का बोलना अच्छा है?
जो दिखा वह लिखा
प्रसंग #भारत_जोड़ो_यात्रा भाग 2
#संजय_उवाच
संजय सिंह पंवार समझ!!
महाराष्ट्र मे सावरकर पर राहुल गांधी का बोलना, ओर उनके द्वारा अंग्रेजो से माफी वाली बात बोलना, बार बार बोलना, निश्चित ही अपरिपक्वता का परिचायक है।
जो सावरकर के पक्ष में वह भी इस बात को समझने का प्रयास नहीं करते है, कि राहुल गांधी या यह जिस विचारधारा के मुख है वह लोग सारे क्रांतिकारियों में सावरकर का विरोध क्यों करते है।
जबकि कांग्रेस का उस समय सर्वाधिक विरोध सुभाष चन्द्र बोस ने किया था,, भगत सिंह जी ओर चंद्रशेखर आजाद आदि क्रांति कारी कभी कांग्रेस के कार्यों के समर्थक नहीं रहे। फिर भी आज कांग्रेस बाकी किसी क्रांति कारी का विरोध नहीं करती। सत्य बात यदि गहराई से समझे तो सावरकर की विचारधारा से समस्या है । सावरकर को पड़ने वाला या तो उनका विरोधी होगा या उनका समर्थक। सावरकर को पढ़कर आप उदासीन नहीं रह सकते ।
यह उनके अलावा किसी अन्य महापुरुष के बारे में नहीं कहा जा सकता।
विपरीत विचारधारा कि राजनेतिक पार्टियां जो कार्य करती है विपक्ष विरोध करता है लेकिन समय के बाद वह उन व्यक्तियों का विरोध नहीं करते । सावरकर विचार वह अग्नि है जिसमे भारत में पनप रही कई विचारधाराएं (राजनेतिक, सामाजिक,ओर आर्थिक) जलकर भस्म भी ना बचेगी। हवा हो जाएगी।
इस लिए सावरकर को लक्ष्य किया जताहे। सावरकर की कुछ पुस्तकों में प्रकाशक ने स्वय लिखा है कि यह लेखक के निजी विचार है। ,,,
इतनी स्पष्ट ओर हिंदुत्व विचारधारा के संवाहक दामोदर विनायक सावरकर के बारे में राहुल गांधी जी यदि अपमान जनक बात करते है तो हिंदुत्व विरोधी होने के उनके लक्ष्य अनुरूप ही है। सावरकर को टारगेट करना हिंदुत्व को टारगेट करना है।
ऐसे में आजके युवा का यह कर्तव्य है कि वह सावरकर को जरूर पढ़े। उनके जीवन को तो पढ़ना ही है, उनके द्वारा लिखित विभिन्न पुस्तकों, कविताओं को भी अध्ययन करना चाहिए।
सावरकर की रीति नीति समय के अनुरूप है। यह नीति अपनाने से राष्ट्र सुरक्षित ही नहीं होगा, अपने परम वैभव को भी प्राप्त होगा। अतएव सावरकर वादी होना ,, हिन्दू होना ही है। यदि कोई कांग्रेसी यह कहे कि मै।हिन्दू हू तो वह सावरकर वादी ही है। हिन्दू होने का अर्थ मात्र पूजा पाठ, तीर्थ दर्शन, ओर भजन भोजन नहीं, हिन्दू होने का अर्थ है अपने जीवन मूल्यों कि रक्षा ओर संवर्धन के लिए अपने आप को आहूत करना। राम, कृष्ण , दुर्गा , हनुमान, ओर शिव कि भांति दुष्ट मानसिकता का संहार करना। राहुल गांधी ने सावरकर के विचार का विरोध कर आजकी युवा पीढ़ी को सन्देश दिया है कि वह सावरकर को जरूर पढ़े। ओर निश्चित ही यदि हमारी पीढ़ी ने सावरकर को जानना शुरू कर दिया तो कई आज कि चुनौतियों का सटीक समाधान मिल जाएगा।
अंग्रेज़ से किसने क्या मांगा यह अलग विषय है, किन्तु सावरकर ने अंग्रेज़ो के खिलाफ, विरुद्ध जिस पद्धति से संघर्ष किया वह अद्भुत है।
१८५७ का स्वातंत्र्य समर ओर भारतीय इतिहास के ६ स्वर्णिम पृष्ठ उनकी दो ऐसी पुस्तके है जिन्हे अध्ययन करना ही चाहिए।
पहली पुस्तक को तो अंग्रेजो ने प्रकाशित होने से पहले बेन कर दिया था। क्रांति कारियो ने अपनी पत्नियों कि आभूषण बेचकर इसे छपवाई ओर लोगो मै वितरित की गई।
उस सावरकर को इस अपरिपक्वता से नहीं समझा जा सकता। #मै_भी_सावरकर वाले भी मात्र रैली तक सीमित ना रहकर गोष्ठियां करे,,, व्याख्यान करे। ओर युवा मन में सावरकर के विचारो का दिव्य जल प्रवाहित कर, सिंचित कर,,, राष्ट्र उत्थान का मंत्र प्रस्फुटित करे।
6261450348