10/03/2025
प्रेस रिलीज
सावित्री बाई फूले के स्मृति दिवस पर AISF - All India Students' Federation द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फिल्मांकन और साहित्यिक विमर्श का आयोजन-
10 मार्च 2025 को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) AISF ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन यूनिट ने प्रगतिशील साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी "सद्गति" पर आधारित सत्यजीत रे की फिल्म "सद्गति" के फिल्मांकन और साहित्य व सिनेमा से संबंधित विमर्श का आयोजन किया। यह आयोजन विशेष रूप से सावित्री बाई फूले के स्मृति दिवस के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ सावित्री बाई फूले के छायाचित्र पर विश्वविद्यालय के छात्राओं मीनाक्षी मेहर व टीम द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इस कार्यक्रम के दौरान सावित्री बाई फूले के जीवन के बारे में जानकारी देने के साथ–साथ वर्तमान समय में हो रहे शोषण, रेप , शिक्षा का अभाव आदि के बारे में जानकारी देते हुए सद्गति फिल्म की स्क्रीनिंग की गई । ग़ालिब सभागार में करीब 150 लोगों की संख्या में विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से फ़िल्म का आनंद उठाया। कार्यक्रम में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता जैसे समाजिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन कॉमरेड जीत चौधरी ने किया, जिन्होंने आयोजन का मार्गदर्शन करते हुए उपस्थित सभी छात्रों का स्वागत किया। उन्होंने शुरुआत में ही इस महत्वपूर्ण आयोजन की आवश्यकता और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कहानी की भूमिका और वर्ण व्यवस्था से उत्पन्न जातिगत भेदभाव पर विचार रखते हुए, कॉमरेड उदय भास्कर ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने जातिवाद और अस्पृश्यता की समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज में बदलाव की आवश्यकता की बात की। "सद्गति" फिल्म का फिल्मांकन के उपरांत छात्रों ने फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्यों का वर्णन किया। यह फिल्मांकन छात्रों के लिए एक सीखने का अनुभव था, जिसमें सभी ने धैर्य का परिचय दिया और फिल्म की सटीकता और संवेदनशीलता को समझा।
फिल्मांकन के बाद, साथी विवेक रंजन ने साहित्य, सिनेमा, और सामाजिक बदलाव पर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने सत्यजीत राय के दृष्टिकोण, उनके निर्देशन की शैली, और समानांतर सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। विवेक ने यह भी बताया कि किस प्रकार सत्यजीत रे की फिल्में समाज के अन्याय और असमानता को उजागर करने में एक सशक्त माध्यम साबित हुई हैं। उन्होंने फिल्म "सद्गति" के माध्यम से यह भी बताया कि सिनेमा सामाजिक बदलाव के लिए एक सशक्त उपकरण हो सकता है।
कार्यक्रम की समाप्ति साथी अभय दुबे ने की, जिन्होंने सभी वक्ताओं और उपस्थित छात्रों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम को समापन की ओर अग्रसर किया। उन्होंने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए समाज में प्रगति के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों में समाज के प्रति जागरूकता और सक्रियता बढ़ती है, जो आने वाले समय में सकारात्मक बदलाव का कारण बनेगी। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को न केवल साहित्य और सिनेमा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने का अवसर मिला, बल्कि उन्होंने जातिवाद और अस्पृश्यता जैसे मुद्दों पर गहरी समझ भी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने यह महसूस किया कि सिनेमा और साहित्य समाज को जागरूक करने और सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती है।
चन्दन सरोज 7057279438
AISF, MGAHV, Wardha Aisf Maharashtra