29/10/2019
आराम चाहिए तो आ राम की शरण में।
हर दीवाली में हम सभी अपने घर की सफाई करके, घर की गंदगी को दूर कर लेते है। चाइना लाइट, मोमबत्ती, दीपक से घर के अंधकार को दूर कर, प्रज्ज्वलित कर लेते है किन्तु कभी अपने मन/हृदय की गंदगी/अंधकार को दूर करने के बारे में नहीं सोचते है।
परंतु श्री तुलसीदासजी ने रामचरितमानस के बालकांड दोहा 21 में इसका उपाय बतलाया है:
राम नाम मनि दिप धरु, जिह देहरीं द्वार ।
तुलसी भीतर बाहेरहूँ, जौ चाहसि उजियार।।
जिस प्रकार पहले के जमाने में दीपक को घर की दहलीज पे रखते थे जिससे घर के अंदर और बाहर दोनो ओर उजाला होता था, उसी प्रकार अगर हम अपनी जिह्वा रूपी द्वार पर राम नाम रूपी मणि-दीपक को रखते है तो हमारे अंदर और बाहर दोनो ओर उजाला होता है।
हम सभी ने प्रभु श्री राम को अपने जीवन से वनवास दिया हुआ है और सिर्फ लक्ष्मीजी को खुश करने में लगे रहते है, जिसका दूसरा नाम चंचला है, जो सब समय अपने पति नारायण की सेवा में लगी रहती है। अगर आप अपने माता पिता से दूर रहते है और आप अपनी माँ को बुलाएंगे और पिता को नहीं पूछेंगे तो क्या माँ आपके साथ ज्यादा दिन रहेंगी? वहीं अगर आप पिता को सम्मान करते है तो माता बहुत खुश जाती है।
इसलिए, इस दीपावली हम प्राथना करते है कि आप अपने हृदय रूपी अयोध्या में राम नाम रूपी दीपक प्रज्वलित कर पाएं, जिससे श्री रामचन्द्रजी-सीताजी (जो नारायण-लक्ष्मी स्वरूप है) आपके हृदय में, आपके जीवन में सदा के लिए विराजमान हो और आपको सदैव आ-राम दे।
आपको सुख, शांति और संतोष प्रदान करे, इसी प्राथना के साथ आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं।
आप सभी को दीवाली की शुभकामनाएं।
।। जय सियाराम ।।