भूत पिशाच निकट नहीं आवे
महावीर जब नाम सुनावे
नासे रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत वीरा🙏
Adarsh Chiraigaon- An Ideal Village
THE VILLAGE OF BIRDS ( चिरईगांव ) .Chiraigaon is a City in Chiraigaon Tehsil in Varanasi District of Uttar Pradesh State, India. It is a Tehsil head quarter.
It belongs to Varanasi Division . It is located 9 KM towards East from District head quarters Varanasi. Chiraigaon Pin code is 221112 and postal head office is Chiraigaon . Rustampur ( 1 KM ) , Dinapur ( 2 KM ) , Gaurakala ( 2 KM ) , Sandaha ( 2 KM ) , Tilamapur ( 2 KM ) are the nearby Villages to Chiraigaon. Chiraigaon is surrounded by Varanasi Tehsil towards west , Harahua Tehsil towards North ,
26/09/2022
आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
🙏🙏💐💐
12/10/2021
सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई॥
आवत दीखि बरातिन्ह सीता। रूप रासि सब भाँति पुनीता॥
भावार्थ:-सीताजी की सुंदरता का वर्णन नहीं हो सकता, क्योंकि बुद्धि बहुत छोटी है और मनोहरता बहुत बड़ी है। रूप की राशि और सब प्रकार से पवित्र सीताजी को बारातियों ने आते देखा।।
आदर्श चिराईगांव की रामलीला।। धनुष यज्ञ।। सीता स्वयंवर।।
09/10/2021
🙏🙏
22/08/2020
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉🙏🏻
रिद्धि-सिद्धि के तुम दाता,
दीन दुखियों के भाग्य विधाता।
जय गणपति देवा।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं💐🙏🏻
11/04/2020
कोरोना से जंग में धनंजय हैं असली हीरो
विजय विनीत
वाराणसी। समूचा देश कोरोना से लड़ने की कोशिशों में जुटा है, लेकिन इस जंग के असली हीरो हैं धनंजय मौर्य। ये चिरईगांव के प्रधान हैं। धनंजय तड़के पहड़िया मंडी जाते हैं। थोक में सब्जी खरीदते हैं। चिरईगांव के पंचायत भवन में मंडी के रेट पर सब्जी बांट देते हैं। न मुनाफा, न मोलभाव। एक तरह से इन्होंने मुनाफाखोरों को नाथ दिया है। चिरईगांव बनारस का ऐसा गांव है जहां लोगों को मास्क और सेनेटाइजर सबसे पहले बांटा गया। कोरोना का संक्रमण रोकने लिए इन्होंने गांव में वो हर इंतजाम किया है जो इन दिनों बेहद जरूरी है।
कोरोना से जंग की कोशिशों में धनंजय की जमकर तारीफ हो रही है। चिरईगांव यूपी ही नहीं, देश का पहला ऐसा गांव है, जो साफ-सफाई, पेयजल और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार का मुंह नहीं देखता। चिरईगांव में कई ऐसे जुझारू लोग हैं जो गांव की गलियों को रात में ही साफ कर देते हैं।
चिरईगांव बनारस का वो इलाका है जिसके हर तरफ है हरियाली और चिड़ियों की चहचहाहट। यहां बड़े-बड़े बाग हैं...खेत हैं... और उसमें लहलहाती सब्जियां और रंग-बिरंगे फूल हैं। कहीं फालसा के बाग, तो कहीं नीबू और करौदा के। आम, अमरूद के बागों की तो लंबी श्रृंखला है।
इस अजूबे गांव के प्रधान धनंजय मौर्य ने लाक डाउन की घोषणा होते ही बिचौलियों की नकेल कस दी। किसी को मनमाने दाम पर सब्जियां बेचने का मौका नहीं दिया। पहड़िया सब्जी मंडी जाकर वो खुद सब्जियां ला रहे हैं। पंचायत भवन के अहाते में ये सब्जियां मंडी के रेट पर मुहैया कराई जा रही हैं। न नफा-न नुकसान। सब्जियां सिर्फ उन्हीं लोगों को दी जा रही हैं जो सोशल डिस्टेंशिंग का नियम पालन कर रहे हैं। सब्जियां लेने के लिए ग्रामीणों के निर्धारित दूरी पर बनाए गए एक घेरे में खड़ा होना पड़ता है।
धनंजय बताते हैं कि चिरईगांव में हर किसी को मास्क बांटा जा चुका है। पंचायत भवन और अखाड़े में सैनेटाइजर भी रखवा दिया गया है। चिरईगांव में बाहरी लोगों के घुसने पर पाबंदी है। सख्ती इतनी कि कोई बाहर से पहुंचता है तो पुलिस भी पहुंच जाती है। पुख्ता पड़ताल के बाद चिरईगांव बाहरियों को स्वीकार करता है।
अचरज की बात यह है कि चिरईगांव बनारस का इकलौता ऐसा गांव है, जहां आजादी के पहले से ही अपनी सड़कें थीं, खड़ंजे थे और सड़कों के किनारे नालियां थीं। ग्रामीणों में गजब का भाईचारा था। भाईचारे के अलावा इस गांव के लोगों ने पेशा चुना तो सिर्फ बागवानी का। आजादी के तत्काल बाद स्कूल व पंचायत भवन बने और चिरईगांव ने अपने गांव का नाम आदर्श केटेगरी में शामिल करा लिया। बनारस जिले के किसी गांव के लोगों ने शिक्षा के महत्व को समझा तो वो चिरईगांव ही था। करीब दस हजार की आबादी वाले इस गांव में इस समय करीब पांच हजार से ज्यादा वोटर हैं।
चिरईगांव जाएंगे तो बागों की श्रृंखला देख मुग्ध हो जाएंगे। मनोहारी बाग-बगीचे नेताओं को भले ही न सुहाते हों, लेकिन फलों से लकदक बगीचे और फूलों से लदे खेत चिरईगांव की सुंदरता में चार-चांद लगाते हैं।
#ये_हैं_चिरईगांव_के_भगीरथ
वाराणसी। चिरईगांव में दो ऐसे चेहरे हैं जिन्हें बनारस नहीं जानता। इनमें एक हैं जीउत लाल और दूसरे श्याम सुंदर। ये दोनों शख्स आधी रात के बाद उठते हैं और गांव की प्रमुख सड़कों को साफ-सुथरा कर अपने घर चले जाते हैं। सिलसिला एक दिन नहीं, सालों से चल रहा है।
जीउत लाल पेशे से पोस्टमैन हैं। श्याम किसानी करते हैं। दोनों जने मिलकर गांव की सड़कों को चमका देते हैं। यूं तो साफ-सफाई के लिए इस गांव का कोई आदमी सरकार का मुंह नहीं देखता। हर कोई अपने घर को, अपनी गलियों को साफ-सुथरा रखता है। जानते हैं क्यों? खुद के जरिये साफ-सफाई करने की इस गांव में सालों पुरानी परंपरा है। ऐसी परंपरा जो आज तक नहीं टूटी। चिरईगांव के लोग इस बात से रंज है कि बाहरी लोग यहां आकर इस गांव की परंपरा को, भाईचारे को ठोकर मारने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भाईचारे की गांठ इतनी मजबूत है जिसे तोड़ पाना किसी के बूते की बात नहीं। बनारस का ये पहला गांव है जहां के लोग थाना पुलिस का चक्कर नहीं लगाते। विवादों को गांव में ही सुलटा लिया जाता है।
10/04/2020
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18/10/2018
Durga Puja pandal ...Adarsh Chiraigaon
15/08/2018
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