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Every Study –“Har din 1% better bano success khud mil jayegi ”

19/05/2026

नष्ट वस्तु ज्ञान के लिए अन्धादि नक्षत्रों का फल —
क्या आपकी कोई कीमती वस्तु खो गई है? ज्योतिष शास्त्र के प्रामाणिक ग्रंथ 'मुहूर्त चिंतामणि' में एक बेहद दिव्य और सटीक सूत्र बताया गया है, जिससे आप जान सकते हैं कि खोया हुआ धन या सामान वापस मिलेगा या नहीं।
आइए इसे सरल शब्दों में समझते हैं:
📜 मूल श्लोक:
❝विनष्टार्थस्य लाभोऽन्धे शीघ्रं मन्दे प्रयत्नतः।
स्याद् दूरे श्रवणं मध्ये श्रुत्याप्ती न सुलोचने॥❞
(संदर्भ ग्रंथ: मुहूर्त चिंतामणि)
💡 नक्षत्रों के अनुसार खोज का परिणाम:
✨ 1. अन्ध नक्षत्र (शीघ्र लाभ) 👁️
नक्षत्र: धनिष्ठा, पुष्य, रोहिणी, पूर्वाषाढ़, विशाखा, उत्तराफाल्गुनी और रेवती।
फल: यदि वस्तु इन नक्षत्रों में खोई है, तो वह बहुत जल्द वापस मिल जाती है।
🔍 2. मन्दाक्ष नक्षत्र (प्रयत्न से लाभ) 🧐
नक्षत्र: हस्त, उत्तराषाढ़, अनुराधा, शतभिषा, आश्लेषा, अश्विनी और मृगशिरा।
फल: थोड़ा खोजबीन और प्रयास करने पर वस्तु मिल जाती है।
📢 3. मध्याक्ष नक्षत्र (केवल सुनने को मिलेगा) 👂
नक्षत्र: आर्द्रा, मघा, पूर्वाभाद्रपद, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित् और भरणी।
फल: वस्तु मिलने की केवल खबर या अफवाह सुनाई देती है (कि अमुक स्थान पर है), लेकिन वास्तव में वह प्राप्त नहीं होती।
❌ 4. सुलोचन नक्षत्र (नामुमकिन) 🚫
नक्षत्र: स्वाति, पुनर्वसु, श्रवण, कृतिका, उत्तराभाद्रपद, मूल और पूर्वाफाल्गुनी।
फल: इस नक्षत्र में खोई हुई वस्तु का ना तो पता चलता है और ना ही वह कभी प्राप्त होती है।

18/05/2026

आप पढ़ें, अपने बच्चों को भी पढ़ने दें ]]]
1950 का एक रहस्यमय वैज्ञानिक प्रयोग, जो आज भी हमारी ज़िंदगी की एक नग्न सच्चाई की ओर उंगली उठाता है।
यह कहानी पढ़ने के बाद शायद आप कुछ देर चुप बैठ जाएंगे और अपनी ही ज़िंदगी की तरफ देखकर अचानक सिहर उठेंगे।
कहानी शुरू होती है एक कांच के पिंजरे से...
1950, अमेरिका।
वैज्ञानिकों ने एक चूहे को एक खास कांच के पिंजरे में रखा। पिंजरे के अंदर लगाया गया एक लाल बटन।
व्यवस्था ऐसी थी कि जैसे ही चूहा उस बटन को दबाएगा, उसके मस्तिष्क तक एक इलेक्ट्रिक सिग्नल पहुंचेगा। और तुरंत ही उसके शरीर में बड़ी मात्रा में डोपामिन निकलने लगेगा — यानी तीव्र सुख का एहसास।
आसान भाषा में कहें तो, बटन दबाते ही चूहे को बहुत अच्छा महसूस होगा — ठीक वैसे ही जैसे हमें अपनी पसंद का कोई काम करने पर होता है।
शुरू हुई वह जानलेवा लत...
शुरुआत में चूहा पिंजरे में इधर-उधर घूम रहा था।
एक दिन गलती से उसका पैर लाल बटन पर पड़ गया।
तुरंत ही उसका शरीर एक अजीब सुख से भर गया।
चूहा ठिठक गया — “यह सुख आया कहाँ से?”
उसने फिर बटन दबाया।
फिर वही एहसास।
अब वह समझ चुका था कि यही लाल बटन आनंद का स्रोत है।
फिर क्या था?
शुरू हो गई एक भयानक दीवानगी।
चूहा बार-बार सिर्फ बटन दबाने लगा।
जब सुख, जीवन से भी बड़ा बन जाए
वैज्ञानिकों ने प्रयोग को और कठिन बनाया।
पिंजरे में महंगा और स्वादिष्ट खाना रखा गया।
उसका अकेलापन दूर करने के लिए एक मादा चूहिया भी छोड़ दी गई।
अब आपको क्या लगता है?
क्या उसने खाना खाया?
या अपनी साथी के पास गया?
नहीं।
उसने कुछ भी नहीं किया।
खाना पड़ा रहा, उसने देखा तक नहीं।
साथी ने पुकारा, लेकिन उसने जवाब नहीं दिया।
दिन-रात, खाना-पीना भूलकर वह सिर्फ एक ही काम करता रहा — लाल बटन दबाना।
क्योंकि,
खाने या साथी से मिलने वाले सुख से हजार गुना ज्यादा आनंद उसे उस कृत्रिम सुख में मिल रहा था।
अंतिम परिणाम
एक दिन... दो दिन... तीन दिन...
चूहे का शरीर सूखने लगा। उसकी ताकत खत्म होने लगी। लेकिन बटन दबाना बंद नहीं हुआ।
आखिरकार चूहा मर गया।
सबसे डरावनी बात जानते हैं?
मरते समय भी उसका हाथ उसी लाल बटन पर था।
मौत के आखिरी पल तक वह उसी कृत्रिम सुख को चाहता रहा।
क्या यह प्रयोग सच में खत्म हो गया?
आप सोच सकते हैं कि 1950 का वह प्रयोग तो बहुत पहले खत्म हो चुका।
लेकिन सबसे भयावह सच यह है कि वह प्रयोग आज भी जारी है।
बस चूहा बदल गया है।
आज उस पिंजरे का चूहा आप हैं... और मैं भी।
लाल बटन भी बदल चुका है।
1950 का वह लाल बटन, 2026 में आकर एक चौकोर स्क्रीन का रूप ले चुका है।
ज़रा सोचिए...
क्या हम खाने की मेज पर भी उसी स्क्रीन में सुख नहीं ढूंढते?
क्या हम अपने पास बैठे इंसान को नजरअंदाज करके स्क्रीन में डूबे नहीं रहते?
◆ नींद नहीं, सुकून नहीं — फिर भी क्या आधी रात तक स्क्रॉल नहीं करते रहते...?
जिस तरह वह चूहा सुख की लत में अपनी जान दे बैठा,
क्या हम भी हर दिन अपना समय, अपनी भावनाएँ और अपनी कीमती ज़िंदगी इस चौकोर मशीन के हवाले नहीं कर रहे...?
हम आनंद के पीछे भागते-भागते जीना ही भूल गए हैं, और तकनीक के पिंजरे में बंद एक आधुनिक चूहे की तरह कैद हो चुके हैं।
°
अगर आप अपने बच्चों को इस जानलेवा लत से बचाना चाहते हैं, तो उन्हें फोन से दूर रखिए।

18/05/2026

तलाक़ के बाद पति कोर्ट से निकल कर ऑटो मे बैठा तो तलाक़सुदा पत्नी भी उसी ऑटो मे बैठ गई। उदास पति ने एक कातर दृष्टि से दस साल साथ रही पत्नी की तरफ देखा " वह बुझी मुस्कान के साथ बोली " बस अड्डे तक आखरी सफर आपके साथ करना चाहती हूँ।" पति बोला " एलिमनी की रकम दो महीने मे दे दूंगा। घर बेच दूंगा। तेरे लिए बनाया था। तु ही जिंदगी मे नही रही तो घर का क्या करूँगा। " वह जल्दबाजी मे बोली " घर मत बेचना। मुझे पैसे नही चाहिए। प्राइवेट जॉब करने लगी हूँ मेरा और मुन्ने का गुजारा हो जाता है। " अचानक ऑटो वाले ने ब्रेक मारे तो वह पत्नी का मुँह सामने की रेलिंग से टकराने वाला था कि पति ने झटके से उसकी बांह पकड़ कर रोक लिया। वह पति की आँखों मे देखते हुए भरी आँखों से बोली " अलग हो गए मगर परवाह करने की आदत नही गई आपकी। " वह कुछ नही बोला। मगर वह रोने लगी। रोते रोते बोली " एक बात पूछूँ? " वह नजर उठा कर बोला "क्या? " वह धीरे से बोली " दो साल हो गए अलग रहते हुए " मेरी याद आती थी क्या? " वह बोला " अब बताने से भी क्या फायदा? अब तो सब कुछ खत्म हो गया न? तलाक़ हो चुका है।" वह बोली " दो सालों मुझे वो एक बार भी वो नींद नही आई जो आपके हाथ का तकिया बना कर सोने से आती थी। कह कर वह फफक पड़ी। बस अड्डा आ गया था। दोनों ऑटो से उतरे तो पति ने उसका हाथ पकड़ लिया। काफी दिनों बाद पति का स्पर्स कलाई पर महसूस हुआ तो वह भावुक हो गई। पति बोला " चलो अपने घर चलते हैं। " इतना सुनते ही वह बोली " तलाक़ के कागजों का क्या होगा? " पति बोला " फाड़ देंगे। इतना सुनते ही वह दहाड़ मार कर पति के गले से चिपट गई। पीछे पीछे दूसरे ऑटो मे आ रहे पत्नी के रिश्तेदार उनको इस हालत मे देखकर चुपचाप बस मे बैठकर चले गए।

15/05/2026

शास्त्र कहते हैं कि अठारह दिनों के महाभारत युद्ध में उस समय की पुरुष जनसंख्या का 80% सफाया हो गया था। युद्ध के अंत में, संजय कुरुक्षेत्र के उस स्थान पर गए जहां संसार का सबसे महानतम युद्ध हुआ था।
उसने इधर-उधर देखा और सोचने लगा कि क्या वास्तव में यहीं युद्ध हुआ था? यदि यहां युद्ध हुआ था तो जहां वो खड़ा है, वहां की जमीन रक्त से सराबोर होनी चाहिए। क्या वो आज उसी जगह पर खड़ा है जहां महान पांडव और कृष्ण खड़े थे?
तभी एक वृद्ध व्यक्ति ने वहां आकर धीमे और शांत स्वर में कहा, "आप उस बारे में सच्चाई कभी नहीं जान पाएंगे!"
संजय ने धूल के बड़े से गुबार के बीच दिखाई देने वाले भगवा वस्त्रधारी एक वृद्ध व्यक्ति को देखने के लिए उस ओर सिर को घुमाया।
"मुझे पता है कि आप कुरुक्षेत्र युद्ध के बारे में पता लगाने के लिए यहां हैं, लेकिन आप उस युद्ध के बारे में तब तक नहीं जान सकते, जब तक आप ये नहीं जान लेते हैं कि असली युद्ध है क्या?" बूढ़े आदमी ने रहस्यमय ढंग से कहा।
"तुम महाभारत का क्या अर्थ जानते हो?" तब संजय ने उस रहस्यमय व्यक्ति से पूछा।
वह कहने लगा, *"महाभारत एक महाकाव्य है, एक गाथा है, एक वास्तविकता भी है, लेकिन निश्चित रूप से एक दर्शन भी है।"*
वृद्ध व्यक्ति संजय को और अधिक सवालों के चक्कर में फसा कर मुस्कुरा रहा था।
"क्या आप मुझे बता सकते हैं कि दर्शन क्या है?" संजय ने निवेदन किया।
अवश्य जानता हूं, बूढ़े आदमी ने कहना शुरू किया। *पांडव कुछ और नहीं, बल्कि आपकी पाँच इंद्रियाँ हैं -* दृष्टि, गंध, स्वाद, स्पर्श और श्रवण - और क्या आप जानते हैं कि *कौरव क्या हैं?* उसने अपनी आँखें संकीर्ण करते हुए पूछा।
*कौरव ऐसे सौ तरह के विकार हैं, जो आपकी इंद्रियों पर प्रतिदिन हमला करते हैं लेकिन आप उनसे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते है।* पर क्या आप जानते हैं कैसे?
संजय ने फिर से न में सर हिला दिया।
"जब कृष्ण आपके रथ की सवारी करते हैं!" यह कह वह वृद्ध व्यक्ति बड़े प्यार से मुस्कुराया और संजय अंतर्दृष्टि खुलने पर जो नवीन रत्न प्राप्त हुआ उस पर विचार करने लगा..
"कृष्ण आपकी आंतरिक आवाज, आपकी आत्मा, आपका मार्गदर्शक प्रकाश हैं और यदि आप अपने जीवन को उनके हाथों में सौप देते हैं तो आपको फिर चिंता करने की कोई आवश्कता नहीं है।" वृद्ध आदमी ने कहा।
संजय अब तक लगभग चेतन अवस्था में पहुंच गया था, लेकिन जल्दी से एक और सवाल लेकर आया।
फिर कौरवों के लिए द्रोणाचार्य और भीष्म क्यों लड़ रहे हैं?
भीष्म हमारे अहंकार का प्रतीक हैं, अश्वत्थामा हमारी वासनाएं, इच्छाएं हैं, जो कि जल्दी नहीं मरतीं। दुर्योधन हमारी सांसारिक वासनाओं, इच्छाओं का प्रतीक है। द्रोणाचार्य हमारे संस्कार हैं। जयद्रथ हमारे शरीर के प्रति राग का प्रतीक है कि 'मैं ये देह हूं' का भाव। द्रुपद वैराग्य का प्रतीक हैं। अर्जुन मेरी आत्मा हैं, मैं ही अर्जुन हूं और स्वनियंत्रित भी हूं। कृष्ण हमारे परमात्मा हैं। पांच पांडव पांच नीचे वाले चक्र भी हैं, मूलाधार से विशुद्ध चक्र तक। द्रोपदी कुंडलिनी शक्ति है, वह जागृत शक्ति है, जिसके ५ पति ५ चक्र हैं। ओम शब्द ही कृष्ण का पांचजन्य शंखनाद है, जो मुझ और आप आत्मा को ढ़ाढ़स बंधाता है कि चिंता मत कर मैं तेरे साथ हूं, अपनी बुराइयों पर विजय पा, अपने निम्न विचारों, निम्न इच्छाओं, सांसारिक इच्छाओं, अपने आंतरिक शत्रुओं यानि कौरवों से लड़ाई कर अर्थात अपनी मेटेरियलिस्टिक वासनाओं को त्याग कर और चैतन्य पाठ पर आरूढ़ हो जा, विकार रूपी कौरव अधर्मी एवं दुष्ट प्रकृति के हैं।
श्री कृष्ण का साथ होते ही ७२००० नाड़ियों में भगवान की चैतन्य शक्ति भर जाती है, और हमें पता चल जाता है कि मैं चैतन्यता, आत्मा, जागृति हूं, मैं अन्न से बना शरीर नहीं हूं, इसलिए उठो जागो और अपने आपको, अपनी आत्मा को, अपने स्वयं सच को जानो, भगवान को पाओ, यही भगवद प्राप्ति या आत्म साक्षात्कार है, यही इस मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
ये शरीर ही धर्म क्षेत्र, कुरुक्षेत्र है। धृतराष्ट्र अज्ञान से अंधा हुआ मन है। अर्जुन आप हो, संजय आपके आध्यात्मिक गुरु हैं।
वृद्ध आदमी ने दुःखी भाव के साथ सिर हिलाया और कहा, "जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, अपने बड़ों के प्रति आपकी धारणा बदल जाती है। जिन बुजुर्गों के बारे में आपने सोचा था कि आपके बढ़ते वर्षों में वे संपूर्ण थे, अब आपको लगता है वे सभी परिपूर्ण नहीं हैं। उनमें दोष हैं। और एक दिन आपको यह तय करना होगा कि उनका व्यवहार आपके लिए अच्छा या बुरा है। तब आपको यह भी अहसास हो सकता है कि आपको अपनी भलाई के लिए उनका विरोध करना या लड़ना भी पड़ सकता है। यह बड़ा होने का सबसे कठिन हिस्सा है और यही वजह है कि गीता महत्वपूर्ण है।"
संजय धरती पर बैठ गया, इसलिए नहीं कि वह थका हुआ था, तक गया था, बल्कि इसलिए कि वह जो समझ लेकर यहां आया था, वो एक-एक कर धराशाई हो रही थी। लेकिन फिर भी उसने लगभग फुसफुसाते हुए एक और प्रश्न पूछा, *तब कर्ण के बारे में आपका क्या कहना है?*
"आह!" वृद्ध ने कहा। आपने अंत के लिए सबसे अच्छा प्रश्न बचाकर रखा हुआ है।
"कर्ण आपकी इंद्रियों का भाई है। वह इच्छा है। वह सांसारिक सुख के प्रति आपके राग का प्रतीक है। वह आप का ही एक हिस्सा है, लेकिन वह अपने प्रति अन्याय महसूस करता है और आपके विरोधी विकारों के साथ खड़ा दिखता है। और हर समय विकारों के विचारों के साथ खड़े रहने के कोई न कोई कारण और बहाना बनाता रहता है।"
"क्या आपकी इच्छा; आपको विकारों के वशीभूत होकर उनमें बह जाने या अपनाने के लिए प्रेरित नहीं करती रहती है?" वृद्ध ने संजय से पूछा।
संजय ने स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया और भूमि की तरफ सिर करके सारी विचार श्रंखलाओं को क्रमबद्ध कर मस्तिष्क में बैठाने का प्रयास करने लगा। और जब उसने अपने सिर को ऊपर उठाया, वह वृद्ध व्यक्ति धूल के गुबारों के मध्य कहीं विलीन हो चुका था। लेकिन जाने से पहले वह जीवन की वो दिशा एवं दर्शन दे गया था, जिसे आत्मसात करने के अतिरिक्त संजय के सामने अब कोई अन्य मार्ग नहीं बचा था।
🙏 *!! जय श्रीकृष्ण !!* 🙏

15/05/2026

मनुष्य के जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिन पर उसका पूर्ण अधिकार नहीं चलता। जन्म कब होगा, किस घर में होगा, किससे विवाह होगा और मृत्यु कब आएगी — ये प्रश्न सदियों से मानव को सोचने पर विवश करते रहे हैं। इसी भाव को जनश्रुति में प्रचलित एक प्रसिद्ध पंक्ति बड़े सरल शब्दों में व्यक्त करती है
जनम विवाह मरण गति सोई,
जहाँ जस लिखा तहँ तस होई।
यद्यपि यह पंक्ति श्रीरामचरितमानस के प्रमाणित पाठ में नहीं मिलती, फिर भी इसका भाव भारतीय सनातन चिंतन और भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि वर्षों से लोग इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ स्मरण करते आए हैं।
सनातन धर्म मनुष्य को कर्म करने की शिक्षा देता है, किंतु साथ ही यह भी बताता है कि जीवन में कुछ व्यवस्थाएँ ईश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित होती हैं। मनुष्य अनेक योजनाएँ बनाता है, भविष्य को अपने अनुसार मोड़ना चाहता है, परंतु अंततः वही घटित होता है जो प्रभु की इच्छा और कर्मों के विधान के अनुसार निश्चित होता है।
श्रीरामचरितमानस में भी अनेक प्रसंग ऐसे आते हैं जहाँ भगवान श्रीराम स्वयं इस सत्य को स्वीकार करते दिखाई देते हैं। जब महाराज दशरथ अत्यंत व्याकुल होकर श्रीराम को वनवास का आदेश सुनाते हैं, तब श्रीराम बिना किसी विरोध के सहज भाव से उसे स्वीकार कर लेते हैं। वे जानते थे कि यह केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि ईश्वर की महान लीला का भाग है। यदि प्रभु श्रीराम चाहते तो एक क्षण में सब बदल सकते थे, किंतु उन्होंने मर्यादा, धैर्य और धर्म को सर्वोपरि रखा।
यही शिक्षा इस जनश्रुति का भी मूल भाव है कि जीवन में अहंकार नहीं, बल्कि समर्पण आवश्यक है। मनुष्य को अपने कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि कर्म ही उसका धर्म है। परिणाम और परिस्थितियाँ प्रभु के हाथ में हैं।
आज के समय में मनुष्य छोटी-छोटी बातों पर टूट जाता है। विवाह में विलंब हो जाए तो चिंता, जीवन में कठिनाई आ जाए तो निराशा, और मृत्यु का भय तो हर समय मन में बना रहता है। ऐसे समय में यह भाव हमें धैर्य देता है कि ईश्वर की व्यवस्था कभी अन्यायपूर्ण नहीं होती। जो होता है, उसके पीछे कोई न कोई गहरा कारण अवश्य होता है, जिसे मनुष्य तत्काल समझ नहीं पाता।
इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य प्रयास करना छोड़ दे या भाग्य के भरोसे बैठ जाए। सनातन धर्म कभी आलस्य नहीं सिखाता। श्रीकृष्ण ने गीता में भी कर्म को ही सर्वोच्च बताया है। इसलिए मनुष्य को पुरुषार्थ करते हुए प्रभु पर विश्वास रखना चाहिए। जब कर्म और भक्ति दोनों साथ चलते हैं, तभी जीवन संतुलित बनता है।
भक्ति मन को स्थिर करती है, धैर्य कठिन समय में सहारा देता है और सद्कर्म जीवन को पवित्र बनाते हैं। यही वह मार्ग है जो मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है।
अंततः जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। उसके साथ यदि कुछ जाता है तो वह हैं उसके कर्म, उसकी भक्ति और उसका आचरण। इसलिए ईश्वर पर विश्वास रखकर धर्ममय जीवन जीना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।
यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।
#रामायणसंदेश #रामायणसंदेश

15/05/2026

आज का वैदिक पंचांग
संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।
विष्णुपदी-वृषभ संक्रांति
जप तिथि : 15 मई 2026 शुक्रवार को (विष्णुपदी-वृषभ संक्रांति) पुण्यकाल सूर्योदय से सुबह 06:28 से तक ।
विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है । – (पद्म पुराण , सृष्टि खंड)
15 मई 2026 शुक्रवार को मासिक शिवरात्रि है।हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी
1).ॐ शिवाय नम:
2).ॐ सर्वात्मने नम:
3).ॐ त्रिनेत्राय नम:
4).ॐ हराय नम:
5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम:
6).ॐ श्रीकंठाय नम:
7).ॐ सद्योजाताय नम:
😎.ॐ वामदेवाय नम:
9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम:
10).ॐ तत्पुरुषाय नम:
11).ॐ ईशानाय नम:
12).ॐ अनंतधर्माय नम:
13).ॐ ज्ञानभूताय नम:
14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
15).ॐ प्रधानाय नम:
16).ॐ व्योमात्मने नम:
17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
आर्थिक परेशानी से बचने हेतु हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है । तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी।
प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना ।बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, । इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।
आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।
यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

जय श्री राम ll ' 🚩🚩🌞
🌞🚩🚩 ' ll जय बजरंग बली ll ' 🚩🚩🌞
#रामायणसंदेश #रामायणसंदेश #पंचांग

14/05/2026
14/05/2026

कभी Twitter के CEO रहे Parag Agrawal को 2022 में Elon Musk ने कंपनी अधिग्रहण के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उस समय पूरी दुनिया यही मान रही थी कि उनका करियर अब धीमा पड़ जाएगा।
लेकिन पराग अग्रवाल ने हार मानने के बजाय एक नया रास्ता चुना। उन्होंने AI सेक्टर में अपनी कंपनी “Parallel Web Systems” शुरू की, जो एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है।
अब खबरें हैं कि इस स्टार्टअप ने करीब 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा ली है और कंपनी की वैल्यू लगभग ₹19,000 करोड़ तक पहुंच गई है।
आज AI की दुनिया में OpenAI, Google और Meta जैसी बड़ी कंपनियों के बीच Parag Agrawal का यह कमबैक लोगों को हैरान कर रहा है।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी में बड़ा झटका भी नई शुरुआत बन सकता है, अगर इंसान हार मानने के बजाय खुद पर भरोसा रखे।

14/05/2026

14/05/2026

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला। 👀
राज्य में Ola, Uber और Rapido जैसी
app-based bike taxi services पर
बैन लगा दिया गया है। 🤯
इतना ही नहीं…
सरकार ने Cyber Crime Department को
इन कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।
सरकार का कहना है कि
ये bike taxi services
जरूरी SAFETY नियमों का पालन नहीं करतीं
जिससे आम लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
साथ ही
सरकार ने ये भी कहा कि
इन सेवाओं की वजह से
licensed auto-rickshaw और taxi drivers की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है।
यानी अब महाराष्ट्र में
bike taxi मॉडल पर
सबसे बड़ा एक्शन देखने को मिला है। 🔥
इस फैसले के बाद
लाखों riders, drivers
और app users पर असर पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि
Ola, Uber और Rapido
सरकार के इस फैसले पर
क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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