सर्व जनहित योग संस्थान Sarv JanHeet Yog Sansthan

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सर्व जनहित योग संस्थान  Sarv JanHeet Yog Sansthan "सर्वे भवन्तु निरामया",
करो योग, रहो नि?

https://youtu.be/aMB9vshrH8kPlease Watch the Video and   👍🙏 Channel.
04/07/2020

https://youtu.be/aMB9vshrH8k
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https://youtu.be/k1V58FhEY3Aशीर्षासन दो शब्द मिलकर बना है -शीर्ष जिसका मतलब होता है सिर और आसन जिसके माने होता है योग मु...
29/05/2020

https://youtu.be/k1V58FhEY3A

शीर्षासन दो शब्द मिलकर बना है -शीर्ष जिसका मतलब होता है सिर और आसन जिसके माने होता है योग मुद्रा। शास्त्रों में 84 लाख आसनों का जिक्र है, लेकिन फायदे के मामले में शीर्षासन की अलग पहचान है जिसके के कारण इन 84 लाख आसनों में शीर्षासन को राजा कहा गया है। शीर्षासन के जितने भी फायदे गिनाए जाए कम है। यहां पर हम इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बार में चर्चा करेंगे।

23/10/2018

A season of joy and prosperity to all 🙏

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई आप सभी को
15/08/2016

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई आप सभी को

19/07/2016

#गुरुपूर्णिमा के सुअवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई....
परमात्मा की प्यारी आत्माओं,
भक्ति के क्षेत्र में एक अत्यंत ही जरुरी और महत्वपूर्ण पहलू होता है "गुरु" का जिसके बगैर हम इस संसार सागर से पार नहीं हो सकते| गुरु महिमा के विषय में गोस्वामी तुलसी दास जी लिखते हैं:-
गुरु बिन भव निधि तरई न कोई|
जो विरंची शंकर सम होई ||
अर्थात बिना गुरु के संसार सागर से कोई पार नहीं हो सकता चाहे वह ब्रम्हा व शंकर के समान ही क्यों न हो|
यही नानकदेव जी कहते हैं:-
गुरु की मूरत मन में ध्याना |
गुरु के शब्द मंत्र मन माना ||
मत कोई भरम भूलो संसारी |
गुरु बिन कोई न उतरसी पारी ||
परमात्मा प्राप्त कर चुकी मीरा बाई ने कहा है:-
पायो जी मैने राम रतन धन पायो |
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, करि कृपा अपनायो ||
पायो जी मैने राम रतन धन पायो ||
कबीर साहेब ने तो यहॉ तक बताया है :-
राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हूँ भी गुरु कीन |
तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन ||
भक्ति मार्ग में अब हमें बड़ी गहनता से इस विषय को समझना होगा क्यों कि अब के जो हम चूके तो न जाने कब यह नर तन मिले ना मिले| नर तन मिल भी जाए तो सतगुरु मिले ना मिले क्यों कि:-
गुरु गुरु में भेद है, गुरु गुरु में भाव |
सोई गुरु नित बंदिये,जो शब्द लखावै दाव ||
अब यह बड़ी विडम्बना है कि हम सतगुरु की परख कैसे करें क्यों कि हमारे यहाँ तो गुरूओं की बाढ़ सी आई हूई है तो नीचे गुरुओं की महिमा बताई गयी है जिनमें से सतगुरु को पहचानकर और उनकी सही स्थिति को जानकर अपना नैया पार लगाना है:-
प्रथम गुरु है पिता अरु माता |
जो है रक्त बीज के दाता ||
हमारे माता पिता हमारे प्रथम गुरु हैं |
दूसर गुरु भई वह दाई |
जो गर्भवास की मैल छूड़ाई ||
जन्म के समय व बाद में जिसने हमारा सम्हाल किया वह हमारा दूसरा गुरु है |
तीसर गुरु नाम जो धारा |
सोइ नाम से जगत पुकारा ||
जिसने हमारा नामकरण किया वह तीसरा गुरु है |
चौंथा गुरु जो शिक्षा दीन्हा |
तब संसारी मारग चीन्हा ||
हमें शिक्षा देने वालेअध्यापक चौंथे गुरु कीश्रेंणी में है |
पॉचवा गुरु जो दीक्षा दीन्हा |
राम कृष्ण का सुमिरण कीन्हा ||
हमें अध्यात्म से जोड़ने में पॉचवे गुरु का बहूँत ही महत्वपूर्ण योगदान है क्यों कि यही वह सीढ़ी है जहॉ से हम भगवान की ओर प्रथम कदम उठाते हैं और नाना प्रकार के (३३करोंड़) देवी देवताओं को पूजते हैं| चतुर्थी, नवमी, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा आदि व्रतों को करते हूऐ मंदिर, पहाड़, तीर्थाटन आदि करके खुद को मुक्त मानते हैं लेकिन शास्त्रविरुध्द साधना (गीता अ.१६ मंत्र २३-२४) होने से हम सफल नही हो पाते | आगे छठवॉ गुरु को समझें:-
छठवॉ गुरु भरम सब तोड़ा |
"ऊँ" कार से नाता जोंड़ा ||
यह गुरु हमारा भरम निवारण इस आधार पर करता है कि वेद (यजुर्वेद अ.४० मंत्र १५व१७) और गीता (अ.८ मंत्र १३) में केवल एक "ऊँ" अक्षर ब्रम्ह प्राप्ति (मुक्ति) हेतु बताया गया है इसके अलावा किसी अन्य की पूजा नही करनी चाहिए किंतु इनका यह भक्ति साधना भी पूर्ण लाभदायक नही क्यो कि गीता ग्यान दाता (ब्रम्ह) स्वयं गीता में कहता है कि तेरे और मेरे अनेक जन्म हो चुके हैं (प्रमाण- गीता अ.२मं.१२, अ.४मं.५व९ तथाअ.१०मं.२) और यह भी स्पष्ट बता दिया कि ब्रम्ह लोक पर्यन्त सब लोक पुनरावृत्ती में है इसलिए यह गुरू भी पूर्ण नहीं| अब सातवॉ गुरु:-
सातवॉ सतगुरू शब्द लखाया|
जहॉ का जीव तहॉ पहूँचाया ||
पुन्यात्माओं इन्हें गुरु नही सतगुरु कहा गया है क्यों कि इनका दिया ग्यान व भक्ति विधि शास्त्रानुकूल होने से इस लोक और परलोक दोनो में परम हितकारक है यह सतगुरु हमें सदभक्ति का दान देकर व हमारा सही ठिकाना बताकर यहॉ काल/ब्रम्ह के २१ ब्रम्हांड से भी और उस पार उस सतलोक को प्राप्त करने की सत साधना प्रदान करता है जिस मार्ग पर चलने वाला साधक जरा और मरण रुपी महाभयंकर रोग से छुटकारा पाकर उस शास्वत स्थान को प्राप्त करता है जिसके बारे में गीता अ.१८ मं.६२ व ६६ में कहा गया है|

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"सर्वे भवन्तु निरामया",
करो योग, रहो नि?

आज 16 जुलाई 2016 को ' महर्षि पतंजलि कन्या गुरुकुल' आवास   निवास कालोनी, दौलतपुर रोड, वाराणसी में साप्ताहिक योग शिविर का ...
16/07/2016

आज 16 जुलाई 2016 को ' महर्षि पतंजलि कन्या गुरुकुल' आवास निवास कालोनी, दौलतपुर रोड, वाराणसी में साप्ताहिक योग शिविर का तीसरा दिन संपन्न हुआ। जिसमे डा. राजेश कुमार मौर्या, सुनील यादव (भगत जी), डा. सबलू यादव एवं डा. जितेन्द्र जी ने शिविर में आये लोगो को योग के बारे विशेष जानकारी दिए एवं योग के प्रति लोगो को जागरूक भी कराया।

आज 14 जुलाई 2016 को ' महर्षि पतंजलि कन्या गुरुकुल' आवास   निवास कालोनी, दौलतपुर रोड, वाराणसी में योग का पशिक्षण देते हुए...
14/07/2016

आज 14 जुलाई 2016 को ' महर्षि पतंजलि कन्या गुरुकुल' आवास निवास कालोनी, दौलतपुर रोड, वाराणसी में योग का पशिक्षण देते हुए । डा. राजेश कुमार मौर्या, सुनील यादव (भगत जी), डा. सबलू यादव एवं डा. जितेन्द्र जी ने मधुमेह मुक्ति के लिए विशेष योगासन बताये ।

14/07/2016

योग के 10 फायदे / Benefits of Yoga in Hindi

1) योग का प्रयोग शारीरिक , मानसिक और आध्यत्मिक लाभों के लिए हमेशा से होता रहा है l आज की चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है की योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानवजाति के लिए वरदान है |

2) जहाँ जिम आदि से शरीर के किसी खास अंग का ही व्यायाम होता है वहीँ योग से शरीर के समस्त अंग प्रत्यंगों,ग्रंथियों का व्यायाम होता है जिससे अंग प्रत्यंग सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं |

3) योगाभ्यास से रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है | बुढ़ापे में भी जवान बने रह सकते हैं त्वचा पर चमक आती है शरीर स्वस्थ,निरोग और बलवान बनता है |

4) जहाँ एक तरफ योगासन मांस पेशियों को पुष्टता प्रदान करते हैं जिससे दुबला पतला व्यक्ति भी ताकतवर और बलवान बन जाता है वहीँ दूसरी ओर योग के नित्य अभ्यास से शरीर से फैट कम भी हो जाता है इस तरह योग कृष और स्थूल दोनों के लिए फायदेमंद है |

5) योगासनों के नित्य अभ्यास से मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है | जिससे तनाव दूर होकर अच्छी नींद आती है, भूख अच्छी लगती है, पाचन सही रहता है|

6) प्राणायाम के लाभ – योग के अंग प्राणायाम एवं ध्यान भी योगासनों की तरह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, प्राणायाम के द्वारा श्वास प्रश्वास की गति पर नियंत्रण होता है जिससे श्वसन संस्थान सम्बन्धित रोगों में बहुत फायदा मिलता है | दमा, एलर्जी, साइनोसाइटिस,पुराना नजला, जुकाम आदि रोगों में तो प्राणायाम बहुत फायदेमंद है ही साथ ही इससे फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है जिससे शरीर की कोशिकाओं को ज्यादा ऑक्सीजन मिलने लगती है जिसका पूरे शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है |

7) ध्यान के लाभ – ध्यान भी योग का अतिमहत्वपूर्ण अंग है | आजकल ध्यान यानि मेडिटेशन का प्रचार हमारे देश से भी ज्यादा विदेशों में हो रहा है आज की भौतिकता वादी संस्कृति में दिन रात भाग दौड़, काम का दबाव, रिश्तो में अविश्वास आदि के कारण तनाव बहुत बढ़ गया है | ऐसी स्तिथि में मेडिटेशन से बेहतर और कुछ नहीं है ध्यान से मानसिक तनाव दूर होकर गहन आत्मिक शांति महसूस होती है, कार्य शक्ति बढती है ,नींद अच्छी आती है | मन की एकाग्रता एवं धारणा शक्ति बढती है |

8) योग से ब्लड शुगर का लेवल घटता है और ये LDL या बैड कोलेस्ट्रोल को भी कम करता है। डायबिटीज रोगियों के लिए योग बेहद फायदेमंद है। ये भी पढ़ें : कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल ?

9) कुछ अध्यनों में पाया गया है कि कुछ योगासनो और मैडिटेशन के द्वारा आर्थराइटिस, बैक पेन आदि दर्द में काफी सुधार होता है और दवा जी ज़रुरत कम होती जाती है।

10) योग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है और दवाओं पर आपकी निर्भरता को घटता है। बहुत सी स्टडीज में साबित हो चुका है कि अस्थमा , हाई ब्लड प्रेशर , टाइप २ डायबिटीज के मरीज योग द्वारा पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं।

संक्षेप में कहें तो योग केवल शारीरिक व्यायाम करने या रोगों को दूर करने वाली क्रिया नहीं है बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाली एक जीवन पद्यति है |

सुनील यादव ( भगत जी) शीर्षासन करते हुए।
03/07/2016

सुनील यादव ( भगत जी) शीर्षासन करते हुए।

नाग कुआ / पतंजलि कूप पर विश्व योग दिवस समारोह सम्मेलन
21/06/2016

नाग कुआ / पतंजलि कूप पर विश्व योग दिवस समारोह सम्मेलन

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221007

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