17/07/2025
🌸श्रद्धांजलि 🌸
*एक कर्मयोगी शिक्षक, विचारशील संगठक और राष्ट्रनिष्ठ शिक्षाविद को भावभीनी श्रद्धांजलि*
आज शिक्षा, संगठन और राष्ट्र निर्माण के पथ पर चलने वाले अनगिनत मन, एक ऐसी अनुपम विभूति के वियोग में डूबे हैं, जिन्होंने अपने जीवन की अंतिम साँस तक केवल कर्म, चिंतन और समर्पण को जिया।
*प्रो. जे. पी. सिंहल* —
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, रुक्टा (राष्ट्रीय)के पूर्व अध्यक्ष, प्रसिद्ध शिक्षाविद, लोकप्रिय शिक्षक, संगठनशास्त्र के विचारशील सेनानी, आज 77 वर्ष की आयु में *अनंत की यात्रा पर चले गए*।
उनके देहावसान से न केवल शैक्षिक जगत, बल्कि संगठन और राष्ट्रसेवा की चेतना का एक दिव्य दीपक बुझ गया।
वाणिज्य और प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रो. सिंहल ने,
शिक्षा, समाज और राष्ट्र के लिए सतत कार्य कर अपने *जीवन को एक तपस्या में रूपांतरित* किया।
उनकी आरंभिक शिक्षा बयाना (भरतपुर, राजस्थान) में हुई। वे पुरा (पुरवाईखेड़ा) गाँव के निवासी थे। उन्होंने एम.कॉम और एम.बी.ए. करने के बाद अग्रवाल कॉलेज, जयपुर में अध्यापन से करियर की शुरुआत की, जहाँ बाद में वे प्राचार्य भी बने। सरकार ने उन्हें राजस्थान विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया।
उनका शैक्षणिक योगदान केवल पठन-पाठन तक सीमित नहीं रहा— उन्होंने वाणिज्य, प्रबंधन, विधि और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर कईं पुस्तकों की रचना की। NAAC की एग्जीक्यूटिव और जनरल काउंसिल के सदस्य के रूप में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय विचार से बचपन से जुड़े प्रो. सिंहल केशव विद्यापीठ जामडोली के सचिव तथा अध्यक्ष रहे। वे राजस्थान विश्वविद्यालय की सिंडीकेट के निर्वाचित सदस्य, कुलपति चयन समितियों के सदस्य, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की वित्त समिति सहित कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य भी रहे।
उनके कार्यों की राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सराहना हुई। राजभवन, जयपुर में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें हाल ही में मानद पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई थी। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2015 में "पं. मदन मोहन मालवीय पुरस्कार" प्रदान किया गया। राजस्थान स्टेट जेसीज द्वारा आउटस्टैंडिंग पब्लिक स्पीकर अवॉर्ड, अग्रवाल समाज समिति, जयपुर द्वारा अचीवर्स अवॉर्ड,अग्र स्वयंसेवक संघ द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, श्री सुंदर सिंह भंडारी ट्रस्ट द्वारा सामाजिक एवं राजनीतिक समरसता हेतु सम्मान सहित कईं सम्मानों से भी विभूषित किया गया।
*उनका संपूर्ण जीवन एक जीवंत पाठशाला था* —
जहाँ विचार, आचरण और उद्देश्य तीनों एकाकार होकर शिक्षा, शिक्षक और संगठन को साधना बना देते थे।
*वे विचारों को केवल कहते नहीं थे—उन्हें जीते थे।* वे संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटे—उसे सहेजते और दिशा देते थे।
*वे केवल पदों पर नहीं रहे—बल्कि हर भूमिका में प्रेरणा के स्रोत बनकर उभरे।*
आज शैक्षिक महासंघ के लाखों कार्यकर्ता, उनके परिवारजन तथा विचार-संवेदना से जुड़े असंख्य शिक्षाविद, विद्यार्थी और समाज जन इस वज्रतुल्य क्षति से व्यथित हैं।
हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे इस पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें
और हम सबको यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति !
*अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ परिवार*