23/09/2024
अपनी पीड़ा सह लेना और दूसरे जीवों को पीड़ा न पहुंचाना, यही तपस्या का स्वरूप है।
*-संत तिरुवल्लुवर*
विक्रमी संवत २०८१, अश्विन मास, कृष्ण पक्ष, षष्ठी
🚩 *ll जय श्री राम ll* 🚩