Dhamma Journey

Dhamma Journey

Share

The page 'Dhamma Journey' is created to make people Aware about Buddha And His Dhamma, Art, History, Ancient Buddhist Heritage, Culture and Civilization.

02/02/2026

Babu Jagdev Prasad Bharat Lenin जन्मदिन पर कोटिश नमन

29/01/2026

Buddha in Meditation

27/01/2026

Shakyamuni Buddha

24/01/2026

भगवान बुद्ध संत वन में ध्यान कर रहे थे














.



21/01/2026

Buddha

18/01/2026

Namo Buddhaya

03/01/2026

क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती पर कोटिश नमन 🙏🏻
रूढ़िवादी समाज से लड़कर विशेषकर स्त्रियों तक शिक्षा‌ पहुंचाने वाले फुले दम्पत्ति को नमन... 🙏🏻

29/12/2025

भूर्जपत्र पर लिखी उपलब्ध संसार की सबसे प्राचीन पुस्तक " धम्मपद " है. मध्य एशिया के खोतन से मिली है. खरोष्ठी लिपि में लिखी गई है. भाषा गंधारी प्राकृत है. यह ईसा की प्रथम-दूसरी सदी की है.

29/12/2025

Namo Buddhaya

08/08/2025

वाट असोकाराम बौद्ध मठ, थाईलैंड....

जैसाकि हमें चक्रवर्ती सम्राट अशोका के अभिलेखों और सिंहली ग्रंथों (दीपवंस, महावंस) से ज्ञात होता है कि सम्राट अशोका ने बुद्ध धम्म के प्रचार के लिए विदेशों में धम्मदूत भेजे थे। श्रीलंका, म्यांमार, सीरिया, मिस्र, मेसीडोनिया, एपिरस, सिरीन... की तरह ऐसा माना जाता है कि बुद्ध के धम्म को चक्रवर्ती सम्राट अशोका ने अपने समय में ही थाईलैंड भी पहुँच दिया था। थाईलैंड में Wat Asokarama (वाट असोकाराम) के नाम से एक बौद्ध मठ भी है। इसका नाम भारतीय राजा चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान द्वारा पाटलिपुत्र में बनवाया हुआ "असोकाराम विहार (Asokarama Vihara)" से प्रभावित है, जहाँ पर अशोका ने तीसरी बौद्ध संगीति करवाया था। इस मठ में अशोका द्वारा बनवाये हुए एकमुखी सिंह स्तम्भ की प्रतिकृति और सम्राट अशोका की प्रतिमा भी है।

Buddhism is believed to have come to what is now Thailand as early as 250 BCE, in the time of Indian Emperor Ashoka.

Wat Asokarama is built by Dhammayuttika monk, Phra Acharn Lee Thammawaro in 1962. This temple is famous for practicing meditation for its lush surrounding. A temple built in ancient India by Emporer Asoka inspired the name of Wat Asokarama.
भवतु सब्ब मंगलं। साधु! साधु! साधु!
👇👇 वाट असोकाराम बौद्ध मठ 👇👇 शेयर करें...

10/07/2025

भगवान बुद्ध ने जिस दिन सर्वप्रथम ज्ञान दिया था, वह 'गुरु पूर्णिमा' है। इसी घटना को "धर्मचक्र प्रवर्तन" कहते हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न बुद्ध के धर्मचक्र प्रवर्तन का प्रतीक है। बधाई धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस...🪷

Want your school to be the top-listed School/college in Varanasi?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Website

Address


Varanasi
221007