19/10/2025
Subh Dipawali
It is a platform formed by students to discuss on todays' most trending subjects / issues.
#मंथन
विश्वविद्यालय एवं डिग्री कॉलेजों के छात्र-छात्राएं द्वारा मौजूदा समय के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक मुद्दों पर अपनी राय एवं परिचर्चा करते हैं| इस परिचर्चा के समय एवं स्थान की जानकारी इस पेज के माध्यम से|
समय समय पर इस पेज के माध्यम से आपके सभी के विचार भी आमंत्रित हैं|
इस परिचर्चा का उद्देश्य मात्र संवाद करना नहीं अपितु उस विषय के सभी पहलुओं को जानना और उसके सामाजिक सम्बन्ध को भी जोड़ना है|
यह पेज माय होम इंडिया (My Home India) द्वारा संचालित प्रकल्प का हिस्सा है|
19/10/2025
Subh Dipawali
14/08/2023
उत्तरं यत् समुद्रस्यए हिमाद्रश्चैव दक्षिणम्। वर्ष तद् भारतं नामए भारती यत्र संतति।।
08/04/2018
त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के मास्टरमाइंड ने कहा, लेफ्ट सरकार के दौरान 54000 पॉलिटिकल मर्डर ...
22/02/2018
#मंथन
विषय: युवा भारत और इसकी अभिव्यक्ति
आप सभी अपने विचारों के साथ सादर आमंत्रित हैं -
दिनांक: 25-02-2018
समय: 16:30 बजे
स्थान: ब्रोचा मैदान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
19/09/2017
17/09/2017
Gaureesh Singh
छात्र पत्रकारिता (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)
द्वारा --
*रोहिंग्या संकट क्या है, अतीत से वर्तमान तक*
म्यांमार शासन से बचने-बचाने से लेकर दूसरे देश में शरण पाने की फिक्र हो या अस्तित्व बचाने से लेकर भविष्य का सवाल- रोहिंग्या मुसलमानों के सामने अंधेरा ही अंधेरा है।
*1400 ईस्वी से अराकन में बसे हैं रोहिंग्या*
बर्मा (अब म्यांमार) के अराकान प्रान्त में 1400 ईस्वी में ये मुसलमान आ बसे थे। नाक-नक्श से ये एशियाई हैं। भारतीय उपमहाद्वीप से आए हुए लगते हैं। अराकान प्रान्त म्यांमार के पश्चिम और बांग्लादेश के पूरब में स्थित है। 1430 ईस्वी में अराकान पर शासन करने वाले बौद्ध राजा नारमीखला ने इन्हें शरण दिया था। उनके दरबार में ये नौकर-चाकर से लेकर बाहर मजदूरी का काम करते थे।
*जब भारत में मुगल थे, तो अराकान में रोहिंग्या*
कालान्तर में जब भारत में मुगलों का शासन कायम हुआ, तो इन रोहिंग्या मुसलमानों के दिन भी फिरे। इनकी भी सत्ता कायम हुई। इन्होंने अपने इलाके में मुगलों की तर्ज पर शासन शुरू किया। दरबार के अधिकारियों से लेकर पदवियों तक के नाम मुगलों की तर्ज पर रखे जाने लगे।
*1785 ईस्वी में बौद्धों का अराकान पर अधिकार, हुए नरसंहार*
जब हिन्दुस्तान में मुगल कमज़ोर हुए और अंग्रेजों की ताकत मजबूत होती चली गयी। उसी समय 1785 ईस्वी में बर्मा के बौद्धों का अराकान पर अधिकार हो गया। करीब 35 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान खदेड़ दिए गये या नरसंहार का शिकार हुए।
*एक बार फिर रोहिंग्या मुसलमानों के दिन फिरे*
जब अंग्रेजों ने 1824 से 1826 के बीच चले युद्ध में बर्मा को पराजित किया और अराकान पर अपना आधिपत्य जमा लिया। अब अंग्रेजों ने रणनीति के तहत रोहिंग्या मुसलमानों और बंगाल के लोगों को अराकान में बसने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया। रखाईन इलाके में इस नयी बसावट से बौद्ध बेचैन हो गये। अंग्रेज यही चाहते थे। ‘फूट डालो शासन करो' की जो नीति वे भारत में चला रहे थे, उसी को वे बर्मा के अराकान में भी अमली जामा पहनाने लगे। रोहिंग्या मुसलमानों के लिए ये स्थिति अनुकूल थी। उन्होंने बौद्धों के खिलाफ अंग्रेजों का जमकर साथ दिया।
*रोहिंग्या मुसलमानों पर दोबारा संकट*
*द्वितीय विश्वयुद्ध में बौद्ध-जापानियों से लड़े रोहिंग्या-अंग्रेज*
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों को बर्मा से खदेड़ दिया गया। जापानी सैनिकों के सामने वे टिक नहीं सके। तब बौद्धों के हौंसले बुलन्द हो गये। उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों से पुराना हिसाब बराबर करना शुरू कर दिया। ये वो समय था जब सुभाष चन्द्र बोस हिन्दुस्तान की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ रहे थे और जापानी समर्थन से अपनी सेना को मजबूत कर रहे थे। रोहिंग्या मुसलमानों की सहानुभूति अंग्रेजों के साथ बनी रही। जापानी सैनिकों ने जासूसी का आरोप लगाकर रोहिंग्या मुसलमानों के साथ ज्यादती की। डर से करीब एक लाख मुसलमान एक बार फिर बंगाल भाग गये।
1962 ई. में जब जनरल नेविन तख्ता पलटा, तब रोहिंग्या मुसलमानों ने भी इस अवसर को स्वतंत्र होने की लड़ाई के तौर पर लिया। मगर, नये सैनिक शासक ने रोहिंग्या मुसलमानों की आवाज़ बुरी तरह से कुचल दी। उन्हें ‘स्टेट लेस' घोषित कर दिया गया। चूकि आम बौद्धों की भावना रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ रही थी और जिसकी वजह अतीत में दोनों के बीच हुए संघर्ष का इतिहास रहा था, इसलिए सैनिक शासन ने इस भावना का फायदा उठाते हुए रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म किए।"
* नागरिकता छिनी *
रोहिंग्या मुसलमानों के लिए 1982 ई. और भी ख़तरनाक वर्ष रहा, जब सैन्य शासन ने उनके नागरिक अधिकार तक छीन लिए। बुनियादी शिक्षा के अलावा हर किस्म की शिक्षा तक से उन्हें वंचित कर दिया गया। उसके बाद से इनकी स्थिति दयनीय होती चली गयी। नरसंहार के दौर चलते रहे, रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियां जलायी जाती रहीं। उन्हें उनकी ज़मीन से बेदखल किया जाता रहा। मस्जिद तोड़ दिए गये।
2016 ई. में रोहिंग्या मुसलमानें और बौद्ध लोगों के बीच जो हिंसा छिड़ी, उसके बाद करीब डेढ़ लाख रोहिंग्या मुसलमान विस्थापित हुए। अब इस साल 2017 के 25 अगस्त के बाद से शुरू हुई हिंसा के ताज़ा दौर में भी लाखों लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा है। इस बार आरोप रोहिंग्या मुसलमानों पर है जिन्होंने संगठित होकर म्यांमार के सैनिकों पर हमला बोला। म्यांमार के सैनकों और लोगों में गुस्सा इतना ज्यादा है कि वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि लोकतंत्र समर्थक नेता के रूप में दुनिया में नाम कमा चुकी आंग सान सू की भी कह रही हैं कि रोहिंग्या म्यांमार के नागरिक नहीं हैं।"
*अंतर्राष्ट्रीय दख़ल*
*म्यांमार सरकार नहीं सुन रही है दुनिया की सलाह*
संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इन्टरनेशनल और अमेरिका तक ने म्यांमार सरकार से रोहिंग्या मुसलमानों के साथ सही तरीके से पेश आने की अपील की है, मानवाधिकार की रक्षा की अपील की है लेकिन म्यांमार सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। नयी समस्या दुनिया भर के जेहादी तत्व हैं जो बिन मांगे समर्थन देकर रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या बढ़ा रहे हैं। वहीं भारत जैसे देशों की प्रतिष्ठा भी फंसी हुई है जो इस मामले में बहुत कुछ कर नहीं पा रहा है।"
*बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों के लिए शरणस्थली*
फिलहाल बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों के लिए बड़ी शरणस्थली बना हुआ है। वे वहां से भाग-भाग कर भारत में भी शरण ले रहे हैं। 6 सौ साल बाद भी रोहिंग्या मुसलमान अराकान प्रान्त में अपनी ज़मीन सुनिश्चित नहीं करा पाए हैं।
08/09/2017
In one word, this ideal is that you are divine. Swami Vivekananda
Let's read, think and share
#मंथन
02/09/2017
नमस्कार,
सभी सादर आमंत्रित हैं।
आप सभी के प्रयासों से पं0 दीन दयाल उपाध्याय स्टडी सर्किल का इस नव सत्र में उद्घाटन इस रविवार होना सुनिश्चित हुआ है।
स्टडी सर्किल के नवीन हुंकार व ज्ञान का प्रज्वलन करने हम सब पुनः तैयार हो चुके है।
जिसमें आप सभी युवाओं की जोरदार उपस्थिति अपेक्षित हैं।
दिनांक- सितम्बर 03, 2017
समय- दोपहर 12 बजे
स्थान- छात्र कल्याण परिषद भवन (मधुबन के सामने)काशी हिन्दू विश्वविद्यालय।
नमस्कार,
सभी सादर आमंत्रित हैं।
आप सभी के प्रयासों से पं0 दीन दयाल उपाध्याय स्टडी सर्किल का इस नव सत्र में उद्घाटन इस रविवार होना सुनिश्चित हुआ है।
स्टडी सर्किल के नवीन हुंकार व ज्ञान का प्रज्वलन करने हम सब पुनः तैयार हो चुके है।
जिसमें आप सभी युवाओं की जोरदार उपस्थिति अपेक्षित हैं।
दिनांक- सितम्बर 03, 2017
समय- दोपहर 12 बजे
स्थान- छात्र कल्याण परिषद भवन (मधुबन के सामने)काशी हिन्दू विश्वविद्यालय।
#मंथन
विषय: वस्तु एवं सेवाकर (Goods and Services Tax)
आप सभी अपने विचारों के साथ सादर आमंत्रित हैं -
दिनांक: 28-05-2017
समय: 17:30 बजे
स्थान: ब्रोचा मैदान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय |
07/05/2017
पं दीन दयाल स्टडी सर्किल #मंथन ( #माय_होम_इंडिया) के तहत आज का विषय - काश्मीर: समस्या एवं समाधान
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस गंभीर मुद्दे पर अपने विचार रखे|
इस परिचर्चा में प्रो. अरविन्द जोशी सर, श्री मयंक नारायण सर, प्रो. अभय सर द्वारा भी महत्त्वपूर्ण एवं अनसुलझे तथ्य रखे गये|
इस परिचर्चा से जुड़े –
संयोजक: सुयज्ञ – 9795060443, सहसंयोजक: पियूष जी – 8765759805 गौरीश जी– 8318387986, अम्बर जी– 9455441696, प्रिया जी