क्या आत्मा ज्ञान अर्जित और संरक्षित कर सकती है ?
आत्मज्ञानी भाग 2
क्या आत्म ज्ञान किताबो से पाया जा सकता है कितना आसान है यह प्राप्त करना और इसके होने के बाद क्या होता है यह समझते है
किताबो में हर एक संत महात्मा ने एक ही बात कही है जो मैं पिछली पोस्ट में बताया हु लेकिन उन बातो को पढ़ के जान लेना और वह खुद में होना क्या अंतर है इसे सामान्य स्वरूप में समझे तो यही है की आत्मज्ञानी को सब ज्ञात होता है और जो पढ़ के समझ लेते है उनकी बुद्धि में वे बाते नही हो सकती है वे कपोल कल्पना में घूमते है की उनको ज्ञात हो गया की वो आत्म ज्ञानी है।
वो घूम घूम कर बताते है अपना ज्ञान लोगो को देते है जबकि ज्ञान उतना ही देते है जितना वे पढ़े होते है उससे अधिक नही जबकि आत्मज्ञानी को तो अन्नत ज्ञान होता है वह सारी बाते समझता है जानता है और करता है।
यदि सामान्य रूप से समझा जाए तो आत्मज्ञान जब कुंडलिनी शक्ति पूर्ण जागृत हो जाती है उसके भी बहुत उपर उठने के बाद ही आता है किसी को बोल दिया की मुझे ज्ञान है तो ज्ञान थोड़े हो जाएगा।
जैसे आत्मा ना जलती है न पानी में भीगती है वैसे ही आत्मज्ञानी का शरीर भी हो जाता है
उदाहरण के रूप में तैलंग स्वामी 1 हफ्ते तक गंगा नदी में अंदर घुस के रहे थे न उनको स्वास लेने की समस्या हुई न ही अन्य कोई समस्या वो आत्मज्ञानी थे
लहारी महाशय एक स्थान से दूसरे स्थान पर पल भर में चले जाते थे वह भी अपने शरीर के साथ ही क्युकी आत्मा जो परमात्मा का अंश है हर जगह रहती है।
ऐसे एक नही कई संत महात्मा रह चुके है संसार में।
तो आत्मा का ज्ञान अर्जित करने के लिए एक मात्र मार्ग है साधना का साधना करते रहिए एक समय आएगा की वह आपके अपने शरीर में ज्ञान प्रदान करेगी फिर आपका मन नही होगा की आप किसी को बताए बस यदि उस परमात्मा के आज्ञा अनुसार ही आप कर्म करेंगे
इस आत्मज्ञान को प्राप्त कर लेने के बाद यह आपको हर तरह से संरक्षित करती है न आपकी उम्र बढ़ती है न शरीर का नाश होता है और धीरे धीरे आप आगे बढ़ते चले जाते है।
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आत्मज्ञानी
आत्मा का न स्वरूप होता है न रंग होता है न उसे आग जला सकती है न पानी में वह भीगती है तो फिर आत्मा का ज्ञान कैसा इसे समझते है
आत्मा एक छोटा सा कण है उस परमात्मा का आत्मा होती है जो शुद्ध हो स्वक्ष हो तो जिस मनुष्य को यह ज्ञान हो जाता है की आत्मा उसी परमात्मा का ही अंश मात्र है उसे न फिर दुख होता है न सुख होता है न उसके लिए माया होती है न मोह होता है न वह किसी का बेटा है न भाई न बहन न ही पति पत्नी या अन्य कोई किसी भी प्रकार का रिश्ता उसके लिए बचता है क्युकी इस स्तर पर उसे यह समझ आ जाता है की संसार का हर प्राणी उसी परम का अंश है और उसी में लीन होगा अंत में तो यह मायावी संसार के रिश्ते किस हेतु।
यदि मनुष्य यह बोले की वह आत्म ज्ञानी है और दुखी हो सुख भी महसूस करे या अन्य लालच में पड़े तो वह कहा से आत्म ज्ञानी वह तो बस माया के उस हिस्से में फसा हुआ है जहा माता माया उसे यह महसूस करवा रही है की उसे आत्मा का ज्ञान है और उसी अहंकार में रह के वह आगे बढ़ता है और धीरे धीरे अंत की तरफ बढ़ता चला जाता है।
यह बोलना जितना आसान लगता है उतना ही कठिन समझना है और इस स्तर को पा लेना अत्यधिक कठिन मार्ग होता है।
हर पग पग पर माता माया नाना प्रकार के खेल ले के आ जाती है और मानव उन्ही खेलो में फस कर के अपने जीवन को बीता ही देता है।
इसके अतिरिक्त एक और चीज होती है जो सही में आत्मज्ञानी हो जाते है उनको अपना पिछला सारा जन्म ज्ञात हो जाता है साथ ही साथ अन्य प्राणियों का भी सारे जन्म पिछले और साथ ही साथ भूत वर्तमान भविष्य सब ज्ञात हो जाता है। ब्रह्मांड की हर बात ज्ञात हो जाती हैं।
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ऊर्जा का खेल भाग 2
यदि सूक्ष्म रूप से देखा जाए तो कुछ भागों को मिला के जल्दी ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है और आगे बढ़ा जा सकता है लेकिन कहना जितना आसान है करने के दौरान उतनी ही समस्या आती है और अधिकतर मनुष्य भटक ही जाते है क्युकी जिस ऊर्जा को वो संपूर्ण समझ लेते है वह मात्र अंश ही होती है और मनुष्य समझता है की उसने सब पा लिया कुंडलिनी शक्ति जागरण कर लिया और मन के वहम में वो धीरे धीरे अहंकार को प्राप्त हो जाते है और अंत में अपना सब नष्ट भी कर लेते है।
तो यह समझना आवश्यक है की कब पूर्णता हुई ताकि भटकाव न हो मन का तो आपको यह समझना है की पूर्ण केवल और केवल परमेश्वर ही है अन्य नही तो अपने आपको पूर्ण न ही जाने बस आगे बढ़ते जाए और जिस दिन आपका शरीर विलीन होगा और आत्मा उस परमात्मा में विलीन हो जाएगी तब आपको पूर्णता प्राप्त होगी
अतः अपना अहंकार त्याग कर यह जाने कि मंजिल बहुत दूर है आपके द्वारा चमत्कार हो तो उसे भी बस यह समझिए की उस परमात्मा को आपके द्वारा करवाना था करवा दिया और भूल जाए आगे बढ़ते चले जाए।
यदि आप मंत्र जाप योग मार्ग और ध्यान मार्ग को मिला कर के आगे बढ़ते है तो आपके सफल होने का मार्ग जल्दी प्रशस्त हो सकता है लेकिन ऐसा भी नही है की आपने आरंभ किया और 1 वर्ष के अंदर सफल हो गए यह समय कई साल का भी हो सकता है कई जन्म का भी यह आपके द्वारा की गई साधना के उपर निर्भर करता है।
जब ऊर्जा आना आरंभ हो जाती है तब अहंकार लाती है कार्य सफल होते है बोली हुई बाते सही होने लगती है लिखा गया भी सत्य हो जाता है सोचा हुआ भी हो जाता है लेकिन कभी भी दिखावा न करना बस चलते जाना ये सभी सिद्धियां भटकाव देती है और साधना मार्ग से विरक्त कर देती है।
बहुत से साधकों को यहां तक का भ्रम हो जाता है की अब उनको मंत्र जाप करने की आवश्यकता नही पड़ती है उनके अंदर बहुत सी ऊर्जा है लेकिन यह सब मन का वहम मात्र है।
बहुत से साधकों को चीज़े दिखने लगती है और वो उसी को देखने में लग जाते है और धीरे धीरे भटक ही जाते है।
अतः बस साधना में लगे रहिए और आगे बढ़ते रहिए
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ऊर्जा का खेल
संसार संपूर्ण ब्रह्मांड एक ऊर्जा से ही बना है और ऊर्जा से ही संचालित होता है। हर सजीव निर्जीव वस्तु की ऊर्जा होती है। पशु पक्षी पेड़ पौधे मनुष्य हर एक का अपना ऊर्जा स्तर होता है। इसके अतिरिक्त भूत प्रेत पिसाचिनी यक्ष गंधर्व किन्नर योगिनी सभी ऊर्जा के बल पर ही मनुष्य से आगे रहते है। बहुत से मनुष्यो का कहना है की उनको भूत प्रेत नही दिखते कारण यही है की उनका खुद का ऊर्जा स्तर इतना हुआ ही नही की उनको देख सके ऊर्जा के कारण ही पहले के ऋषि मुनि मनुष्य लोक से अन्य लोक में शशरीर आवागमन करते थे। लेकिन आज के मनुष्य की इतनी ऊर्जा रह ही नहीं गई है की वो इस लोक से अन्य लोक जा सके।
यदि पति पत्नी में एक की ऊर्जा अधिक और दूसरे की कम हो तो भी आध्यात्मिक उन्नति संभव नही होगी और यदि दोनो में समान ऊर्जा हो तो वे आध्यात्मिक मार्ग पर आगे भी जा सकते है।
अब यह समझ चुके है की सभी चीजे ऊर्जा से है तो ऊर्जा बढ़ाने के भी बहुत से मार्ग है जिसकी ऊर्जा अधिक होगी वह अधिक आगे बढ़ेगा।
भूत प्रेत पूजन से उत्पन्न ऊर्जा
यह बहुत तेज प्रभाव दिखाती है लेकिन ये अंत समय आने पर हानि करती है जब तक आपका शरीर बलशाली है यह कार्य करती है उसके बाद सब छीन लेती है। साथ ही साथ शरीर के नष्ट होते ही यह ऊर्जा चली जाती है अगले जन्म में नही जाती है।
पिशाचीनी डाकीनी या अन्य पूजन से उत्पन्न ऊर्जा
इस तरह की ऊर्जा भी शक्तिशाली होती है लेकिन इसका भी शरीर के अंत के साथ अंत हो जाता है और अंत समय में कष्ट देती है।
यक्ष गंधर्व अप्सरा इत्यादि साधना से उत्पन्न ऊर्जा
यह ऊर्जा अधिक बलि होती है और जीवन में बहुत कुछ प्रदान करती है। इसके बाद जीवन के अंत के साथ ये साधना भी समाप्त हो जाती है अगले जन्म में नही जाती हैं।
केवल ब्रह्मचर्य द्वारा उत्पन्न ऊर्जा
ब्रह्मचारी बहुत शक्तिशाली होते है लेकिन अकेले इसकी ऊर्जा की भी सीमा शरीर तक ही होती है शरीर के समाप्त होते ही यह ऊर्जा चली जाती है अगले जन्म में साथ नही जाती है।
केवल योग मार्ग से उत्पन्न ऊर्जा
योग द्वारा शरीर को बलशाली बनाया जाता है यदि उस ऊर्जा से चक्रों को खोल दिया जाए तो ये अगले जन्म में साथ जाएगी अन्यथा केवल और केवल शरीर के अंत तक साथ रहेगी इसके उपरांत नही
ध्यान द्वारा उत्पन्न ऊर्जा
इसमें यदि सही मायने में किसी ने ध्यान लगाना सिख लिया तो यह ऊर्जा चक्रों का भेदन करती है और आगे आने वाले जीवन में भी साथ जाती है
मंत्र जाप वाली ऊर्जा
यह एक ऐसी ऊर्जा है जो साधक के सर्वप्रथम तो पिछले प्रारब्ध को खत्म करती है इसके उपरांत इस जन्म में साथ देती है व साधक अच्छा हो या कमजोर अगले जन्म में भी जाती है यदि साधक ने चक्रों को खोल दिया और कुंडलिनी जागरण कर ली तो यह ऊर्जा उसके हर जन्म में साथ जाती है।
बाकी का अगले भाग में
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10/09/2023
https://www.meetup.com/shiva-shakti-yoga-meditation-meetup/
Shiva Shakti Yoga & Meditation meetup | Meetup We want to bring wellness & affluence to those who are ready, by triggering and kindling the core powers lying latent and dormant them. This includes a yoga workout, meditation, and individual assistance with issues such as diabetes, cholesterol, high blood pressure, kidney stones, and more.Classes
09/08/2023
Online Yoga and Meditation Free Classes will start on 17th august 2023 at 6 pm (IST)
17 to 30th august free class (5 days in a week)
Starting from 31-8-2023
Monday to friday
Join google meet
You will find link on whatsapp
1 Basic yoga for all (free for 10 days)
Body warmup exercise
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Bhastrika
Meditation
2 Advance yoga
3 kriya yoga
4 kundalini awaking
Who are interested send these information on this whatsapp number +91-7007011853 or +91-9026803709
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14/07/2023
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14/07/2023
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We are grateful for all your guidance, knowledge, and healing which you have given free to so many in your time here serving anyone & everyone. We wish the happiest coming year for you & your sweet family.😍
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