19/09/2015
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आरक्षण बहुत सही गणित है
जरा ध्यान दे हमारे गणित पर ।
वैसे तो मेरी गणित बहुत कमजोर रही है पर फिर भी मैं अपनी बात आप लोगों तक गणितउ के माध्यम से ही पहुंचाना चाहता हूं।।
माना कि सौ व्यक्ति हैं।।
और इन सौ व्यक्तियों कोे खाने के लिए सौ रोटियां हैं।।
वर्तमान में पिछड़ी जाति के 60व्यक्तियों को खाने के लिए 27 रोटियों की व्यवस्था है।।
इसी तरह अनुसूचित जाति व जनजाति के 25 व्यक्तियों के एक समूह के लिए 22.5 रोटियों की व्यवस्था है।।
अब सामान्य वर्ग के तकरीबन 15 आदमियों के लिए 50 रोटियां शेष बचती हैं।
पर समस्या ये है कि सामान्य वर्ग के 15आदमियों में से 3 ब्राहमण जाति के आदमी बेहद शक्तिशाली हैं जो शेष बची 50 रोटियों में से लगभग 45 रोटियां खा जा रहे हैं।
अब समस्या ये है कि सामान्य वर्ग के 12 आदमियों के लिए मुश्किल से सिर्फ 5 रोटियां ही मिल पा रहीं है।
इसी कारण सामान्य जाति के जाट, मराठा, पटेल या पाटीदार अपने लिए ओबीसी की 27 रोटियों में हिस्सेदारी मांग रहे हैं।
अब समस्या ये है कि ओबीसी के 60 लोग वैसे ही सिर्फ 27 रोटियों पर गुजारा करके अपनी जिंदगी चला रहे हैं ऐसे में वो जाट, मराठा और पटेल में अपने हिस्से की 27 रोटियां बांटने को हरगिज तैयार नही हैं।।
इस समस्या का एक ही समाधान है कि कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई 50 फीसदी आरक्षण की सीमा रेखा को लांघा जाऐ और जाट, मराठा, और पटेल के साथ साथ सभी जातियों को उनकी संख्या के अनुपात में नौकरियों में आरक्षण दिया जाऐ।।
अब 60 लोगों के हिस्से की 27 रोटियों पर झपट्टा मारने से बात नही बनेगी ।। जरूरत इस बात की है कि सारी पिछड़ी जाति के लोग और जाट, गूजर , अहीर , यादव , गडरिया , सुनार, लोहार , कुम्हार , कश्यप , निसाद , कुशवाहा , सैनी माली , मराठा, पटेल आदि एक मंच पर आऐं और उन तीन लोगों से अपना हिस्सा छीने जो सिर्फ तीन होकर 45 रोटियां तोड़े जा रहे हैं।।
अगर ये ब्राहमण जाति के तीन लोग सिर्फ तीन रोटी खाकर जीना सीख ले तो समाज मे कोई भी भूखा नहीं रहेगा।।
अच्छा लगे तो हर ग्रुप में , दलित व पिछड़ा वर्ग के प्रत्येक कॉन्टेक्ट पर कई बार रिपीट करो । सभी में जागरूकता पैदा करने का अभियान चलाओ ।
जय भीम .....जय भारत।।