30/01/2026
श्री हरि:
🇮🇳 बापू नहीं रहे — एक युग का अंत 🇮🇳
"BAPU, THE FATHER OF THE NATION, IS NO MORE" — यह शीर्षक आज भी हमारे हृदय को झकझोर देता है।
30 जनवरी 1948 को भारत ने अपना नैतिक पथप्रदर्शक खो दिया, लेकिन उनके विचार आज भी हमारे शिक्षण, संस्कार और नेतृत्व में जीवित हैं।
Harishchandra Inter College, Varanasi
गांधीजी के सत्य, अहिंसा और आत्मबलिदान के आदर्शों को समर्पित,
हम उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं — हर छात्र, हर शिक्षक, हर नागरिक के लिए एक अमर संदेश।
🕊️ उनकी विरासत हमारा पथ है।
📜 उनका जीवन हमारा पाठ है।
🙏 उनका बलिदान हमारी प्रेरणा है।
#हे_राम
P/C-unknown
26/01/2026
श्री हरि:
“Pride in our Constitution 🇮🇳, respect for the Tiranga and unity in diversity—
Harish Chandra Inter College, Varanasi celebrates
77th Republic Day 2026 with discipline, patriotism and hope for a stronger India.
Jai Hind!”
23/01/2026
श्री हरि:
आप सभी को वसंत पंचमी, माँ सरस्वती पूजनोत्सव एवं
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
वसंत पंचमी सिर्फ़ एक तिथि नहीं,
यह नई शुरुआत, नई सोच और नए सपनों का दिन है।
माँ सरस्वती से प्रार्थना है कि हमारे विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ
संस्कार, संवेदनशीलता और सही दिशा भी मिले।
आज के दिन हम नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को भी स्मरण कर रहे हैं—
एक ऐसा नाम, जो साहस, स्वाभिमान और देशप्रेम का पर्याय है।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन रास्तों पर भी
सच और राष्ट्रहित के लिए डटे रहना ही सच्ची शिक्षा है।
आइए, इस पावन अवसर पर
हम सब मिलकर ज्ञान, चरित्र और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को
अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।
आप सभी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।
— हरिश्चन्द्र इण्टर कॉलेज, वाराणसी 🌼📚🇮🇳
06/01/2026
श्री हरि:
आज हरिश्चन्द्र इण्टर कॉलेज, वाराणसी के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि स्मृति, श्रद्धा और संकल्प का दिन है। आज हमारे संस्थापक, हिन्दी साहित्य के युगप्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चन्द्र की पुण्यतिथि है।
भारतेंदु को याद करते हुए किसी मूर्ति या तस्वीर का ध्यान नहीं आता, बल्कि एक ऐसा जागता हुआ विवेक सामने आता है—जो समाज से सवाल करता है, पीड़ा से जुड़ता है और भाषा को आम आदमी की आवाज़ बनाता है। उन्होंने लिखा भी तो इसलिए नहीं कि साहित्य सज जाए, बल्कि इसलिए कि समाज संवर जाए।
अंधेर नगरी में व्यंग्य है तो व्यवस्था पर चोट भी है, भारत दुर्दशा में करुणा है तो जागरण का आह्वान भी।
उनका सबसे बड़ा योगदान यही था कि उन्होंने हिन्दी को दरबार से निकालकर जन-जीवन की चौपाल तक पहुँचाया। वे मानते थे कि साहित्य वही सार्थक है जो मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाए।
1866 में स्थापित हरिश्चन्द्र इण्टर कॉलेज उनकी इसी सोच की जीवित विरासत है—जहाँ शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि संस्कार, सोच और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का पाठ है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें केवल नमन ही नहीं करते, बल्कि यह भी याद करते हैं कि भारतेंदु होना मतलब—
सत्य के पक्ष में खड़ा होना, अन्याय पर प्रश्न उठाना और भाषा को आत्मा की आवाज़ बनाना।
🌼भारतेंदु जी हमारे अतीत नहीं, हमारे मार्गदर्शक हैं।🌼
विनम्र श्रद्धांजलि🙏💐
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31/12/2025
श्री हरि:
📜
🎇अलविदा 2025 | स्वागतम् 2026 🌅
समय की धारा में 2025 अनुभवों और उपलब्धियों का स्मरण बनकर विदा ले रहा है, और 2026 नई आशाओं, संकल्पों व संभावनाओं के साथ हमारा स्वागत कर रहा है।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से समस्त सम्मानित शिक्षकों, प्रिय विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं कर्मचारियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह वाक्य आज भी हमारा पथप्रदर्शक है—
> “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।”
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र, चेतना और राष्ट्रबोध का निर्माण है। भारतेंदु की वाणी हमें कर्म और उत्तरदायित्व का स्मरण कराती है—
> “आवहु सब मिलि रोवहु भारत भाई…”
नववर्ष 2026 में हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि शिक्षक नवाचार के साथ शिक्षण करें, विद्यार्थी आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, अभिभावक सहयोगी बनें और कर्मचारीगण निष्ठा से संस्था को सशक्त करें।
✨ 2026 आप सभी के जीवन में स्वास्थ्य, सफलता और सद्भाव लेकर आए।
अलविदा 2025—स्वागत है 2026 का💐
25/12/2025
श्री हरि:
🙏 श्रद्धांजलि महामना को 🙏
आज भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर हम सब उनके महान योगदान को स्मरण करते हैं।
वे केवल एक शिक्षाविद् नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, समाज सुधारक और संस्कृति के संरक्षक थे।
✨ उनका योगदान:
- 📚 शिक्षा का दीपक: 1916 में उन्होंने काशी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना की, जो आज भी ज्ञान और संस्कृति का अद्वितीय केंद्र है।
- 🕊️ स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा: कांग्रेस के चार बार अध्यक्ष रहे और गरम दल और नरम दल के बीच सेतु का कार्य किया।
- 🌿 समाज सुधारक: उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को मिटाने और शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने का प्रयास किया।
- 🎙️ वाक्पटुता और नेतृत्व: उनकी ओजस्वी वाणी ने लाखों युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया।
✨ उनकी प्रेरणा आज भी जीवित है
मालवीय जी का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को जागृत करने का माध्यम है।
📖 महामना का अमर विचार:
"यदि आप विद्वान हैं, बलवान हैं और धनवान हैं तो आपका धर्म यह है कि अपनी विद्या, धन और बल को भी देश की सेवा में लगाओ।"
उनकी जयंती पर हम संकल्प लें कि हम शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च मानकर उनके आदर्शों को आगे बढ़ाएँ।
जय महामना! जय भारत! 🇮🇳
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