03/05/2016
हमारा समाज आज जैसा है वह सदैव से ऐसा नही था, हमारे इतिहास में एक ऐसा समय भी था जब क्रूरता दमन और उत्पीड़न का बोल बाला था जब हमारा देश विदेशी ताकतों की जंजीरों में जकड़ा हुआ था जनता की चेतना अपमान के बोझ तले दबी हुई थी समाज में अशिक्षा अंधविश्वास तथा पाश्चात्य सभ्यता चरम पर थी तथा देश की जनता इन जंजीरो से मुक्त होने के लिये छटपटा रही थी, इसी घटाटोप अंधेरे में आशा का एक नन्हा सा दीप जला, प्रयाग के एक छोटे से घर में एक बालक का जन्म हुआ जिसने अपने नैतिक साहस, प्रखर बुद्धि तथा भाषा कौशल के बल पर दुनिया के सबसे बड़े सम्राज्य को चुनौती दी जो अपने देश की सांस्कृतिक, अध्यात्मिक और बौद्धिक धरोहर के लिए लड़ा और जिसने देश में एक नये युग का सू़त्रपात किया।
एक ऐसा व्यक्ति जिसके मानवीय गुणों को देखते हुये उसे कहा गया ’’महामना’’ महामना मदन मोहन मालवीय।
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