दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
BHU : द Back बेंचर्स
A very innovative page about BHU and stuffs related to BHU..
23/01/2022
love is a restless traveller.....
16/12/2021
Cold weather, chitchatting with the favorite person, walking on the roadside under street lights to the caffe and eating favorite food.
~ Amazing feeling of a back benchers
A patient urgently requires platelets from A+ve donor. (Single Donor Platelet..SDP).
He is admitted in Apex hospital Chitaipur Varanasi.
Family member of same blood group have already donated .
Still more is required.
Please help us out at the earliest.
Contact Person:
Aman Agrawal..7985951168
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर
जो इधर दिल में है या रब वो उधर पैदा कर
काम लेने हैं मोहब्बत में बहुत से या रब
और दिल दे हमें इक और जिगर पैदा कर
~ बेख़ुद देहलवी
एक तरफा मोहब्बत मौन की ओर ले जाती है और दो तरफा मोहब्बत बगावत की ओर...!!
~अज्ञात
09/04/2020
आज मै मणिकर्णिका सा शांत महसूस कर रहा हूँ,
और तुम?
तुम जब भी गौदोलिया सी व्यस्त होती हो, मै बाबा विश्वनाथ जी का घंटा घड़ियाल बन जाता हूँ!
जब तुम दुर्गाकुंड के मंदिरो सा फील करती हो, मै सदियों से इश्क़ का साक्षी रामनगर किला-सा फील करता हूँ!
जब तुम बेमौसम बारिश की बूँदों से बात करती हो, मै अमलतास और गुलफोहर की फूलों सी खुशबू लिए, शुद्ध चाँदनी सा नहाया हुआ "काशी हिन्दू विश्वविद्यालय" बन जाता हूँ!
अरे पागल! कोई ऐसे कैसे फील करेगा और बन जायेगा?
ऐसा ही है, ये भस्म और रस्म का शहर है, यहाँ पर इश्क़ की कोई बंदिशे नहीं होती है! जो भी इश्क़ की भीनी खुशबू मे भीग जाना चाहता है, वो ये सब फील कर सकता है!
अच्छा तो मै गोदौलिया सी व्यस्त कैसी हो गई?
जैसे मै बाबा विश्वनाथ जी का घंटा घड़ियाल बन गया
हाँ, सही कहा तुमने! अगर ये दश्वाशमेध घाट न होता तो इश्क़ के दरम्यान हमारे दिल की नजदीकियां इतना न होती!
अच्छा तो तुम्हारे लिए इश्क़ जरूरी है या शहर?
मेरे लिए सबसे जरूरी ये बनारस शहर है और मेरा शहर तुम हो, "सिर्फ तुम!"
संस्करण©राहुल
हर शहर मे एक वीरानी है, इस सन्नाटे में संवाद है ढेर सारे सवाल भी हैं!
जवाब भी है बस, कहीं खो सा गया है! शहर का मिजाज बदल सा रहा है! और इसी बीच खुशी खुशी वनस्पतियों की कलम से और नदियों की स्याही से हमारी प्रकृति इस धरती पर उकेर रही है नयनाभिराम कविताएं!
गर हम न चेतें और लिखते रहे विनाश की इबारत, तो काव्य की इस सुंदरता को देखने के लिए कोई न रहेगा!
न हम-तुम, न परिवार, न समाज और न देश!
14/03/2020
बनारसीपन को जानना है, काशी को समझना है तो घाट से बेहतर कोई पाठशाला नहीं, कोई साहित्य नहीं! अल्हड़ जिंदगी देखनी हो, फक्कड़ दर्शन समझना हो या मोक्ष की मीमांसा करनी हो, सब इन घाटों पर रचा बसा है! समय के साथ इस शहर का आवरण भी बदला और लाइफस्टाइल भी लेकिन ये घाट ही हैं जहां आज भी बनारस पूरी रवानी से बहता है!
13/03/2020
बारिश और बीएचयू
04/03/2020
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में कवि सम्मेलन...
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के वार्षिक सांस्कृतिक समारोह के तहत 'BHU' परिसर में ही कवि सम्मेलन के आयोजन के बारे में न्यूज़ पेपर में पढ़ा, तो कविता प्रेमी होने के नाते, मैं उस कार्यकम में जाने का लोभ संवरण नही कर पाई।बच्चो को और पति को समय न होने के कारण और मुझे कवि सम्मेलन स्थल के बारे में जानकारी न होने के कारण, यह तय हुआ कि बेटी मुझे कार्यक्रम स्थल तक पहुँचा कर और उपयुक्त जगह बैठा कर वापिस अपनी क्लास करने चली जायेगी। किसी कवि की प्रस्तुति छूट न जाये, इस कारण अति उत्साह और उत्सुकता से लबरेज मैं,समय से कुछ पहले ही कार्यक्रमस्थल पहुँच गयी।वहाँ पहुँच कर देखा कि मंच सजा हुआ है। लेकिन कोई भी कवि गण वहां विराजमान नही हैं।लगा कि अभी बहुत देर लगेगी कार्यक्रम के शुरू होने में।लेकिन अभी 5 मिनट भी नही हुआ था कि एक सूत्रधार मंच पर आया जिसने अपना नाम 'मिठाई लाल' बताया और घोषणा की, कि कवि सम्मेलन में बाहर से आये कवियों से पहले BHU के नवोदित कवियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देने के लिए उनका कवितापाठ होगा।सूत्रधार के नाम की वजह से हाल में मौजूद सारे छात्रों ने जोर से ताली बजा कर, वाह-वाह कर के और कुछ मस्ती भरे अंदाज में उसका स्वागत किया। उसके बाद मिठाई लाल ने एक-एक नवोदित कवि का नाम ले कर मंच पर बुलाना शुरू कर दिया।नए कवि जो कि BHU के छात्र ही थे, लिहाज कम उम्र के ही थे, लेकिन उनकी कविताएं सुन कर मैं दंग रह गयी।सब ने एक से बढ़ कर एक कविताएं पढ़ीं।किसी ने देश के ताजा हालात पर, किसी ने CAA, पर,तो किसी ने नारी जाति के अपमान पर,तो किसी ने कश्मीर के मुद्दे को अपनी कविता में उठाया।लेकिन एक सबसे खास बात ये रही कि युवा कवियों ने अधिकतर श्रृंगार रस की कविताएं कहीं।जिसमे प्रेम प्यार,मोहब्बत, प्रेमिका आदि का जिक्र था।और सबसे मजेदार बात ये रही कि कविता में इन शब्दों के आते ही युवा छात्र-छात्राओं से भरा पूरा का पूरा सदन वाह-वाह के शोर से गूंज उठता था।लड़कियां तो कम ही, लेकिन सारे के सारे लड़के जोर-जोर से ताली, सीटी बजाने के साथ बहुत ही उत्साहित हो कर, मस्ती भरे अंदाज में कमेंट पास कर के माहौल को और भी मस्ती भरा बनाने में कोई कसर नही छोड़ रहे थे।उनमे से कोई एक छात्र एक अजीब सी आवाज वाला एक खिलौना टाइप का यंत्र ले कर आया था। जिसे मैंने अक्सर मेले में बिकते और युवाओं और बच्चो को बजाते देखा और सुना है।उसकी आवाज बहुत ही अजीब टाइप की होती है।और वो छात्र वही यंत्र लगभग हर कविता के अंत मे बजा दे रहा था। जिससे माहौल और मजाकिया और मस्ती भरा हो जा रहा था।मजे की बात ये कि हर युवा कवि अपनी उम्र के छात्रों की नब्ज पहचानते हुए ऐसे ही रसीले विषय पर कविता कहने की कोशिश कर रहा था। जिससे कि हर एक युवा मन आनन्दित हो जाये।हां, जब छात्राओं के कविता कहने की बारी आ रही थी, तो उनलोगों ने अपनी और अपने विश्वविद्यालय की गरिमा के अनुरूप गम्भीर विषयों को ही उठाने की कोशिश की। युवा छात्र उनकी भी रचना पर ताली बजा कर उत्साह वर्धन करते नजर आए, लेकिन कुछ शरारती छात्र हूटिंग कर के मजे लेने से बाज नही आ रहे थे।छात्रों के बाद परम्परागत तरीके से मेहमान कवियों का मंच पर स्वागत कर के उनको मंच पर आसीन कराया गया और ठीक इसी वक्त सदन के एकदम आगे की पंक्ति में BHU के वरिष्ठ प्रोफेसरों ने अपना स्थान लिया।दीप प्रज्ज्वलित करने की औपचारिकता और कवियों के परिचय के बाद उनका कविता पाठ शुरू हुआ।उन मेहमान और प्रतिष्टित कवियों ने एक के बाद एक बहुत अच्छी-अच्छी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहने की बात नही है कि उन कवियों की रचनाएं उच्चकोटि की होने के साथ-साथ अपने साथ एक सन्देश भी लिए हुए थीं।लेकिन युवा छात्र इन कवियों के मजे लेने से भी नही चूक रहे थे।खास बात ये की उन कवियों में दो कवियत्री भी थीं, जिनमे से एक बहुत ही खूबसूरत थी।छात्र लगातार उस कवियत्री के लिए अतिउत्साह दिखा रहे थे और बार-बार उनको कवितापाठ करने के लिए बुलाने का आग्रह कर रहे थे।लेकिन क्रम के अनुसार ही उनको बुलाया गया।उनके कवितापाठ के लिए माइक के पास आते ही, छात्रों ने कुछ ज्यादा ही उत्साह से उनका स्वागत किया और कवितापाठ के दौरान जहां दाद देने की जरूरत नही भी थी वहाँ भी अति उत्साह से दाद दे कर मस्ती का इजहार कर रहे थे।बच्चो की ये शरारत सदन में उपस्थित या फिर मंच पर आसीन किसी भी शख्स से छुपी नही थी।सभी लोगों के साथ साथ मैं भी बच्चो की इस मस्ती का खूब आनन्द ले रही थी। बहुत देर होने पर भी मैं आखिरी तक बैठी रही और एक से बढ़ कर एक रचनाओं का रसास्वादन करती रही।आखिरी कवि के कविता पाठ खत्म होते ही मैंने भी घर की राह पकड़ी।रास्ते भर यही सोचती रही,माना कि पहले से जमे जमाये कवियों की रचनाएं उच्च कोटि की थीं, लेकिन युवा छात्रों की रचनाओं को भी कम करके नही आका जा सकता और फिर समय के साथ-साथ ये बच्चे जैसे-जैसे परिपक्व होते जाएंगे, वैसे-वैसे उनकी रचना में भी गम्भीरता और परिवक्वता आती जाएगी।और रही बात बच्चो की मस्ती की, उनकी हूटिंग की, तो लगा यही तो वक्त है, यही उमर है बेफिक्री की, मस्ती की,समय के साथ-साथ जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती जाएगी, जिम्मेदारियां आएंगी, वो भी गम्भीर होते जाएंगे और जब कभी अपनी उमर के छात्रों की मस्ती और हुल्लड़बाजी देखेंगे तो उनके मन मे एक कसक जरूर उठेगी।और उनको अपने ये दिन जरूर याद आएंगे और मन ही मन ये पंक्तियां गुनगुनायेंगे।
जाने कहाँ गए वो दिन...
शालिनी।
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