20/09/2020
सब इंजीनियर ही बन जाएंगे तो ठेकेदारी कौन करब
32 वर्षो बाद एक बार फिर से
निकल जाती है पूरी जिन्दगी , 2 वक़्त की रोटी, एक आशियाना और समाज में थोड़ी सी पहचान बनाने में
और ये सब करने में हम भूल जाते हैं बहुत से प्यारे लम्हों को, बहुत से प्यारे दोस्तों को जिन्होंने कभी न कभी आपकी बहुत मदद की होती है। ऐसा ही एक मेरा मित्र था दुबे , दुबे कन्नौज का था, कोई पारिवारिक झगड़ा हो गया था पुलिस केस बन गया था तो उसके माता पिता ने उसे इन सब झगड़ो से दूर करने के लिये आगरा भेज दिया था कि दूर जाओ और इंजीनियरिंग की तैयारी करो। दूसरी तरफ कॉलेज में मिले अपमान से मैं भी तिलमिला रहा था और पूरे जुनून के साथ इंजीनियरिंग के एग्जाम की तैयारी में जुटा था , उसी दौरान मुझे आगरा में रहने के लिये कोई जगह नहीं मिल रही थी , उस समय दुबे ने मुझे सहारा दिया और अपने कमरे में ही रहने दिया । फ्री टाइम में अक्सर गप्पे हुआ करती थी और इस प्रश्न पर कि अगर इंजीनियरिंग में सिलेक्शन नहीं हुआ तो क्या करोगे, दुबे का सीधा सा उत्तर हुआ करता था , सब इंजीनियर ही बन जाएंगे तो ठेकेदारी कौन करेगा 😁
दुबे भाई कहाँ हो तुम जल्दी से संपर्क करो , माना कि 32 साल बाद तुमको ढूंढ रहा हूँ पर कोई नहीं अब मैंने भी ठान लिया है तेरे को ढूंढ के ही मानूँगा
दुबे अपने को कन्नौज का बताया करता था, आप सब मेरी हेल्प करो उसे ढूढ़ने में