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Creative Maths वैदिक गणित गणना की ऐसी पद्धति है, जिसस?

https://youtu.be/_60slj8ROpU
13/09/2022

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All Important SI UNITS | SI Units in Physics imp for Competitive Exams | Railway Group-D | SSC CGL |S.I units:International System of Units (SI) is the unit ...

कापरेकर स्थिरांक:-गणित में एक संख्या 6174 है जिसे कापरेकर स्थिरांक (Kaprekar constant) कहते हैं।कोई भी चार अंक की संख्या...
30/08/2022

कापरेकर स्थिरांक:-
गणित में एक संख्या 6174 है जिसे कापरेकर स्थिरांक (Kaprekar constant) कहते हैं।
कोई भी चार अंक की संख्या लीजिये जिसके दो अंक भिन्न हों
संख्या के अंको को आरोही (ascending) और अवरोही (descending) क्रम में लिखें।
इससे आपको दो संख्यायें मिलेंगी। अब बड़ी संख्या को छोटी से घटायें।
जो संख्या मिले इस पर पुनः 2 नंबर वाली प्रक्रिया दोहराएँ। इस प्रक्रिया को कापरेकर व्यवहार (Kaprekar’s routine) कहते हैं।
कुछ निश्चित चरणों के बाद आपको 6174 संख्या मिलेगी। इस प्रक्रिया को पुनः बार बार करने पर भी फिर यही संख्या मिलती है इसीलिये इसे कापरेकर स्थिरांक कहते हैं।
यूट्यूब वीडियो लिंक:-https://youtu.be/5FgGhcEJWes

Multiplication By Vertically and cross-wise method (urdhwatriygbhyam Method) Vedic method.(दो संख्याओं का गुणनफल)
01/06/2022

Multiplication By Vertically and cross-wise method (urdhwatriygbhyam Method) Vedic method.
(दो संख्याओं का गुणनफल)

ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम् सूत्र से गुणा (vertically and Cross-wise)'ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम्' सूत्र से गुणा करना सीखेंगे।ऊर्ध्व + तिर्यक् + ....

16/05/2022

‼️वैदिक गणित पोस्ट संख्या:03 ‼️
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🔴 सूत्र संख्या:-01: एकाधिकेन पूर्वेण (Ekadhikain Purven)
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🔴 एकाधिक का मतलब "एक ज्यादा" होता है।
एकाधिकेन पूर्वेण दो शब्द एकाधिक और पूर्व से मिलकर बना है यदि हम इनका अर्थ समझ ले तो हमें इस सूत्र की जानकारी अच्छी प्रकार से हो सकती है।
🔴 एकाधिक का अर्थ हम जान चुके हैं जिसका अर्थ होता है 'एक अधिक' जबकि 'पूर्व अंक' का अर्थ होता है 'से पहले का' अतः एकाधिकेन पूर्वेण इनका अर्थ हुआ से पहले का एक अधिक।

🔴 यह पूर्ण अंक कौन सा माना जाए दायां,बायां आइए इसे समझने का प्रयास करते हैं ।

(1) संख्या 53 में 3 के पूर्व का अंक 5 है।
(2) संख्या 53 में 5 के पूर्व का अंक 0 है। अतः यह संख्या 053 मानी जाएगी।
(जब किसी संख्या में पूर्व अंक नहीं दिया है तो शून्य को उस संख्या से पहले लिखकर शून्य को उस संख्या का पूर्वक मान लिया जाता है।)
(3) संख्या 85 में 5 के पूर्व का अंक 8 है।
(4) संख्या 85 में 8 के पूर्व का अंक 0 है। अतः यह संख्या 085 मानी जाएगी।
(5) संख्या 5843 में 3 के पूर्व का अंक 4 है।
(6) संख्या 5843 में 4 के पूर्व का अंक 8 है।
(7) संख्या 5843 में 8 के पूर्व का अंक 5 है।
8) संख्या 5843 में 5 के पूर्व का अंक 0 है। अतः यह संख्या 05843 मानी जाएगी।
🔻 नोट:–> संख्या 5843 में इकाई अंक 3 है । अतः इकाई अंक 3 या दहाई ओर के प्रथम अंक का पूर्व अंक 4 है। इसी प्रकार 4 (दाई ओर से) दूसरे अंक का पूर्व अंक 8 है अंक 8 (दाएं ओर से) तीसरे अंक का 4 अंक 5 है अंक 5 दाएं ओर से 14 अंक से पूर्व अंक नहीं है तो सोने मानकर उसे लिख लिया जाता है। संख्या 5843 में 5 के पूर्व का अंक 0 है। अतः यह संख्या 05843 मानी जाएगी।
🔴 यहां एक बात और ध्यान रखें यदि एकाधिकेन का चिन्ह (•) इकाई पर लगा है तो वह एक अधिक होगा । यदि दहाई पर लगा है तो वह 10 अधिक होगा। यदि वह सैंकड़े के स्थान पर लगा है तो वह 100 अधिक होगा। यदि वह हजार के स्थान पर लगा है तो वह हजार अधिक होगा। इस प्रकार हम संख्या को लिखते हैं।
🔴 एकाधिकेन पूर्वेण का अर्थ होता हैं - पूर्व से एक अधिक एक अधिक।
इसके लिए दी गई संख्या के पूर्वांतिम अंक में एक जोड़ दिया जाता है। इसे लिखने के लिए हम अंतिम से पूर्व वाले अंक अर्थात पूर्वांतिम (पूर्व अंतिम) अंक में के ऊपर बिंदु या डॉट लगाकर लिखते हैं।
🔴 1 का एकाधिकेन पूर्वेण •01 होगा जिसेे हम 11 लिख सकते हैं।

🔻 1 अंकों के लिए एकाधिकेन पूर्वेण लिखना....
* 1 में 1 का एकाधिकेन पूर्वेण
01 = •01 = 11
* 2 में 2 का एकाधिकेन पूर्वेण
02 = •02 = 12
* 3 में 3 का एकाधिकेन पूर्वेण
03 = •03 = 13
* 4 में 4 का एकाधिकेन पूर्वेण
04 = •04 = 14
* 5 में 5 का एकाधिकेन पूर्वेण
05 = •05 = 15
* 6 में 6 का एकाधिकेन पूर्वेण
06 = •06 = 16
* 7 में 7 का एकाधिकेन पूर्वेण
07 = •07 = 17
* 8 में 8 का एकाधिकेन पूर्वेण
08 = •08 = 18
* 9 में 9 का एकाधिकेन पूर्वेण
09 = •09 = 19
🔻 2 अंकों के लिए एकाधिकेन पूर्वेण लिखना....
* 35 में 5 का एकाधिकेन पूर्वेण
35 = •35 = 45
* 35 में 3 का एकाधिकेन पूर्वेण
035 = •035 = 135
* 54 में 4 का एकाधिकेन पूर्वेण
54= •54= 64
* 54 में 5 का एकाधिकेन पूर्वेण
054= •054= 154
🔻 3 अंकों के लिए एकाधिकेन पूर्वेण लिखना....
* 521 में 1 का एकाधिकेन पूर्वेण 5•21 होगा जिसेे हम 531 लिख सकते हैं।
* 521 में 2 का एकाधिकेन पूर्वेण •521 होगा जिसेे हम 621 लिख सकते हैं।
* 521 में 5 का एकाधिकेन पूर्वेण •0521 होगा जिसेे हम 1521 लिख सकते हैं।
अब आप समझ गए होंगे कि हम किस प्रकार एकाधिकेन पूर्वेण प्राप्त करेंगे । उपरोक्त उदाहरणों से हम किसी भी संख्या का एकाधिकेन पूर्वेण ज्ञात कर सकते हैं । जिस संख्या का एकाधिकेन पूर्वेण करना है उससे आगे या उप-अंतिम संख्या पर बिंदु या डॉट का निशान लगाएंगे और उसके बाद उस संख्या को एक अधिक कर देंगे । बाकी अंक ज्यों के त्यों रहेंगे ।संख्या कितनी भी बड़ी क्यों ना हो।
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नोट:- ऊपर लिखे हुए सूत्र( एकाधिकेन पूर्वेण) की व्याख्या बहुत ही आसान शब्दों में की गई है। इस सूत्र के अनुप्रयोग और संबंधित उदाहरण अगले पोस्ट में की जाएगी, अतः आप सभी वैदिक गणित के इस मुहिम से जुड़े रहें और अगर कोई भी समस्या हो तो कमेंट बॉक्स में जाकर जरूर लिखें।।
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09/05/2022

‼️वैदिक गणित पोस्ट संख्या:02‼️
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🔴 वैदिक गणित के सोलह सूत्र एवम् उपसूत्र
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🔻स्वामीजी के एकमात्र उपलब्ध गणितीय ग्रंथ ‘वैदिक गणित' या 'वेदों के सोलह सरल गणितीय सूत्र’ के बिखरे हुए सूत्रों और उपसूत्रों की सूची को निम्नलिखित प्रकार से क्रमशः सूचीबद्ध किया गया है।
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‼️सूत्रों की सूची‼️

1. एकाधिकेन पूर्वेण
2. निखिलं नवतश्चरमं दशतः
3. ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम्
4. परावर्त्य योजयेत्
5. शून्यं साम्यसमुच्चये
6. (आनुरूप्ये) शून्यमन्यत्
7. संकलनव्यवकलनाभ्याम्
8. पूरणापूरणाभ्याम्
9. चलनकलनाभ्याम्
10. यावदूनम्
11. व्यष्टिसमष्टिः
12. शेषाण्यंकेन चरमेण
13. सोपान्त्यद्वयमन्त्च्यम्
14. एकन्यूनेन पूर्वेण
15. गुणितसमुच्चयः
16. गुणकसमुच्चयः

‼️उपसूत्रों की सूची‼️
1.आनुरूप्येण
2.शिष्यते शेषसंज्ञः
3.आधमाधेनान्त्यमन्त्येन
4.केवलैः सप्तकं गुण्यात्
5.वेष्टनम्
6.यावदूनं तावदूनं
7.यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्गं च योजयेत्
8.अन्त्ययोर्द्दशकेऽपि
9.अन्त्ययोरेव
10.समुच्चयगुणितः
11.लोपनस्थापनाभ्यां
12.विलोकनं
13.गुणितसमुच्चयः समुच्चयगुणितः
14.ध्वजांक

‼️नोट:- अगले पोस्ट में एक एक सूत्रों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाएगी। अतः आप सभी वैदिक गणित के इस फेसबुक पेज को लाइक और शेयर जरूर करें ताकि वैदिक गणित से जुड़ी सभी जानकारी दूर दूर तक पहुंच सके और समाज के सभी व्यक्ति इस जनजागरण अभियान से जुड़कर लाभान्वित हो सकें‼️
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08/05/2022

‼️वैदिक गणित पोस्ट संख्या:01‼️
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🔻 वैदिक गणित गणित सीखने की पुरानी विधा है। माना जाता है कि इसका सम्पूर्ण ज्ञान केवल 16 सूत्रों में समाया हुआ है। यह गणित को हल करने का सबसे सरल उपाय है।
🔻 वैदिक गणित, जगद्गुरू स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा सन 1965 में विरचित एक पुस्तक है जिसमें अंकगणितीय गणना की वैकल्पिक एवं संक्षिप्त विधियाँ दी गयीं हैं। इसमें 16 मूल सूत्र दिये गये हैं और 14 उपसूत्र दिए गए हैं। वैदिक गणित गणना की ऐसी पद्धति है, जिससे जटिल अंकगणितीय गणनाएं अत्यंत ही सरल, सहज व त्वरित संभव है।
नोट:- वैदिक गणित से संबंधित जानकारी के लिए कृपया वैदिक गणित के इस फेसबुक पेज को लाइक करें और जुड़े रहें। अगले पोस्ट में जगद्गुरू स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा रचित उन 16 सूत्रों और 14 उपसूत्रों के बारे में एक एक करके जानकारी प्राप्त करेंगे।।
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