धर्म एवं दर्शन

धर्म एवं दर्शन

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दर्शनशास्र के विविध आयामों तथा धर्म के विविध पक्षों का सारगर्भित रूप में विवेचन।

16/05/2026

कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दुःखमेकान्ततो वा।
नीचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण॥
अर्थ: इस संसार में ऐसा कौन है जिसे लगातार केवल सुख ही मिला हो, या ऐसा कौन है जिसे केवल दुःख ही दुःख मिला हो? मनुष्य की परिस्थितियाँ (दशा) रथ के पहिये की तरह बदलती रहती हैं—जो हिस्सा अभी नीचे है, वह घूमकर ऊपर आता है। अर्थात, दुःख और कष्ट के बाद सुख का आना निश्चित है।

07/05/2026

अक्रोधेन जयेत्क्रोधमसाधुं साधुना जयेत्।
जयेत्कदर्यं दानेन जयेत्सत्येन चानृतम्॥

अर्थ - क्रोध को शांति (अक्रोध) से जीतें, दुष्टता को सज्जनता (साधुता) से जीतें, कंजूसी को दान से जीतें, और झूठ को सत्य से जीतें।🙏🙏 नमोनमः

03/04/2025
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