16/05/2026
कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दुःखमेकान्ततो वा।
नीचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण॥
अर्थ: इस संसार में ऐसा कौन है जिसे लगातार केवल सुख ही मिला हो, या ऐसा कौन है जिसे केवल दुःख ही दुःख मिला हो? मनुष्य की परिस्थितियाँ (दशा) रथ के पहिये की तरह बदलती रहती हैं—जो हिस्सा अभी नीचे है, वह घूमकर ऊपर आता है। अर्थात, दुःख और कष्ट के बाद सुख का आना निश्चित है।
07/05/2026