Satya Sanatan Dharm

Satya Sanatan Dharm 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'सदा बना रहने वाला', अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त।

https://youtu.be/JO2mQvdaqZE
08/11/2022

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Chandra Grahan Horoscope: साल का अंतिम चंद्र ग्रहण बदल देगा इन राशियों का भाग्यChandra Grahan Solar Eclipse 2022 : साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कार्तिक मास .....

https://youtu.be/mp3dSeJtbFI
07/11/2022

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Chandra Grahan Kya Hota Hai | चंद्र ग्रहण क्या है | ग्रहण में क्या करें क्या नहीं #2022 चंद्र ग्रहण क्या हैचंद्र ग्रहण क्या होता हैचंद्र ....

https://youtu.be/p4RX5JjFRSU
04/10/2022

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Navratri Day 9 | Siddhidatri Mata | सिद्धिदात्री | Durga Pujan | Navratri Day 9 Details 2022नवरात्रि 2022 के 9 दिन कौन से हैं?नवरात्रि में नौवां दिन ...

Har Har Mahadev..        Thanks to all for support..
03/10/2022

Har Har Mahadev..

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https://youtu.be/t6oCNpQgjE4
02/10/2022

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नवरात्रि के आठवें दिन की मां महागौरी की कथा || Navratri Day 8 - Maa Mahagauri ki kathaनवरात्रि का आरम्भ 2022नवरात्रि साल में दो बार क्यों मन....

https://youtu.be/tl4WbNxJ8d4
01/10/2022

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| नवरात्रि का छठा दिन: माँ कात्यायनी की पूजा विधि, भोग, कथा | Navratri Ka 6th day 2022 माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करेनवरात्रि के 7 द....

30/09/2022
https://youtu.be/FGPt9XGV40c             नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन...
29/09/2022

https://youtu.be/FGPt9XGV40c


नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अनाहत' चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए।

जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं।

इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है। माँ की आठ भुजाएँ हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन शेर है।
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Navratri ka Chautha Din Maa Kushmanda | नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा कथा | navratri ka chotha dinnavratri ka chotha din statusnavratr...

https://youtu.be/tFjnisH-lAsमाँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत...
28/09/2022

https://youtu.be/tFjnisH-lAs
माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है। लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।

Navratri ka Teesra Din | नवरात्रि के तीसरे दिन की माँ चंद्रघंटा की कथा | By Anshu Mishraमाँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। .....

2nd Day Of Navratri 2022https://youtu.be/7Wh0tbSFNdQब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है...
27/09/2022

2nd Day Of Navratri 2022
https://youtu.be/7Wh0tbSFNdQ
ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण से ली गई ह।
श्लोक
दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु | देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||
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नवरात्र का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि | Navratra Ka Dusra Din #2022 ब्रह्मचारिणी देवी कौन है?मां ब्रह्मचारिणी की...

https://www.youtube.com/watch?v=UlyupC3YGJ0नवरात्र का पहला दिन: माँ शैलपुत्री पूजा विधि, मन्त्र, रंगशैलपुत्री देवी दुर्ग...
26/09/2022

https://www.youtube.com/watch?v=UlyupC3YGJ0
नवरात्र का पहला दिन: माँ शैलपुत्री पूजा विधि, मन्त्र, रंग

शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।

श्लोक
वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् |
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||

शोभा
वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था।

नवरात्र का पहला दिन: माँ शैलपुत्री पूजा विधि, मन्त्र, रंग Navratri Day 1 Maa Shailputri माता शैलपुत्री का मंत्र क्या है?शैलपुत्री ...

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