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GyanVerchos अणु मे विभू गागर मे सागर।

Happy Birthday my Little Champ ...Your 4th Birthday
14/09/2024

Happy Birthday my Little Champ ...
Your 4th Birthday

मुझे पता है की मैं बुद्धिमान हूँ क्यूंकि मुझे पता है की मुझे कुछ भी पता नहींI know I'm intelligent because I know I don'...
14/07/2024

मुझे पता है की मैं बुद्धिमान हूँ क्यूंकि मुझे पता है की मुझे कुछ भी पता नहीं
I know I'm intelligent because I know I don't know anything...

Baba bhairav Nath mela me
10/07/2024

Baba bhairav Nath mela me

Qtotes of the Day ゚viralシ
06/07/2024

Qtotes of the Day
゚viralシ

     ゚viralシ
05/07/2024

゚viralシ

05/07/2024


Quotes of the day ゚viralシ
05/07/2024

Quotes of the day
゚viralシ

All mankind...being all equal and independent, no one ought to harm another in his life, health, liberty, or possessions...
04/07/2024

All mankind...being all equal and independent, no one ought to harm another in his life, health, liberty, or possessions.

04/07/2024

Better to die fighting for freedom then be a prisoner all the days of your life.

New era is coming...
19/11/2023

New era is coming...

15/11/2023

*स्वामी रामतीर्थ ने कहा था "मनुष्य के जैसे विचार होते हैं वैसा ही उसका जीवन बनता है।" स्वामी विवेकानन्द ने कहा था “स्वर्ग और नर्क कहीं अन्यत्र नहीं इनका निवास हमारे विचारों में ही है।" मनुष्य जैसे विचार करता है उनकी सूक्ष्म तरंगें विश्वाकाश में फैल जाती हैं। विचारों में बड़ा जादू है। वे हमें उठा सकते हैं और गिरा भी देते हैं। आवश्यकता इस बात की है हमें आशावादी, उदार, दिव्य, पुरोगामी, उत्कृष्ट विचारों से अपने मन को सराबोर रखना चाहिए। हीन और वुरे विचारों से छुटकारा पाने के लिए उच्च दिव्य विचारों का अभ्यास करना आवश्यक है । बुरे विचारों को सद्विचारों से काटना चाहिए।*

01/10/2023

👉 *पतन नहीं उत्थान का मार्ग अपनायें*

*पालतू पशुओं के बंधन में बँधकर रहना पड़ता है, पर मनुष्य को यह सुविधा प्राप्त है कि स्वतन्त्र जीवन जियें और इच्छित परिस्थितियों का वरण करें।*

*उत्थान और पतन के परस्पर विरोधी दो मार्गों में से हम जिसको भी चाहें अपना सकते हैं। पतन के गर्त में गिरने की छूट है। यहाँ तक कि आत्महत्या पर उतारू व्यक्ति को भी बलपूर्वक बहुत दिन तक रोके नहीं रखा जा सकता।*

*यही बात उत्थान के सम्बन्ध में भी है। वह जितना चाहे उतना ऊँ चा उठ सकता है। पक्षी उन्मुक्त आकाश में विचरण करते, लम्बी दूरी पार करते, सृष्टि के सैन्दर्य का दर्शन करते हैं। पतंग भी हवा के सहारे आकाश चूमती है। आँधी के सम्पर्क में धूलिकण और तिनके तक ऊँची उड़ानें भरते हैं। फिर मनुष्य को उत्कर्ष की दिशाधारा अपनाने से कौन रोक सकता है?*

*आश्चर्य है कि लोग अपनी क्षमता और बुद्धिमत्ता का उपयोग पतन के गर्त में गिरने लिए करते हैं। यह तो अनायास भी हो सकता है। ढेला फेंकने पर नीचे गिरता है और बहाया हुआ पानी नीचे की दिशा में बहाव पकड़ लेता है।*

*दूरदर्शिता इसमें है कि ऊँचा उठने की बात सोची और वैसी योजना बनाई जाय। जिनके कदम इस दिशा में बढ़ते हैं, वे नर पशु न रहकर महामानव बनते हैं।*

✍🏻 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

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