13/09/2024
क्या आपको नहीं लगता कि हम गलत को सही करते-करते न जाने सही के साथ कितना गलत कर चुके हैं। एक को बचाने के राह पर चले थे पर कब दूसरे को कुचल दिए पता ही नहीं चला।
देखिए मैं इन चीजों के खिलाफ नहीं हूं। लड़कियों को भी लड़कों के बराबर की अधिकतर होनी चाहिए तो अधिकार बराबरी का भी तो होना चाहिए।लेकिन क्या यह सही है ?सोच कर जरूर बताना ।पहले इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें....
अब आप ही बताओ यह कैसी समानता है?
शादी में यह तो देखा जाता है कि लड़का क्या करता है,उसके पास कितना बैंक बैलेंस है,उसकी नौकरी कैसी है, उसकी पुश्तैनी प्रॉपर्टी कितनी है ?लेकिन इसके विपरीत लड़की पक्ष से दहेज लेना जुर्म है। अगर आप यह देखते हैं की लड़के का बैंक बैलेंस कितना है लड़के की प्रॉपर्टी कितनी है तो उसके बराबर प्रॉपर्टी देकर लड़की को भी विदा करें ताकि जीवन के दोनों पहिए समान रूप से चलेंगे।अगर साइकिल के एक पहिए में हवा हो और दूसरे पहिए में ना हो तो साइकिल बैलेंस होकर नहीं चलती। तो क्या लड़के की प्रॉपर्टी देखना लड़की के लिए दहेज के समान नहीं है। अप्रत्यक्ष रूप से लड़की पक्ष ज्यादा दहेज लेता है।एक पुरुष अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेला अपनी कंधे पर उठाकर चलता है।
अब आप ही बताओ क्या यह समानता है?
सफर में महिलाओं के लिए रिजर्व सीट होते हैं, अगर कोई पुरुष बैठा है और महिला आ गई तो सीट उनको दीजिए वह महिला है लेकिन अगर कोई पुरुष बीमार भी है तो उन्हें सीट नहीं मिल सकता क्योंकि वह एक पुरुष है। उनकी पैदाइश थोड़ी ना हुई है वह तो टाटा कंपनी से मैन्युफैक्चर होकर आए हैं उनको पीड़ा नही होती ।
अब आप ही बताओ क्या यह समानता है?
शादी टूटना किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है, इसमें परिवार बिखर जाते हैं ,लेकिन
अगर तलाक होती है तो लड़की का खर्चा लड़का उठाएंगा लेकिन क्यों लड़के का खर्चा भी तो लड़की उठा सकती है?
अब आप ही बताओ क्या यह समानता है?
अगर किसी ऐसे दंपति की तलाक हो जिनका कोई बच्चा भी हो तो बच्चे को मां को सौंप दिया जाता है, क्यों भाई साहब पिता उसकी परवरिश नहीं कर सकता क्या? मैं कोर्ट में अपने बच्चे से मिलने के लिए एक बाप को रोते बिलखते तरसते देखा है। आखिर में पैसा तो उसे ही देना है फिर इसके पास क्यों नहीं रह सकता? नहीं ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि महिला पुरुष की अपेक्षा ज्यादा जिम्मेदार होती है। वह बच्चे को ज्यादा प्यार करेगी।
लेकिन अगर एक प्रेमी जोड़ा भाग जाए और शादी कर ले तब जिम्मेदारी लड़के की होती है क्योंकि यह लड़का है इसी ने बहलाया फुसलाया होगा, फिर लड़की की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। तब उसका प्यार भाड़ में चला जाता है। जबकि हकीकत यह होती है कि भागने में ज्यादा जिम्मेदार लड़की होती है हमेशा।
अगर कहीं किसी बात का विवाद हो गया हो तो विवाद में पहले महिला पक्ष का सुना जाएगा क्योंकि पुरुष है तो वह गलत ही होगा जरूर इसी ने कुछ किया होगा। तब बराबरी उनकी तेल लेने चली जाती है।
सच तो यह है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को उसका अधिकार दिलाते दिलाते याह समाज कब महिला प्रधान बन गया हमें पता ही नहीं चला।