EBOOKS OF ADI SAHNKARACHARYA’S ‘BRAHMSUTRA-SHANKAR-BHASHYAM’ WITH ORIGINAL SCRIPT BY MAHARSHI
यह चारो वेदों के उपनिषद् / वेदान्त को लेकर महर्षि बादरायण 'वेदव्यास' द्वारा विरचित सूत्रात्मक शैली में 'ब्रह्मसूत्र' या 'वेदांत-दर्शन' नामसे विख्यात है. जोकि चारो वेदोका ज्ञानकांड है. वेदके अंत भागमें इनकी स्थिति होनेके कारण इसको 'वेदान्त' कहते है. वेदों का तत्वज्ञान / परमात्मा ज्ञान या ब्रह्मज्ञान इसमें ही सन्निहित है. यह मनुष्यका चतुर्थ पुरषार्थ मोक्ष/मुक्ति से सबंधित है. जीवात्मा का जीवनका अंति
म लक्ष्य इस देह्बन्धन/कर्मबन्धन आदि सांसारिक बन्धन तथा जन्म, मृत्यु, वृध्दत्व तथा शारीरिक रोगो से ग्रस्त यह जीवात्माका स्थूल-सूक्ष्म-कारण शरीरसे सम्पूर्ण मुक्ति पा कर अपने स्व-स्वरूप / परमात्मा-स्वरूप पानेके लिए महर्षि वेदव्यास और जगद्गुर आदि शंकराचार्यने यह ब्रह्सुत्र'-ग्रन्थ "शारीरक-मीमांसा-भाष्य" (शांकर-भाष्य) की अवतारणा की है.यह ग्रन्थको जगद्गुरु श्री कृष्ण ने भगवद्गीतामें भी सराहना की है - "ब्रह्मसूत्र पदश्चैव हेतुमद्भि: विनिश्चितै:" (भ.गीता. १४/४-क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभाग योग अध्याय). यह पुरातन कृति है. यह "ब्रह्मसूत्र-शांकर-भाष्य" है....THESE ARE THE EBOOKS OF ADI SAHNKARACHARYA’S ‘BRAHMSUTRA-SHANKAR-BHASHYAM’ WITH ORIGINAL SCRIPT BY MAHARSHI BADRAYAN ‘VEDVYAS’ & COMMENTARY UPON BY ADI SHANKARACHRYA. THESE EBOOKS ARE FURTHER TRANSLATED & SUB-COMMENTARY UPON IN GUJARATI LANGUAGE WITH THEIR ORIGINAL ‘BRAHMSUTRA’S ALL SUTRAS & ‘SHANKARBHASHYAM’ [SHARIRAKMIMANSABHASHYAM] BY BHARAT PURUSHOTTAM SARASWATI, VADODARA, GUJARAT, INDIA…
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