27/08/2025
गौरी शंकर के पुत्र, बुद्धि के देवता, ऋद्धि सिद्धि के पति और शुभ लाभ के पिता गणेश चतुर थे, चतुर हैं और चतुर रहेंगे..
शुभ लाभ और ऋद्धि सिद्धि से परिपूर्ण गणेश चतुर्थी 🙏🏻
गणपति और दूर्वा/दूब… लोककथा बहुत समय पहले एक बहुत बड़ा और डरावना असुर था ।उसकी आँखों और मुँह से आग लपटें की लपटें निकलती रहती थीं ।वह जहाँ भी जाता, वहाँ पेड़-पौधे जल जाते, नदियाँ सूख जातीं, लोग डर के मारे छिप जाते।संत-मुनि और देवी-देवता सब इससे घबराए हुए थे। उन्होंने बहुत जतन किए लेकिन इस असुर से छुटकारे का उपाय नहीं खोज पाए ।तब उन्होंने गणेश जी प्रार्थना की…अब आप ही हमें इस असुर से बचाइए।इस समस्या का निवारण कीजिए ।गणेश जी का मन बहुत कोमल था ।वे किसी भी दुख और प्रार्थना से एकदम मोम के जैसे पिघल जाते थे ।वे जितने गोल-मटोल और हँसमुख थे उतने ही वीर भी थे। वे हँसते हुए बोले“ आप सभी निश्चिन्त रहिए ।”वे अकेले ही ,आग उगलते असुर के सामने गए। असुर ने उनपर खूब आग बरसाई, मगर गणेश जी पर माँ पार्वती का वरद हस्त था वे असुर से तनिक भी न डरे। अचानक उन्होंने असुर को पूरा का पूरा निगल लिया।पृथ्वी लोक और देवलोक ने राहत की साँस ली, लेकिन अब एक समस्या और आन पड़ी ।असुर तो आग से बना था, गणेश जी के जलन शुरू हो गई ,उनका शरीर जलने लगा। चेहरा लाल पड़ गया, वे बेचैन होकर इधर-उधर लोटने लगे।देवताओं ने बहुत उपाय किए…किसी ने शीतल जल दिया।किसी ने चंदन लगाया।किसी ने सोमरस पिलाया ।एक भी उपाय काम न आया।माँ पार्वती से अपने पुत्र का दुःख देखा नहीं गया ।अपने बेटे को को इतना व्याकुल देख आँखों में आँसू भर आए। मन ही मन अपने पुत्र के लिए प्रार्थना करने लगीं …तभी अचानक उनकी दृष्टि आँगन में उगी हरी-हरी दूर्वा घास पर पड़ी।उन्हें याद आया कि मंदराचल पर्वत के मंथन से जब भगवान का शरीर स्पर्शित हुआ था तो उनके टूटे हुए रोम समुद्र में गिर थे ।वही रोम जब लहरों के साथ तट पर पहुँचे तो हरी दूब के रूप में अंकुरित हो गये।अमृत कलश प्राप्त होने पर सर्वप्रथम उसे इसी दूब पर स्थापित किया गया था ।अमृत का स्पर्श पाकर दूब औषधि बन गई थी।माँ पार्वती ने जल्दी से दूब की कुछ पत्तियों तोड़ी और गणेश जी के मुँह में रख दी।जैसे ही दूब ,गणेश जी के पेट में पहुँची, सारी जलन शांत हो गई। गणेश जी स्वस्थ और खुश हो गए ।तब से जब भी गणेश जी की पूजा होती है तो उन्हें दूर्वा अवश्य अर्पित की जाती है।दूब कोई सामान्य साधारण घास नहीं है। इसमें धरती की शीतलता और अमृत की शक्ति बसी होती है।यह पित्त को भी शांत करने वाली औषधि होती है।कहा जाता है कि जैसे दूब ने कभी गणेश जी का दर्द शांत किया था,वैसे ही गणेश जी को दूब अर्पित करते ही,गणेश जी हमारे दुखों को हर लेते हैं ।गणपति का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे…शुभमस्तु 🙏🌸