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श्रीलंका में आर्थिक संकट                     किसी राष्ट्र का उज्जवल भविष्य उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है। यदि अर्थ...
29/04/2022

श्रीलंका में आर्थिक संकट

किसी राष्ट्र का उज्जवल भविष्य उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है। यदि अर्थव्यवस्था देश की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं है तो वह देश उन्नति के विषय में सोच भी नहीं सकता है।

वर्तमान में कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। दक्षिण एशियाई देशों में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था गर्त में जाती हुई प्रतीत हो रही है । श्रीलंका में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त होने की स्थिति में है। आवश्यक वस्तुओं जैसे ईंधन, खाद्यान्न आदि के आयात हेतु श्रीलंका भुगतान करने की स्थिति मे नहीं है। आवश्यक वस्तुओं की कमी के तथा श्रीलंकाई रुपए में कमी से मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर पहुंच गई है जिसके कारण महंगाई भी अपनी चरम स्थिति को प्राप्त कर चुकी है।
श्रीलंका भारत के दक्षिण में स्थित एक द्वीपीय देश है जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्यतः चाय के निर्यात तथा पर्यटन पर ही निर्भर है। भारत भी श्रीलंकाई बंदरगाहों का प्रयोग अपने आयात व निर्यात के लिए करता है।
श्रीलंका की इस गिरती आर्थिक स्थिति का उत्तरदाई स्वयं श्रीलंकाई शासन है। यहां राजपक्षे परिवार सत्तारूढ़ है जो कि चीन को समर्थन देता है।
श्रीलंका पर वर्तमान में लगभग इक्यावन सौ करोड़ डालर ऋण है जिस में सर्वाधिक चीन, जापान तथा एशियाई विकास बैंक का है। श्रीलंका द्वारा विदेशों से ऋण प्राप्त कर ऐसी परियोजनाओं में निवेश किया गया जिनसे बिलकुल भी लाभ नही कमाया जा सका।
इसके साथ ही कोरोना वायरस ने श्रीलंका के पर्यटन क्षेत्र को हाशिये पर पहुंचा दिया। जैसे ही कोरोनावायरस का प्रभाव कम हुआ श्रीलंका ने अपने द्वार पर्यटन के लिए पुनः खोल दिए किंतु अब पर्यटक को रूस यूक्रेन विवाद ने पुनः प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया।
श्रीलंका ने रातों-रात रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध लगाते हुए जैविक कृषि को अपना लिया जिसके कारण खाद्यान्न उत्पादकता निचले स्तर पर तथा महंगाई चरम स्तर पर पहुंच गयी।
श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट देखी जा रही है पिछले 2 वर्षों में 70% की गिरावट के साथ फरवरी 2022 में विदेशी मुद्रा भंडार दो अरब डॉलर पर पहुंच गया जो कि अप्रैल 2022 में समाप्त होने की स्थिति में है।
बीते वर्षों में श्रीलंका में आतंकी हमलों ने भी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाला है इन हमलों से न सिर्फ व्यापक जन धन की हानि हुई बल्कि पर्यटकों में भी भय की भावना को व्याप्त हो गयी।
श्रीलंका के लिए भारत एक बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है। भारत व्यापार के साथ-साथ अपने निर्यात तथाआयात के लिए श्रीलंकाई बंदरगाहों का प्रयोग करता है। भारतीयों के लिए पर्यटन के रूप में प्रमुख गंतव्य श्रीलंका तथा मालदीव है।
श्रीलंका के अर्थव्यवस्था में भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पर्याप्त योगदान है जो चीन तथा ब्रिटेन के बाद तीसरे स्थान पर है।
व्यापार की दृष्टि से श्रीलंका भारत के लिए विशेष महत्व नहीं रखता है किंतु राजनैतिक सामाजिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने निगरानी रखने के लिए भारत को श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को मधुर बनाए रखना होगा। 2000 के प्रारंभ में हीचीन द्वारा श्रीलंका को ऋण उपलब्ध करस्य गया था जिसे न चुका पाने के कारण चीन ने श्रीलंकाई बंदरगाह हम्बनटोटा पर 99 वर्षों के लिए अधिग्रहण कर लिया।
चीन द्वारा भारत को घेरने की नीति में श्रीलंका सर्वाधिक बर्बाद हुआ। हाल ही में श्रीलंका ने स्वयं को दिवालिया घोषित कर दूसरे देशों के कर्ज को वापस लौट आने में स्वयं को अक्षम बताया ।
भारत बड़े भाई की तरह श्रीलंका को मदद पहुंचा रहा है। फरवरी 2022 में 1.4 बिलियन डालर का धन श्रीलंका को करंसी स्वैप, ऋण स्थगन, लाइन आफ क्रेडिट के रूप में उपलब्ध कराया इसके साथ ही भारत द्वारा श्रीलंका में खाद्य संकट को देखते हुए 30000 टन चावल का निर्यात किया गया।
चीन की श्रीलंका क्षेत्र पकड़ मजबूत न होने देने के लिए भारत को श्रीलंका को वित्तीय सहायता, नीतिगत सलाह तथा निवेश समय-समय पर उपलब्ध करानी चाहिए। भारत दक्षिण एशिया में सभी देशों के सहयोग से आर्थिक संकट तथा खाद्य संकट को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत को अपने पड़ोसी देशों की सहायता इसलिए भी करनी चाहिए ताकि वह चीन के समीप न जा सके जैसा कि नेपाल में चीन के प्रभाव में आकर नया मानचित्र जारी किया था। भारत को सबके सहअस्तित्व की भावना से प्रगति की ओर अग्रसर होना होगा।

मोहनदास से महात्मा तक                   गुजरात में 2 अक्टूबर 1869को जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने सत्य व अहिंसा को अपना ...
02/10/2020

मोहनदास से महात्मा तक

गुजरात में 2 अक्टूबर 1869को जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने सत्य व अहिंसा को अपना ऐसा मारक व अचूक हथियार बनाया जिसके आगे दुनिया के सबसे ताकतवर ब्रिटिश साम्राज्य को भी घुटने टेकने पड़े। उनके जीवन में ऐसी कौन सी घटनाएं हुई तथा महत्वपूर्ण पड़ाव पड़े जिन्होंने उन्हें महात्मा बना दिया।
मोहन दास के जीवन पर उनके पिता करमचन्द से अधिक उनकी माता पुतलीबाई के धार्मिक संस्कारों का प्रभाव पड़ा बचपन में सत्य हरिश्चंद्र तथा श्रवण कुमार की कथाओं ने उनके जीवन पर इतना गहरा असर डाला कि उन्होंने इन आदर्शों को अपना मार्ग बना लिया।
वर्ष 1883 में कस्तूरबा से उनका विवाह होने के 2 वर्षों बाद उनके पिता का निधन हो गया। राजकोट के अल्फ्रेड हाईस्कूल व भावनगर के श्यामल दास स्कूल में शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद 1888 में बैरिस्टरी( वकालत) की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वदेश लौटकर मुंबई में वकालत शुरू की लेकिन खास सफलता प्राप्त न कर सके । इसी बीच 1893 में गुजरात के एक व्यापारी दादा अब्दुल्ला ने अपना मुकदमा लड़ने के लिए उनको दक्षिण अफ्रीका बुलाया। यहां पर गांधीजी ने अंग्रेजो के भारतीयों के साथ भेदभाव का अनुभव किया और इससे आहत होकर इन्हें अंग्रेजों खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा मिली। दक्षिण अफ्रीका में गांधी को अंग्रेजों के हुकूमत के खिलाफ मिली कामयाबी ने इन्हें भारत में भी मशहूर कर दिया । इन्होंने साउथ अफ्रीका में दो आश्रमों फीनिक्स फॉर्म 1904 तथा टॉलस्टॉय फार्म 1910 की स्थापना भी की थी। यह 9 जनवरी 1915 को भारत लौट आए।
राजकुमार शुक्ल की गुहार पर गांधीजी अप्रैल 1917 में चंपारण पहुंचे। यहां के नील किसानों पर अंग्रेजों के अत्याचार को अपनी आंखों से देखा और उसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का नेतृत्व किया। चंपारण का सत्याग्रह इनका भारत में प्रथम सत्याग्रह था।
दमनकारी रौलट एक्ट व जलियांवाला बाग नरसंहार की पृष्ठभूमि में उन्होंने भारतीयों से अंग्रेजों का किसी भी प्रकार का सहयोग न करने की अपील के साथ असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया इस पर हजारों लोगों ने स्कूल व सरकारी नौकरियां छोड़ दी।
सुशासन व आंदोलनकारियों की रिहाई की मांग व साइमन कमीशन के खिलाफ गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में प्रारंभ किया। इस आंदोलन में उन्होंने भारतीयों से सरकार का कोई भी आदेश न मानने की अपील की तथा सरकारी संस्थान और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार भी किया।
गांधीजी को दुनिया भर में अहिंसा के पुजारी के तौर पर देखा जाता है। यों तो अहिंसा का मूल्य गांधी जी के बहुत पहले से चला आ रहा था पर उनकी विशेषता यह थी कि उन्होंने अहिंसा को केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे प्रतिकार के साधन के तौर पर विकसित किया इन्हें याद करने की सार्थकता तभी है जब देश और दुनिया में यह एहसास बड़े और बढ़ाया जाए कि साधन शुद्ध के रास्ते से और अहिंसक तरीकों से हमें अपने उद्देश्य की प्राप्ति करनी चाहिए।

बौद्ध संगीतिगौतम बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात उनके उपदेशों तथा शिक्षाओं को संग्रहित करने तथा उनका पाठ करने के उद्देश्य ...
29/09/2020

बौद्ध संगीति

गौतम बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात उनके उपदेशों तथा शिक्षाओं को संग्रहित करने तथा उनका पाठ करने के उद्देश्य से संगीति का आयोजन किया जाता था। इन्हें धम्म संगीति (धर्म संगीति) कहा जाता था। संगीति शब्द का मूल अर्थ साथ - साथ गाना होता है।

प्रथम बौद्ध संगीति

समय -483 ईसा पूर्व

स्थान -राजगृह (सप्तपर्णी) गुफा

अध्यक्ष -महाकस्यप

शासन काल -अजातशत्रु (हर्यक वंश)

परिणाम- बुद्ध के उपदेशों को दो भागों विनय पिटक तथा सुत्त पिटक में संकलित किया गया।

द्वितीय बौद्ध संगीति

समय -383 ईसा पूर्व

स्थान -वैशाली

अध्यक्ष -साबकमीर(सर्वकामिनी)

शासनकाल- कालाशोक (शिशुनाग वंश)

परिणाम -अनुशासन को लेकर बौद्ध धर्म में मतभेद हो गया था जिसके समाधान के लिए बौद्ध धर्म स्थापित एवं महासांघिक नामक दो भागों में बट गया।

तृतीय बौद्ध संगीति

समय -251 ईसा पूर्व

स्थान -पाटलिपुत्र

अध्यक्ष- मोगलीपुत्ततिस्स

शासनकाल -अशोक (मौर्य वंश )

परिणाम -धर्म ग्रंथों का अंतिम रूप से संपादन किया गया, अभिधम्म पिटक को तीसरे पिटक के रूप में जोड़ा गया ।

चतुर्थ बौद्ध संगीति

समय -प्रथम शताब्दी

स्थान -कुंडलवन (कश्मीर )
अध्यक्ष- वसुमित्र

उपाध्यक्ष- अश्वघोष

शासनकाल -कनिष्क (कुषाण वंश)

परिणाम -बौद्ध धर्म दो संप्रदायों हीनयान और महायान विभाजित हो गया।

64वें फिल्मफेयर पुरस्कारों की सूची1.    बेस्ट एक्टर (पुरुष) - रणबीर कपूर (संजू)2.    बेस्ट एक्टर (महिला) - आलिया भट्ट (र...
26/03/2019

64वें फिल्मफेयर पुरस्कारों की सूची

1. बेस्ट एक्टर (पुरुष) - रणबीर कपूर (संजू)

2. बेस्ट एक्टर (महिला) - आलिया भट्ट (राज़ी)

3. क्रिटिक्स कैटेगरी बेस्ट एक्टर (पुरुष) - रणवीर सिंह(पद्मावत), आयुष्मान खुराना (अँधाधुन)

4. बेस्ट डायरेक्टर - मेघना गुलज़ार (राज़ी)

5. क्रिटिक्स कैटेगरी बेस्ट एक्टर (महिला) - नीना गुप्ता (बधाई हो )

6. पॉपुलर च्वायस कैटेगरी बेस्ट फिल्म - राज़ी

7. बेस्ट स्टोरी - अनुभव सिन्हा (मुल्क)

8. बेस्ट स्क्रीनप्ले - अंधाधुन

9. बेस्ट डायलॉग - बधाई हो

10. क्रिटिक्स कैटेगरी में बेस्ट फिल्म - अँधाधुन

11. बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (महिला) - सुरेखा सिकरी (बधाई हो)

12. बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल - विक्की कौशल (संजू) , गजराज राव (बधाई हो)

13. बेस्ट डेब्यू (पुरुष) - ईशान खट्टर (बियाण्ड द क्लाउड्स)

14. बेस्ट डेब्यू (महिला) - सारा अली खान (केदारनाथ)

15. बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर - अमर कौशिक (स्त्री )

16. बेस्ट प्लेबैक (पुरुष) - अरिजीत सिंह (राज़ी)

17. सर्वश्रेष्ठ गीतकार – गुलज़ार (राज़ी)

18. बेस्ट प्लेबैक (महिला) - श्रेया घोषाल (पदमावत - घूमर)

19. बेस्ट बैकग्राउड स्कोर - डेनियल जॉर्ज (अँधाधुन)

20. बेस्ट सिनेमेटोग्राफी - पंकज कुमार (तुम्बाड)

21. बेस्ट वीएफएक्स - रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट (ज़ीरो)

22. बेस्ट कोरियोग्राफी - कृति महेश मिद्या और ज्योति तोमर (पद्मावत)

23. बेस्ट कॉस्टयूम - शीतल शर्मा (मंटो)

24. बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन - नितिन जिहानी चौधरी और राजेश यादव (तुम्बाड)

#फिल्मफेयर_अवार्ड्स_पृष्ठभूमि

फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे पुरानी और प्रमुख घटनाओं में से एक रही है. इसकी शुरुआत सबसे पहले 1954 में हुई जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की भी स्थापना हुई थी. पुरस्कार जनता के मत एवं ज्यूरी के सदस्यों के मत दोनों के आधार पर हर साल दिया जाता है.

21 मार्च 1954 को होने वाले पहले पुरस्कार समारोह में सिर्फ पाँच पुरस्कार रखे गये थे जिसमें दो बीघा ज़मीन को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए बिमल राय (दो बीघा ज़मीन), सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए दिलीप कुमार (दाग), सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए मीना कुमारी (बैजू बावरा), एवं सर्वश्रेष्ठ संगीत के लिए नौशाद को सम्मानित किया गया।

Join your telegram chanel..👉               https://t.me/THEGAGSPOINT15 फरवरी 2019 को संयुक्त राष्ट्र बाल निधि (UNICEF) न...
16/03/2019

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15 फरवरी 2019 को संयुक्त राष्ट्र बाल निधि (UNICEF) ने एक रिपोर्ट, ' #फैक्टशीट_चाइल्ड_मैरिजेज़ 2019' जारी की गई.. जिसके अंतर्गत कहा गया कि भारत के कई क्षेत्रों में अब भी बाल विवाह हो रहा है. इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ दशकों के दौरान भारत में बाल विवाह की दर में कमी आई है लेकिन बिहार, बंगाल और राजस्थान में यह प्रथा अब भी जारी है.
#भारत_के_संदर्भ_में_यूनिसेफ_की_रिपोर्ट

• यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार, बंगाल और राजस्थान में बाल विवाह की यह कुप्रथा आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों सहित कुछ विशेष जातियों के बीच प्रचलित है.

• रिपोर्ट में कहा गया है कि बालिका शिक्षा की दर में सुधार, किशोरियों के कल्याण के लिये सरकार द्वारा किये गए निवेश व कल्याणकारी कार्यक्रम और इस कुप्रथा के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रभावी संदेश देने जैसे कदमों के चलते बाल विवाह की दर में कमी देखने को मिली है.

• रिपोर्ट के अनुसार 2005-2006 में जहाँ 47 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी, वहीं 2015-2016 में यह आँकड़ा 27 फीसदी था.

• यूनिसेफ के अनुसार, अन्य सभी राज्यों में बाल विवाह की दर में गिरावट लाए जाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है किंतु कुछ ज़िलों में बाल विवाह का प्रचलन अब भी उच्च स्तर पर बना हुआ है.

#वैश्विक_संदर्भ_में_यूनिसेफ_की_रिपोर्ट

• मौजूदा समय में विश्व भर में लगभग 65 करोड़ ऐसी लड़कियाँ/महिलाएँ हैं जिनकी शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले ही कर दी गई है, जबकि बचपन में लड़कियों की शादी कर दिये जाने के मामले में यह संख्या प्रतिवर्ष करीब 1.2 करोड़ है.

• दक्षिण एशिया में बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में बाल विवाह की दर 18 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है.

• लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में बाल विवाह की स्थिति में बदलाव नहीं आया है.

• पिछले एक दशक में बाल विवाह की दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है जिसके तहत लगभग 2.5 करोड़ बाल विवाह होने से रोके गए हैं.

#बाल_विवाह_के_कारण

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी, लड़कियों की शिक्षा का निम्न स्तर, लड़कियों को आर्थिक बोझ समझना, सामाजिक प्रथाएँ एवं परंपराएँ बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं. भारत में बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था. बाद में सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किये गए. बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के नए कानून के तहत बाल विवाह कराने पर 2 साल की जेल एक लाख रुपए का दंड निर्धारित किया है।

  reaction missile...भारत ने 26 फरवरी 2019 को ज़मीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल (QRSAM) का ओडिशा के तट...
01/03/2019

reaction missile...
भारत ने 26 फरवरी 2019 को ज़मीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल (QRSAM) का ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सेना के लिए विकसित की जा रही इन दो मिसाइलों का परीक्षण किया है।

इस मिसाइल का निर्माण डीआरडीओ ने भारत इलेक्ट्रो्निक लिमिटेड और भारत डायनामिक लिमिटेड के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए किया है. इस मिसाइल को भारतीय रक्षा पंक्ति में बेहद अहम और ख़ास माना जा रहा है।

#क्विक_रिएक्शन_मिसाइल_की_विशेषताएं

• हर मौसम में काम करने वाली इस स्वदेशी मिसाइल की रेंज 25 से 30 किलोमीटर है, जो तुरंत टारगेट को ध्वस्त कर सकती है.

• परीक्षण को पूरी तरह से सफल बताते हुए डीआरडीओ के एक अधिकारी ने कहा कि परीक्षण के दौरान मिशन के उद्देश्यों को पूरा किया गया.

• अलग-अलग ऊंचाइयों और स्थितियों से दो मिसाइलों का परीक्षण किया गया.

• दो मिसाइलों का परीक्षण भिन्न परिस्थितियों में किया गया औऱ दोनों कामयाब रहे. इस दौरान मिसाइल की ऐरोडायनामिक्स, प्रोपल्सन, ढांचागत प्रदर्शन और उच्च मैनुवर क्षमता को परखा गया.

• परीक्षण के दौरान मिसाइल के रेडार, इलेक्ट्रोआप्टिकल सिस्टम्स, टेलीमीट्री, आदि के परीक्षण पैमाने सटीक आंके गये.

• इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना जमीन से ही किसी भी संदिग्ध एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, एंटी-शिप मिसाइल, यूएवी, बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और कॉम्बैट जेट को हवा में ही नेस्तानाबूत कर सकती है.

• इससे पहले डीआरडीओ ने लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था.

• बराक-8 मिसाइल को नेवल शिप से लॉन्च किया जा सकता है. यह परीक्षण भी ओडिशा के तटवर्ती इलाकों में किया गया था.

क्या है?
QRSAM अथवा क्विक रिएक्शन मिसाइल डीआरडीओ तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं भारत डायनामिक्स द्वारा भारतीय सेना के लिए बनाई गई है. इस मिसाइल का पहला परीक्षण 4 जून 2017 को किया गया था और दूसरा सफल परीक्षण 3 जुलाई 2017 को किया गया था. जमीन से हवा में मार कर सकने के कारण यह भारतीय थल सेना के लिए एक अहम रक्षा उपकरण है।

  MIRAGE 2000     #मिराज 2000 विमान की खासियत: मिराज विमान एक फ्रांसिसी लड़ाकू विमान हैं। इसे दसॉ नामक विमान कंपनी ने बन...
28/02/2019

MIRAGE 2000
#मिराज 2000 विमान की खासियत:
मिराज विमान एक फ्रांसिसी लड़ाकू विमान हैं। इसे दसॉ नामक विमान कंपनी ने बनाया है। इसी कंपनी ने राफेल ‍विमान भी बनाएं हैं. डसॉल्ट मिराज 2000 हवा से सतह पर मिसाइल और हथियार से हमला करने के साथ-साथ लेजर गाइडेड बम (LGB) दागने में भी सक्षम है।

डसॉल्ट मिराज 2000 लड़ाकू विमान 29 जून 1985 में भारतीय वायुसेना की नंबर- 7 स्क्वाड्रन में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। मिराज 2000 लड़ाकू विमान 1999 के कारगिल युद्ध में भी दुश्मनों के दांत खट्टे कर चुका है।

मिराज द्वारा दागे गए लेजर गाइडेड बम ने दुश्मन के अहम बंकरों को ध्वस्त कर दिया था। मिराज 2000 में हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्डपॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया गया है।
सिंगल-सीट संस्करण भी दो आंतरिक हैवी फायरिंग करने वाली 30 मिमी बंदूखों से लैस है।
कारगिल युद्ध के बाद मिराज विमानों का अपग्रेडेशन भी किया गया है।

11/02/2019
।। लेख ।।"International day of zero tolerance for female ge***al mutilation"~6 feb          संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों क...
08/02/2019

।। लेख ।।
"International day of zero tolerance for female ge***al mutilation"~6 feb

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 20 महिलाओं या लड़कियों में से कम से कम एक शख़्स के साथ किसी न किसी प्रकार के फ़ीमेल जेनिटल म्युटिलेशन (एफ़जीएम) यानी महिला ख़तना हुआ होता है.
दुनिया में इस समय 20 करोड़ ऐसी महिलाएं हैं जिनके साथ FGM हुआ है।
महिलाओं में ख़तने (एफ़जीएम) को पूरी तरह रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा की है जो हर साल छह फ़रवरी को होता है।
फ़ीमेल जेनिटल म्युटिलेशन या एफ़जीएम यानी ख़तना ऐसी एक प्रक्रिया है जिसमें जानबूझकर महिला के बाहरी गुप्तांग को काट दिया दिया जाता है या उसे हटा दिया जाता है।
एफ़जीएम महिलाओं और लड़कियों को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से नुक़सान पहुंचाता है और इस प्रथा के कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं हैं।
यह बहुत ही विचलित करने वाला है और महिलाओं के संबंधों को नुकसान पहुंचाता है. यह अक्सर महिलाओं की इच्छा के ख़िलाफ़ होता है या उन पर थोपा जाता है।

#एफ़जीएम_कहां_कहां_होता_है?
ऐसा अनुमान है कि एफ़जीएम प्रथा वर्तमान में अफ़्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कई इलाक़ों में जारी है, साथ ही यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी समुदाय भी यह प्रथा अपनाते हैं।
यूनिसेफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, अफ़्रीका और मध्य पूर्व के 29 देशों में यह प्रथा अपनाई जाती है. हालांकि, इनमें से 24 देशों में एफ़जीएम के ख़िलाफ़ क़ानून भी हैं।
ब्रिटेन जैसे देशों में एफ़जीएम ग़ैर-क़ानूनी है लेकिन यह बच्चों और शिशुओं में तेज़ी से अपनाई जा रही है।

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