22/08/2024
दादा तो दादा थे, दादा ने हरभजन सिंह, युवी, कैफ और धोनी जैसे खिलाडी को टीम के तरासा है। धोनी ने रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन सहित अन्य खिलाड़ियों को बनाया. क्रिकेट की भाषा में कहते हैं कि बैक किया लेकिन, सवाल है कि धोनी को फिर किसने बनाया? किसने धोनी को बैक किया और कैसे? जाहिर है आप कहेंगे गांगुली लेकिन, ये इतना सिंपल भी नहीं है. इसके पीछे एक किस्सा है मजेदार और दिलचस्प. आपने सुना क्या? कोई बात नहीं! चलिए सुनते हैं.
धोनी की विशाखापत्तनम में खेली गई 148 रनों की पारी तो सबको याद होगी. ये धोनी का पहला वनडे इंटरनेशनल शतक भी था. इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी! ये फिल्म तो सबने देखी होगी. बांग्लादेश के खिलाफ डक से शुरुआत करने वाले धोनी आगे इसी टीम के खिलाफ 2 और मैच में कुछ खास नहीं कर पाते.
फिर शुरुआत होती है इंडिया–पाकिस्तान द्विपक्षीय वनडे सीरीज की. पहले मुकाबले में भी धोनी के लिए कुछ खास नहीं बदलता. मैच के बाद धोनी होटल रूम में होते हैं और तभी उनका मोबाइल बजता है. दूसरी तरफ होते हैं उनके खास दोस्त संतोष लाल. कहते हैं, माही! तुम ऊपर काहे नहीं आता है? जवाब में धोनी कहते हैं, कह तो रहे थे कि किसी मैच में हमको 3 नंबर पर भी ट्राई करेंगे. अभी तो हमको ई भी पता नहीं है कि हम कल के मैच में हैं कि नहीं और तभी होटल रूम में रखा फोन बजता है. आवाज आती है. धोनी यू आर इन इलेवन. दूसरी तरफ दादा यानी सौरव गांगुली थे. तो ये रील लाइफ किस्सा है. अब रियल लाइफ किस्सा सुनिए जो सौरव गांगुली ने क्रिकेट प्रेजेंटर गौरव कपूर के टॉक शो में बताया.
दादा ने बताया! धोनी 7 नंबर पर बैटिंग कर रहा था. बांग्लादेश और फिर पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू के बाद से उसका 4 मैच कुछ खास नहीं गया था. फिर हमलोग वाईजैग (विशाखापत्तनम) गए. मेरे मन में चल रहा था कि यार इसमें ( धोनी) में बहुत दम है लेकिन इसको प्लेयर कैसे बनाया जाए? मैं पूरी रात अपने होटल रूम में यही सोचता रहा. दूसरे दिन मैच में पहले वार्मअप किया. टॉस हो गया. हम टॉस जीते और फिर वापस ड्रेसिंग रूम की तरफ लौटते हुए मैंने सोचा कि यार इसको (धोनी) भेज ही देते हैं. जो होगा देखा जायेगा.
बकौल गांगुली– जब मैं ड्रेसिंग रूम में आया तो देखा धोनी शॉर्ट्स में बैठा है. क्योंकि उसे पता था कि 7 नंबर पर बैटिंग करना है. मैंने उससे कहा कि धोनी! आज 3 नंबर पर जाना है. धोनी ने पूछा! और दादा आप? गांगुली ने कहा मैं 4 खेलूंगा, आज तू 3 नंबर पे जा. गांगुली ने कहा कि मैंने उसे भेज दिया. उसने 148 रन कर दिए. गांगुली ने आगे कहा कि खिलाड़ी ऐसे ही बनते हैं. आपको उन्हें आगे डालना होता है ताकि उसके पोटेंशियल का सही इस्तेमाल हो सके. उसको पीछे रखकर आप उन्हें प्लेयर नहीं बना सकते. लीडर गांगुली के अपने रिस्क पर लिए गए उस एक डिसीजन से टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट का सबसे सफलतम कप्तान मिला. बेहतरीन विकेकीपर बल्लेबाज मिला. गांगुली के उस सम्मान के बदले धोनी ने गांगुली के आखिरी टेस्ट मैच में उन्हें आखिरी कुछ ओवर्स के लिए कप्तानी सौंप दी. कंधे पर उठाया !