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22/08/2020

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विभिन्‍नताओं से भरे हमारे देश में हर रिश्‍ते को सम्‍मान देने और उनकी कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए कोई न कोई त्‍योहार य...
05/07/2020

विभिन्‍नताओं से भरे हमारे देश में हर रिश्‍ते को सम्‍मान देने और उनकी कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए कोई न कोई त्‍योहार या फिर कोई न कोई अवसर निहित है। इसी प्रकार गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु के प्रति आदर-सम्मान और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के पर्व के रूप में मनाते हैं। इस बार यह गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई यानी आज है। भारतीय संस्कृति में गुरु को देवता के तुल्य माना गया है। गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है।

महर्षि वेदव्यास को समर्पित है यह पर्व
वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले वेद व्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ई. पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। बहुत से लोग इस दिन व्यास जी के चित्र का पूजन और उनके द्वारा रचित ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। बहुत से मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्मलीन संतों की मूर्ति या समाधी की पूजा करते हैं।

गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग अपने दिवंगत गुरु अथवा ब्रह्मलीन संतों के चिता या उनकी पादुका का धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, चंदन, नैवेद्य आदि से विधिवत पूजन करते हैं। गुरु को ब्रह्म कहा गया है, क्योंकि जिस प्रकार से वह जीव का सर्जन करते हैं, ठीक उसी प्रकार से गुरु शिष्य का सर्जन करते हैं। हमारी आत्मा ईश्वर रूपी सत्य का साक्षात्कार करने के लिए बेचैन है और ये साक्षात्कार वर्तमान शरीरधारी पूर्ण गुरु के मिले बिना संभव नहीं है, इसीलिए हर जन्म में वो गुरु की तलाश करती है।

शिव हैं सबसे पहले गुरु
पुराणों के अनुसार, भगवान शिव सबसे पहले गुरु माने जाते हैं। शनि और परशुराम इनके दो शिष्य हैं। शिवजी ने ही सबसे पहले धरती पर सभ्यता और धर्म का प्रचार-प्रसार किया था इसलिए उन्हें आदिदेव और आदिगुरु कहा जाता है। शिव को आदिनाथ भी कहा जाता है। आदिगुरु शिव ने शनि और परशुराम के साथ 7 लोगों को दिया। ये ही आगे चलकर सात ह्मर्षि कहलाए और इन्होंने आगे चलकर शिव के ज्ञान को चारों तरफ फैलाया।

गुरु पूर्णिमा पर ऐसे करें पूजा

गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्‍दी उठकर दैनिक क्रिया से निवृत्‍त होकर स्‍नान कर लें।

स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु, शिवजी की पूजा करने बाद गुरु बृहस्पति, महर्षि वेदव्यास की पूजा करें इसके बाद अपने गुरु की पूजा करें।

घर की उत्‍तर दिशा में सफेद वस्‍त्र पर गुरु का चित्र रखें।

गुरु को फूलों की माला पहनाएं, मिठाई से भोग लगाएं एवं आरती उतारकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें।

ध्‍यान रहे कि सफेद या फिर पीले वस्‍त्र पहनकर गुरु पूर्णिमा की पूजा करें।

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06/05/2020

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