26/11/2022
राजपुत समाज ऊना H.P
मौत पसंद है, अपमान नहीक्योंकि हम राजपू
26/11/2022
30/07/2022
राय बुलार भट्टी(भाटी) जिन्होंने 18,500 एकड़ ज़मीन गुरु #नानक देव जी को #दान में दी थी !!
37000 एकड़ जमीन के मालिक थे ये, आधी दान करदी थी इन्होंने !!
अब #ननकाना साहब में उस जमीन पर गुरुदारे को छोड़ बाकी हज़ारो एकड़ पर #पाकिस्तान सरकार का कब्ज़ा है !!
आज इस बात को कोई माने या ना माने पर ये अटल सत्य है,की हिंदुत्व की नींव , क्षत्रियोँ के त्याग,बलिदान पर टिकी हुई है.....
आज आपको इसकी एक छोटा सा उदाहरण दिखाता हूँ .
विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू विश्वविद्यालय,, बनारस हिंदू बिश्वबिद्यालय के बनने की कहानी ..
बनारस से जोधपुर की दूरी करीब 1200 किमी है....और उस समय इन क्षेत्रों का तो आपस मे कोई ज्यादा लेना देना भी नही था...
फिर भी जोधपुर के महाराजा ने उस 1900 सदी की शुरुआत में लाखों रुपये का सहयोग बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बनने के लिए दिया था...जिनका आज का मूल्य करोड़ो या अरबों में होगा...
लेकिन फिर भी ये दिलचस्प बातें, किसी को नही बताई जाती, ना ही ये बात विश्वविद्यालय बताता है,ना ही ये सरकारें...या मीडिया
जोधपुर के महाराजा सुमेरसिंह जी साहिब ने फ़रवरी 1913 ई मे जब पण्डित मदन मोहन मालवीय जी दरभंगा के महाराजा के साथ जोधपुर पधारे थे ,और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की बात रखी तब महाराजा श्री सुमेरसिंहजी साहिब ने दो लाख रुपये विश्वविधालय के लियें तथा 24 हज़ार प्रतिवर्ष शिल्पकला - विज्ञान की शिक्षा के लियें एक शिक्षक ( Jodhpur Hardinge Chair of Technology) के लियें प्रदान करने का वचन दिया जिसे आगे भी निभाया गया ।
आगे चलकर महाराजा उमैदसिंहजी साहिब मारवाड़ नरेश ने 1927 ई. के नवम्बर में बनारस हिन्दु विश्वविघालय को दो लाख रुपये मारवाड़ी युवकों के लिये पशु - चिकित्सा ( veterinary ) अौर कृषि विज्ञान ( Agricultural Science ) की 4 इरविन छात्रवृत्तियाँ ( Schoolaship ) नियत करने को कहा । उसी समय महाराजा साहिब ने कृषि विधा की शिक्षा के लियें तीन लाख रूपये प्रदान किये जो इरविन- कृषि विधा - शिक्षक ( Irwin Chair of Agriculture ) के नाम से दिये गये थे।
महाराजा साहिब के प्रयासो से जोधपुर राजपरिवार व प्रजा ने भी आपना योगदान दिया जो एक लाख रुपये था ।
मारवाड़ के महकमाख़ास रेकोर्ड में पण्डित मदन मोहन मालवीय जी एवं महाराजा उमैदसिंह जी साहिब के मध्य हुए पत्र व्यवहार से जाना जा सकता हैं ।
जोधपुर राजपरिवार सदैव शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय रहा हैं । आज भी वर्तमान राजपरिवार इन परम्पराओं का निर्वहन कर रहा हैं
पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने महाराजा उमैदसिंहजी साहिब को पाँच पत्र लिखे थे जिनमे मारवाड़ रियासत के आर्थिक सहयोग के लियें आभार जताया था ।
महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के संग्रह के कूछ महतवपूर्ण दस्तावेज़ों अवलोकनार्थ प्रस्तुत हैं ।
ऐसा ही सहयोग,और भी कईं क्षत्रिय राजाओं ने किया था...पर ये सब सहयोग ,इतिहास के पन्नो में ही दबकर रह गया ..
केदारनाथ हो या बद्रीनाथ
द्वारिकाधीश हो या जगन्नाथ मंदिर,भारत के लगभग सभी प्राचीन मंदिर ,क्षत्रिय राजाओं की देन है....मानो या ना मानो
इस संघ को कोई भी क्षत्रिय पसंद नहीं है ।
इस संघ ने इमानदार प्रधानमंत्री वीपी सिंह के खिलाफ केस दायर किया ।
इस संघ ने क्षत्रिय समाज के सबसे ज्यादा लोकप्रिय राजनेता अर्जुनसिंह के खिलाफ केस दायर किया ।
इसी संघ को अमरसिंह से बहुत चिढ़ थी और उनसे 28 करोड़ की सम्पत्ति ले ली ।
इस संघ को वीर बहादुर सिंह से बहुत चिढ थी जिसने रामजन्म भूमि के ताले खुलवाए, जिसका नतीजा भी उन्होंने भुगता संद्गिध मृत्यु । लेकिन संघ ने कभी नाम नहीं लिया ।
संघ को मनीष सिसोदिया से बहुत चिढ़ है क्योंकि NCR से दो दो साठा चौरासी से एक क्षत्रिय लीडरशिप तैयार हुई है जो दिल्ली में धमक दे रही है । तोमर सिसोदिया साठा चौरासी एवं सोलंकी भाटी साठा चौरासी
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शंकर सिंह वाघेला जी की राजनीति इन्होंने खत्म कराई,
इनको तो संघी जसवंत सिंह से भी बहुत चिढ़ थी, वृद्धावस्था में उनकी बेइज्जती करा दी ।
इनको क्षत्रिय महापुरुषों सम्राट मिहिर भोज सुहैल देव बैस महाराणा प्रताप पृथ्वीराज चौहान अनंगपाल तोमर आल्हा ऊदल आदि से भी बहुत चिढ़ है , संघ ने इन्हें भील गूजर अहीर जाट पासी बना दिया है ।
इतना जोर जुल्म होने के बाद भी पता नही कब जागे और सुधरेगा मेरा समाज,
#क्षत्रिय_विरोधी_RSS
क्षत्रिय धर्म युगे युगे,
क्षात्र धर्म की जीत हो,
Okendra Rana Haryana
अयाज़ अमीर नाम के एक पाकिस्तानी पत्रकार ने वहां के एक न्यूज चैनल पर एक ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए बताया...
मुल्तान में जश्न का माहौल था, बाबर ने राणा सांगा से युद्ध जीता था, जश्न के उस माहौल में बाबर से एक उज्बेक कबीले का मुखिया मिला, बातचीत के दौरान उस उज्बेक सरदार ने बाबर से कहा, यह जश्न बहुत सारी कब्रों का निर्माण करेगा...
बाबर ने पूछा ऐसा क्यों???
उज्बेक मुखिया बोला - सुल्तान जिन राजपूतों से आप लड़े है, जिनकी हत्या की है, उनकी आने वाली पीढ़ियां आपसे लड़ेंगी। यह मिस्र, पर्सिया नहीं है जो अपने प्रतिशोध को भूल जाये, ये वो क्षत्रिय राजपूत है, जिनके खून में प्रतिशोध बहता है। आने वाली आपकी नस्लें चैन से नहीं रहेंगी।
ठीक वही हुआ...
यह लड़ाई अगली दो शताब्दियों तक निरंतर चलती रही। मुगल, तुर्क, कुर्दों की कब्रों से भारत पट गया।
प्रतिशोध, संतुलन के लिये अति आवश्यक है...
जिन वर्गो के बारे में लोग जानते है कि इनकी पीढ़ियां बदला लेंगी, उनके साथ कुछ भी करने से अपराधिक प्रवृत्ति के लोग तक डरते है।
यह नियम तब भी था, आज भी है, आगे भी रहेगा...
अफगान/पश्तून एक गज़ब की उपद्रवी योद्धा जनजाति रही है जिसे काबू में करने में अच्छे अच्छे साम्राज्यों के पसीने निकल गए। ब्रिटिश एम्पायर जिसके बारे में कहा जाता है की उस राज में सूर्य अस्त नहीं होता था उन अंग्रेजों को पठानों ने दौड़ा दौड़ा कर मारा, इतनी किरकिरी हुई की अपमानित होकर ब्रिटिश फोर्स को पीछे हटना पड़ा।
शीत युद्ध के पीक पर सोवियत रूस ने अफगानिस्तान को कम्युनिस्ट स्फीयर में लाने के लिए अपने पूरे रिसोर्सेस के साथ उस देश पर धावा बोला। सालों तक युद्ध चला पर आखिरकार थक हार कर रूसियों को वापस अपने देश जाना पड़ा।
यही हाल अपनी तकनीकी कौशल और मिलिट्री श्रेष्ठता पर घमंड खाए अमेरिका का हुआ।
अफगानिस्तान को ग्रेवयार्ड ऑफ एंपायर्स यूं ही नही कहा जाता। अच्छे अच्छे नामचीन वहां जाकर पसर गए।
सिवाय एक के। राजा मानसिंह और उनकी कच्छवाहा सेना एकमात्र ऐसी हमलावर फौज़ थी जिनके बारे में कहा जा सकता है की उन्होंने पठानों को वाकई में नानी याद दिला दी।
मानसिंह की बहादुरी और युद्ध कौशल से प्रभावित होकर खुद पश्तूनों ने उनकी तारीफ की। अबुल फ़ज़ल लिखता है की अकबर को मानसिंह को काबुल की सूबेदारी से हटाना पड़ा क्योंकि पठानों को बेइज्जती महसूस होती थी की हिंदू उनपर राज कर रहे हैं। अफगान इतिहास में उन्होंने इतना तिरस्कार कभी नहीं झेला जितना उन्होंने मानसिंह के नीचे रहते हुए महसूस किया।
अब सोचिए अगर किसी दूसरी हिंदू जाति के पास इतना बेहतरीन पूर्वज होता तो । महिमा गा गा कर नाक में दम कर देते। असंख्य किताबें लिखी जाती। अंतराष्ट्रीय मंचों पर उनकी तारीफ में सेमिनार होते।
पर अफसोस मानसिंह एक क्षत्रिय थे। क्षत्रियों से वामपंथी और संघी दोनो तो नफरत करते ही करते है, खुद क्षत्रिय तक अपने योद्धाओं को बराबर सम्मान देने में हिचकते हैं।
दुनियां में शायद ही ऐसी कोई कम्युनिटी हो जिसे अपने ही वीरों से दिक्कत होती हो। जिस मानसिंह की पूजा होनी चाहिए उन्हें अछूत बना दिया गया। जिस राजा ने हिंदू धर्म के उत्थान के लिए सबसे ज़्यादा काम किया उसे उसके खुद की जाति के लोगों ने गद्दार घोषित कर दिया। महाराणा प्रताप जो विपक्ष में होने के बावजूद जिन मानसिंह का सम्मान करते थे और जिन्होंने अपनी भतीजी का पाणिग्रहण मानसिंह के पोते के साथ किया, उन मानसिंह को आजकल कोई भी ऐरा गेरा राजपूत आकर गाली दे जाता है की ये तो राष्ट्रद्रोही थे।
पुण्यतिथि पर सादर नमन।
01/07/2022
तुर्क भारत आए और शासन किए
जिम्मेदार कौन ? राजपूत
हूण, शक आए
जिम्मेदार कौन ? राजपूत
मुगल आए, शासन किए
जिम्मेदार कौन ? राजपूत
अंग्रेज आए, शासन किए
जिम्मेदार कौन ? राजपूत
भारत स्वतंत्र हुआ (हालांकि स्वतंत्र क्या कहें! किसी और के हाथ से परोक्ष रूप से किसी और के हाथ में गया)
इसी दौर में साहित्य में ठाकुरों को विश्व में सबसे ज्यादा प्रताड़ना देने वाला सिद्ध किया गया, प्रेमचंद ने तो बाकायदा ‘ ठाकुर का कुंआ ’ लिख कर यह बताने की कोशिश की , कि ठाकुरों जैसा निर्मम कोई नहीं।
लेकिन यह नहीं बताया कि शाम को जब ठाकुर साहब गांव घूमते थे तो ये जरूर देखते थे कि किसके आंगन से धुंआ नहीं निकल रहा है, यदि धुंआ निकलता नहीं दिखता तो जरूर उसके यहां आग और खाने का प्रबंध करवाते थे खैर, आगे चलकर बॉलीवुड ने तो यह सिद्ध ही कर दिया की ठाकुर इस धरा पर केवल अत्याचार के लिए जन्मे हैं।
पहले राजनीति में हमारे प्रतिनिधित्व को कम किया गया फिर जमींदारी एबोलिशन, प्रीवीय पर्स की समाप्ति, लोकतंत्र की दुहाई देकर हमारे मनोबल को धूल धूसरित किया गया।
सोशल मीडिया का जमाना आया इसमें तो अति ही कर दी गई, जमकर टारगेटेड रूप में हमें गालियां दी गई, कुछ ने प्रत्यक्ष रूप से हमारे चीर – हरण पर आनंद लिया तो कुछ ने अप्रत्यक्ष रूप से इसे बढ़ावा दिया, जोधा अकबर जैसी अनगिनत फेंक कहानियां लोगों के समक्ष परोसी गईं, समधी - साढू का रिश्ता बताकर खूब चटकारे लिए गए , बारी बारी से हमारे योद्धाओं को पराजित घोषित किया गया और जो विजेता थे उनकी जाति ही बदलने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर हमें सबसे घृणित और कायर घोषित किया गया !
तो मेरा निवेदन है कि हमें कायर और डरपोक ही रहने दें, लोकतंत्र में हमारे युवाओं को आगे आकर पढ़ाई लिखाई करने दें क्योंकि न हमारे पास रहने के लिए जमीन बची है और न ही अनाज उपजाने के लिए खेत, आपको खुद के बच्चों को तो कलेक्टर बनाना है और कलेक्टर न भी बन पाया तो सेटिंग ऐसी है कि उसी दफ्तर में बाबू तो बन ही जायेगा, और यहां तो बाबूसाहब लोग न पढ़ाई लिखाई में ही जा पाए और न ही अपनी संपत्ति बचा पाए, मानसिक गुलाम अलग बन गए।
लोकतंत्र में सक्षमता आप लोग की है , राजस्थान जैसे क्षत्रिय बाहुल्य राज्य में आप लोगो ने विप्र बोर्ड तक बनवा लिया ,आपके सामर्थ्य के आगे क्षत्रिय नगण्य हैं, इसलिए आप अपनी ऊर्जा समय और सामर्थ्य हमे गाली देने में नाहक व्यर्थ न करे, उठें पौरुष का पर्याय बने, पुरुषत्व कोई राजपूतों की जागीर थोड़े है, पुरुष तो आपके भी कमजोर नहीं होंगे, पूरी ताकत से चाहे गरियाइये चाहे ललकारिये लेकिन अब जंग लगी तलवारों को छोड़ इनको चमकाइए हमारे समाज की शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
अजीत सिंह
#राजन्य_क्रॉनिकल्स_टीम
जिन्हें हमारी #बलि-प्रथा से समस्या थी। समस्या भी इतनी कि बकायदा इस पर "क्षत्रिय" #फ़िल्म बनाकर हमारे विरुद्ध #घृणा फैलाई गई।
जिन्हें हमारे #हथियार रखने से समस्या थी। बकायदा #कानून बनवाकर हमारे हथियार रखने के धार्मिक #अधिकार तक का #हनन किया गया।
जिन्हें हमारे #मूंछ रखने और यहां तक कि हमारी कान की बाली तक से समस्या है और समस्या भी इतनी कि बकायदा हमारी हर #परम्परा को #गुंडई का पर्याय बना दिया गया।
उन्हें बस एक #हमला होने पर राजपूत #याद आने लगे?
और ये हमला भी किसी #तुर्क ने नहीं, बल्कि एक #पसमांदा ने किया। जिन्हें हम ठाकुर दुनिया की सबसे #कायर प्रजाति मानते हैं ।
तुम उससे तक अपनी #रक्षा न कर पा रहे हो? किसी #तुर्क, #अफगानी के सामने पड़ोगे। तो क्या हाल होगा...खैर हमें क्या?
हम क्षत्रिय तो #कायर हैं ।
हमारे तो राणा प्रताप भी हल्दीघाटी से #भाग गए थे? इसलिए अब #तुम वीरता दिखाओ हिंदुओं ।
तुम्हारे पास अपनी #वीरता दिखाने का पूरा #मौका है...हम क्षत्रियों को #आवाज न दो ।🙏
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#राजन्य_क्रॉनिकल्स_टीम
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