18/12/2022
विधानसभा प्रश्न
अधिकांश मंत्री विधानसभा में सरकार द्वारा किये गए कार्यो का ब्यौरा पूछा जाता है।क्योंकि सरकार सभी योजनाओं को सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से पूर्ण करवाती है,इसलिए सरकारी अफसरों और विभागों के पास पूरा डाटा रहता है कि कब कौनसी योजना में कितना पैसा व्यय किया गया।कर्मचारी केवल योजनाओ का क्रियान्वयन मात्र करता है,फिर भी जब प्रश्न पूछा जाता है तो सरकारी कर्मचारियों से अनेक वर्ष पुरानी जानकारी मांगी जाती है जिसमे कर्मचारी स्वयं का कर्तव्य कार्य छोड़कर उस विधानसभा डाक बनाने में लग जाता है ,और जिसका औचित्य कभी समझभी नही आता कि इन पुराने मुर्दो को उखाड़कर आज तक किसी नेता या सरकार ने क्या कर लिया।
हा यह बात जरूर है कि सरकारी कर्मचारी जरुर मानसिक रुप से हैरान हो जाता है स्वयम के कार्य छोड़ पुराने रिकार्ड्स को खंगालने लग जाता है।अभी कुछ समय पहले शिक्षको से 2004 के बाद से छात्र दर्ज संख्या,mdm की जानकारी,छात्रवृत्ति की जानकारी मांगी गई जिसमें शिक्षक 2 दिन इसी कार्य मे लगे रहे,जबकि वरिष्ठ कार्यालय जो mdm खाद्यान्न जारी करते हैं ,उनके पास सारी जानकारी कंप्यूटर में फीड होती है चाहे तो पलभर में जानकारी दी जा सकती है।वहीं जो छात्रवृत्ति जारी की जाती है वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जारी की जाती है जिसका पूरा ब्यौरा कंप्यूटर में रहता है ,फिर भी शिक्षको के पुराने रेजिस्टर दस्तावेजो को खंगालने हेतु बाधित किया जाता है,जो कि वैसे ही जर्जर स्थिति में होते हैं।कई बार तो कई दस्तावेज दीमक द्वारा या अन्य वजह से नष्ट हो चुके होते हैं।आज वर्तमान ।के डिजिटल युग मे भी पलक झपकते ही जो जानकारी मिल जाये उसे कर्मचारियों को पुराने रिकॉर्ड से खंगालने हेतु बाधित किया जाता है और शायद उन प्रश्नों का महत्व या फायदा आज तक आम जनता को समझ ही न आ पाया हो।कुछ गलत लिख गया हो तो क्षमाप्रार्थी।पर अनावश्यक प्रश्नों पर विधानसभा में रोक हो जो कर्मचारियों पर #अतिरिक्त_बोझ पैदा करते हों।