सिद्धार्थ से बुद्ध तक की यात्रा
सिद्धार्थ या कहे युवराज सिद्धार्थ का अपने मन के अंधकार को मिटाने, सत्य की खोज में महल से निकलना ही उस यात्रा का आरंभ था , एक रात सिद्धार्थ महलों का सुख त्याग कर सत्य की खोज करने निकल गए, वे सात वर्षों तक वन में भटकते रहे जहां उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई।
ये दिन इसलिए भी पवित्र हो जाता है कि युवराज सिद्धार्थ का जन्म, सिद्धार्थ से बुद्ध होने का अर्थात बुद्धत्व प्रात करने का दिन और भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण का दिन होना, ये तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे।
डॉ.आशुतोष व्यास
डॉ. आशुतोष व्यास
From classroom teaching to corporate mentoring, My mission is to help people unlock their true potential.
30/04/2026
आज विश्वास की जीत का दिन है , एक बालक जिसे ये विश्वास था की हर जगह वो भगवान है जिसने हम सब को धारण किया है , उस बालक के विश्वास को देख कर स्वयं भगवान विष्णु को अपने वैकुंठ से धरती पर आना पड़ा, आज ही के दिन वैशाख मास के शुक्ला चतुर्दशी को भगवान नरसिंह जो आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट होते हैं , अपने भक्त प्रह्लाद के विश्वास के लिए , दुराचारी असुर को सजा देने के लिए । भगवान नरसिंह, जिनका धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे । अद्भुत भगवान विष्णु के चौथे अवतार उग्र रूप में एक असुर के अविश्वास एवं अतिविश्वास को भंग करने आते है जो ये मानता था की वह न दिन में न रात में, न आकाश में न धरती पर, न घर में न घर के बाहर, न मानव से न पशु से, न अस्त्र से न शस्त्र से मारा जाए, भगवान नरसिंह रूप में संध्या काल में अपने हाथ के पंजे से ,महल की चोखट पर अपनी गोद में उस आसुरी प्रवृति का अंत करते है ,और एक बालक के विश्वास को सत्य करने के लिए खंबे में से प्रकट होते है।
नरसिंह चतुर्दशी की अनंत शुभकामनाएं
डॉ.आशुतोष व्यास
9340634922
09/03/2026
After a long pause, we are excited to reconnect with you!
Our page has been inactive for few months, but during this time we have been working behind the scenes to bring fresh ideas, meaningful insights, and valuable learning resources for management students and business professionals.
We are happy to announce that we are restarting our posts with new content focused on training, consulting, and professional growth. Our goal has always been to help individuals develop the skills needed to succeed in today's dynamic business environment.
As a new initiative, we will soon be starting a series on Emotional Intelligence (EI). In today's competitive world, technical knowledge alone is not enough. The ability to understand emotions, manage stress, build strong relationships, and make thoughtful decisions is what truly sets successful students and professionals apart.
Through this series, we will explore:
What Emotional Intelligence really means
Why it is important for management students and professionals
How El helps in leadership, teamwork, and career growth
Practical ways to develop Emotional Intelligence in everyday life
Stay connected with us for insights, tips, short learning modules, and interactive discussions on Emotional Intelligence and professional development.
We look forward to learning and growing together again. Thank you for staying with us!
Development Skills
Dr. Ashutosh Vyas
08/03/2026
08/03/2026
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ज्ञानमृत प्रार्थना एक आध्यात्मिक साधना के सभी साधक को आज 08 मार्च 2026 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं।
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
हमारी इस श्रृंखला में हम भारतीय ज्ञान परम्परा - सनातन का मूल में आज एक विशेष ज्ञानानृत की चर्चा करेंगे।
अंतरराष्ट्री महिला दिवस की शुरुवात में सबसे पहले यह दिवस, न्यूयॉर्क नगर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया क्योंकि इसी दिन सोवियत संघ में महिलाओं ने समान अधिकार के लिए आंदोलन किया था। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की औपचारिक घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा सार्वभौमिक रूप से सन् 1975 से की गई।
एक ओर जहां लगभग 20 वीं सदी तक वैश्विक स्तर पर महिलाओं को अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा वही भारत में तो वैदिक काल लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व से ही भारतीय महिलाओं का समाज, धर्म, शिक्षा और परिवार में उच्च योगदान था। वे केवल गृहकार्य तक ही सीमित नहीं थी वे विदुषी (शिक्षित), चिकित्सक, वेद शास्त्रार्थी और ऋचाओं की रचयिता थीं, जिन्हें परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठान (यज्ञ) में अनिवार्य माना जाता था। उन्हें शिक्षा, स्वयंवर द्वारा विवाह चयन, और राजनीतिक एवं धार्मिक सभा-समिति में भागीदारी की पूर्ण अधिकार था। वे पुरुषों से भी कही ज्यादा आदरणीय थीं।
आध्यात्मिक स्तर पर भी भारतीय ज्ञान परम्परा, महिलाओं के लिए स्पष्ट करती है, की शक्ति स्वरूपा नारी जो युद्ध शक्ति, धन शक्ति, ज्ञान शक्ति के रूप में विराजित है, वही इस सृष्टि के सृजन, पालन एवं लय की शक्ति है।
हम ब्रह्मा के साथ ब्राह्मणी , नारायण के साथ नारायणी, महाकाल के साथ महाकाली की बात करते है तब ये बात यह बात स्पष्ट हो जाती है कि बिना ज्ञान शक्ति के स्वयं ब्रह्मा सृजन, बिना धन शक्ति के नारायण पालन एवं बिना युद्ध शक्ति के महाकाल लय नहीं कर सकते।
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
डॉ.आशुतोष व्यास
093406 34922
21/06/2024
21जून 2024
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की इस मंगलमय सुबह पर आप सभी को नमस्कार,
आज का दिन 21 जून 2024 योग दिवस के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है, ये योग सनातन दर्शन का एक महत्व पूर्ण अंग है, महर्षि पतंजलि जिनके द्वारा ये सूत्र दिया गया की यदि मनुष्य अपने जीवन को स्वस्थ, समृद्ध, एवं श्रेष्ठ बनाना चाहता है तो उसे योग दर्शन समझना होगा।
योग दर्शन में महर्षि पतंजलि द्वारा अष्टांग योग का दर्शन दिया गया , अर्थात योग के आठ अंग बताए गए ,
यम , नियम , आसान , प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि ।
साधक इन अष्ट अंगों की साधना कर आत्मा को परमात्मा में युज्य कर सकता है।
"'योग' शब्द संस्कृत मूल 'युज' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'जुड़ना' या 'जोड़ना' या 'एकजुट होना'। योग शास्त्रों के अनुसार योग की साधना व्यक्तिगत चेतना को सार्वभौमिक चेतना के साथ जोड़ती है, जो मन एवं शरीर, मनुष्य एवं प्रकृति के बीच पूर्ण सामंजस्य का संकेत देता है।"
आप सभी को योग दिवस की शुभकामनाएं
धन्यवाद
डॉ. आशुतोष व्यास
093406 34922
मित्राणि धन धान्यानि प्रजानां सम्मतानिव ।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥
"मित्र, धन्य, धान्य आदि का संसार में बहुत अधिक सम्मान है। किन्तु माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है।"
आज मातृ दिवस पर संकल्प ले की कल मातृभूमि को प्रेम करने वालो के लिए मतदान अवश्य करेंगे।
कम से कम 10 लोगो को मातृभूमि ,राष्ट्रहित में मतदान करवांगे।
निवेदन
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