04/11/2021
जय श्री महाकाल
दिवाली पर्व है पुरूषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,
देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ हैं,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ हैं,
आशीषों की मधुर छाँव इसे दे दीजीये,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए,
झिलमिल रौशनी में निवेदित अविरल शुभकामना,
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना !!!