17/03/2026
. हरीश राणा की स्थिति (बीमारी का इतिहास)
32 वर्षीय हरीश राणा साल 2013 में अपने घर की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद वह 'परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (PVS) में चले गए।
• वह पिछले 11-13 वर्षों से बिस्तर पर थे।
• उनका शरीर पूरी तरह से लकवाग्रस्त था, वह न बोल सकते थे, न सुन सकते थे और न ही होश में थे।
• उन्हें पाइप के जरिए खाना दिया जा रहा था और उनके शरीर में गहरे 'बेडसोर्स' (घाव) हो गए थे।
2. माता-पिता की गुहार
हरीश के माता-पिता अब बुजुर्ग हो चुके हैं (पिता करीब 62 वर्ष और माता 55 वर्ष की हैं)। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि:
• वे अब अपने बेटे की देखभाल करने में शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।
• उनके पास इलाज के लिए पैसे खत्म हो चुके हैं।
• वे अपने बेटे को इस असहनीय पीड़ा में और अधिक नहीं देखना चाहते।
3. कोर्ट का फैसला और जज की भावुकता
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस मामले की सुनवाई की।
• मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट: डॉक्टरों की एक टीम ने पुष्टि की कि हरीश के ठीक होने की कोई गुंजाइश नहीं है और वह केवल मशीनों और पाइप के सहारे जीवित हैं।
• जज का निर्णय: कोर्ट ने हरीश को 'सम्मान के साथ मरने' (Right to die with dignity) की अनुमति दी। जज ने आदेश दिया कि हरीश की फीडिंग पाइप (खाना देने वाली नली) को हटाया जा सकता है, जिससे उनकी प्राकृतिक मृत्यु हो सके।
• भावुक क्षण: सुनवाई के दौरान जज भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि यह फैसला लेना एक इंसान के तौर पर बहुत कठिन है, लेकिन हरीश की स्थिति को देखते हुए उसे इस कष्ट से मुक्ति देना ही एकमात्र मानवीय रास्ता है।
4. कानून क्या कहता है? (Passive Euthanasia)
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के एक ऐतिहासिक फैसले में Passive Euthanasia को कानूनी मान्यता दी थी।
• इसका मतलब है कि अगर कोई मरीज ऐसी स्थिति में है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं है, तो उसका लाइफ-सपोर्ट (जैसे वेंटिलेटर या फीडिंग ट्यूब) हटाया जा सकता है।
• यह 'एक्टिव यूथेनेशिया' (जहर का इंजेक्शन देना) से अलग है, जो भारत में अभी भी गैर-कानूनी है।
5. इस फैसले का महत्व
यह मामला समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि 'जीवन' का अर्थ केवल सांस लेना नहीं, बल्कि गरिमा के साथ जीना है। हरीश के माता-पिता के लिए यह फैसला एक तरफ उनके बेटे को खोने का दुख है, तो दूसरी तरफ उसे सालों की तड़प से आजाद करने का सुकून भी। Copied....
08/01/2026
चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसके गेहूं के बराबर छोटे छोटे टुकड़े करके घर में रखे .यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है . गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी #पीलिया ठीक हो जाता है।
#शुगर #मरीज रोज़ सुबह ख़ाली पेट एक गिलास पानी में एक छोटे चने के बराबर चुना मिलकर पीने से शुगर जड़ से ख़त्म हो सकती हैं ( समय समय पर जाँच करवाते रहे.. वरना शुगर का लेवल माइनस भी हो सकता हैं)
#जब कोई माँ #गर्भावस्था में है तो गेहूं के बराबर चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है .
#चूना #घुटने_क_दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है . कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है जिसे ये चूना ही ठीक करता है . रीढ़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होती है . अगर हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है . इसके लिए गेहूं के बराबर चूने का सेवन सुबह खाली पेट कर सकते है.
#अगर मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाने से बिलकुल ठीक हो जाता है , मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने के पानी से कुल्ला करने पर तुरन्त ठीक हो जाता है । शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना . गन्ने के रस में , या संतरे के रस में , नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में डाल कर चूना ले . अनार के रस में चूना पिने से खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस और गेहूँ के दाने के बराबर चूना डालकर सुबह खाली पेट ले सकते है.
#भारत के जो लोग चूने से पान खाते है, बहुत होशियार है और वे महर्षि वाग्भट के अनुयायी है . पर पान बिना तम्बाखू , सुपारी और कत्थे के ले . तम्बाखू ज़हर है और चूना अमृत है . कत्था केंसर का कारण बनता है, पान में सौंठ , इलायची , लौंग , केसर , सौंफ , गुलकंद , चूना , कसा हुआ नारियल आदि के खाए .
#अगर घुटने में घिसाव आ गया हो और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार ( पारिजातक या प्राजक्ता ) के पत्ते का काढ़ा पीजिये , घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।
चूना खाइए पर चूना लगाइए मत .
ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है.
Copied......
23/12/2025
👇 यह रही छप्पन भोग थाली की पूरी जानकारी व आइटम लिस्ट हिंदी में, जैसी मंदिरों व विशेष पूजा-उत्सव में बनाई जाती है। (छप्पन = 56 प्रकार के भोग)
छप्पन भोग थाली - संपूर्ण सूची
चावल / पुलाव (4)
सादा भात
घी वाला भात
केसरिया भात
मीठा चावल
रोटी / पूरी / पराठा (6)
गेहूं की पूरी
मैदे की पूरी
सादा रोटी
मिस्सी रोटी
पराठा
कचौड़ी
सब्ज़ियां (10)
आलू की सूखी सब्ज़ी
आलू-मटर
कद्दू की सब्ज़ी
लौकी की सब्ज़ी
भिंडी फ्राई
गोभी की सब्ज़ी
चना मसाला
मूंग दाल की सब्ज़ी
अरबी की सब्ज़ी
मिक्स वेज
दाल / कढ़ी (5)
मूंग दाल
तुअर दाल
उड़द दाल
पंचमेल दाल
कढ़ी
मिठाइयाँ (15)
लड्डू
पेड़ा
बर्फी
रसगुल्ला
गुलाब जामुन
खीर
श्रीखंड
हलवा
बालूशाही
जलेबी
मोदक
मखाना खीर
बेसन लड्डू
खोया बर्फी
मालपुआ
नमकीन / स्नैक्स (8)
नमकपारे
शक्करपारे
चिवड़ा
मठरी
सेव
मूंग दाल नमकीन
पकोड़े
समोसा
चटनी / रायता / अचार (5)
धनिया चटनी
इमली चटनी
दही रायता
नींबू अचार
आम का अचार
फल / पेय (3)
केला
सेब
मिष्ठान्न जल / पंचामृत
पंचामृत (संक्षिप्त विधि)
दूध
दही
शहद
घी
मिश्री
सबको मिलाकर भगवान को अर्पित करें।
विशेष सुझाव
भोग शुद्ध देसी घी में बनाएं प्याज-लहसुन न डालें
पहले भगवान को अर्पण करें, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण करें
🙏🙏
16/10/2025
दिवाली के दिन (ओल) सुरन की सब्जी खाना क्यों अनिवार्य है? तो मेरा मानना था की पहले के समय में सब्जियों के विकल्प बहुत सीमित हुआ करते थे,और ऐसे मसाले वाली सब्जियां केवल त्योहारों के दिन या किसी खास दिन ही बनते थे, जैसे आज कल पूड़ी — कचोरी बनना आम बात है, और पनीर वगेरह के विकल्प पहले नही हुआ करते थे। इसलिए हो सकता है की ऐसा बनाया गया होगा।
लेकिन बड़े लोगो से पूछने पे पता चला की पहले के समय में जो चीज़े बनाई गई थी उसके पीछे कारण हुआ करते थे। समस्या बस यह है की हमे चीज़े करने के लिए कहा जाता है लेकिन उसके कारण नही बताए जाते, इसके वजह से हम ऐसी चीजों को अंध श्रद्धा के साथ जोड़ देते है।
तो मित्रों अब जानते हैं दिवाली के दिन सूरन की सब्जी खाने व खिलाने के मुख्य कारण - दरअसल सूरन को अपने देश में कई नामो से जाना जाता है, जैसे सूरन,जिमीकन्द (कहीं कहीं ओल) और कांद भी बोलते हैं, आजकल तो बाजार में हाईब्रीड सूरन आ गया है,, कभी-कभी देशी वाला सूरन भी मिल जाता है , दीपावली के 3-4 दिन पहले से ही बाजार में हर सब्जी वाला (खास कर के उत्तर भारत में) सूरन जरूर रखता है,और मजे की बात है कि इसकी लाइफ भी बहुत होती है।
सब्जियो में सूरन ही एक ऐसी सब्जी है जिसमें फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, और अब तो मेडिकल साइंस ने भी मान लिया है कि इस एक दिन यदि हम देशी सूरन की सब्जी खा ले तो स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में महीनों फास्फोरस की कमी नही होगी,,
यह बवासीर से लेकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन बी1 और फोलिक एसिड होता है,साथ ही इसमें पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम भी पाया जाता है ।
मुझे नही पता कि ये परंपरा कब से चल रही है लेकिन सोचीए तो सही कि हमारे लोक मान्यताओं में भी वैज्ञानिकता छुपी हुई होती थी।
धन्य हों हमारे पूर्वज जिन्होंने विज्ञान को हमारी परम्पराओं, रीतियों और संस्कारों में पिरो दिया🙏🙏🙏🙏
04/10/2025
दो दो गिलास पी जाएंगे अगर इस तरीके से दूध बनाकर देंगे। दूध मसाला पाउडर 🥛🥛
सामग्री
बादाम - 250 ग्राम
पिस्ता - 150 ग्राम
काजू - 150 ग्राम
अखरोट - 50 ग्राम
सूखी अदरक पाउडर - 50 ग्राम
इलायची (हरी) - 20 ग्राम
केसर - 1 ग्राम (10-15 रेशे)
दालचीनी पाउडर - 20 ग्राम
जायफल पाउडर - 10 ग्राम
काली मिर्च पाउडर - 20 ग्राम
सफेद मिर्च पाउडर - 20 ग्राम
खसखस - 50 ग्राम
गोंद कतीरा (वैकल्पिक) - 30 ग्राम
चीनी या मिश्री - 200 ग्राम (स्वादानुसार)
विधि
सूखे मेवे भून लें - बादाम, पिस्ता, काजू, अखरोट और खसखस को धीमी आंच पर हल्का भून लें ताकि नमी निकल जाए और ठंडा होने दें।
पाउडर बना लें - सभी भुने हुए मेवों को मिक्सर में दरदरा पीस लें। अब इसमें इलायची, दालचीनी, जायफल, काली मिर्च, सफेद मिर्च और सोंठ पाउडर डालकर बारीक पीस लें। आखिर में केसर और गोंद कतीरा डालकर फिर से पीस लें।
स्टोर करें - तैयार मसाला पाउडर को एयरटाइट कंटेनर में भरकर रख लें, यह 3-4 महीने तक ताजा रहेगा।
कैसे इस्तेमाल करें - 1 कप गर्म दूध में 1-2 चम्मच मिल्क मसाला पाउडर डालकर मिक्स करके पी लें। इसे हलवा, खीर, कुल्फी या लड्डू में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
फायदे - हड्डियां मजबूत करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, सर्दी-खांसी से बचाता है, दिमाग तेज करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। अब घर पर हेल्दी और टेस्टी मिल्क मसाला पाउडर बनाएं और पूरे परिवार की सेहत का ख्याल रखें!
27/09/2025
काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।
यह सभी को नहीं मालूम है। खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।
जीवन के शतपथ होते हैं। 100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है। 94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।
अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये। आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।
अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।
गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है। यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।
अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है। अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।
विदा यात्री। तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।
आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी......
100 शुभ कर्मों की गणना धर्म और नैतिकता के कर्म-
1.सत्य बोलना
2.अहिंसा का पालन
3.चोरी न करना
4.लोभ से बचना
5.क्रोध पर नियंत्रण
6.क्षमा करना
7.दया भाव रखना
8.दूसरों की सहायता करना
9.दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)
10.गुरु की सेवा
11.माता-पिता का सम्मान
12.अतिथि सत्कार
13.धर्मग्रंथों का अध्ययन
14.वेदों और शास्त्रों का पाठ
15.तीर्थ यात्रा करना
16.यज्ञ और हवन करना
17.मंदिर में पूजा-अर्चना
18.पवित्र नदियों में स्नान
19.संयम और ब्रह्मचर्य का पालन
20.नियमित ध्यान और योग सामाजिक और पारिवारिक कर्म
21.परिवार का पालन-पोषण
22.बच्चों को अच्छी शिक्षा देना
23.गरीबों को भोजन देना
24.रोगियों की सेवा
25.अनाथों की सहायता
26.वृद्धों का सम्मान
27.समाज में शांति स्थापना
28.झूठे वाद-विवाद से बचना
29.दूसरों की निंदा न करना
30.सत्य और न्याय का समर्थन
31.परोपकार करना
32.सामाजिक कार्यों में भाग लेना
33.पर्यावरण की रक्षा
34.वृक्षारोपण करना
35.जल संरक्षण
36.पशु-पक्षियों की रक्षा
37.सामाजिक एकता को बढ़ावा देना
38.दूसरों को प्रेरित करना
39.समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान
40.धर्म के प्रचार में सहयोग आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म
41.नियमित जप करना
42.भगवान का स्मरण
43.प्राणायाम करना
44.आत्मचिंतन
45.मन की शुद्धि
46.इंद्रियों पर नियंत्रण
47.लालच से मुक्ति
48.मोह-माया से दूरी
49.सादा जीवन जीना
50.स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)
51.संतों का सान्निध्य
52.सत्संग में भाग लेना
53.भक्ति में लीन होना
54.कर्मफल भगवान को समर्पित करना
55.तृष्णा का त्याग
56.ईर्ष्या से बचना
57.शांति का प्रसार
58.आत्मविश्वास बनाए रखना
59.दूसरों के प्रति उदारता
60.सकारात्मक सोच रखना सेवा और दान के कर्म
61.भूखों को भोजन देना
62.नग्न को वस्त्र देना
63.बेघर को आश्रय देना
64.शिक्षा के लिए दान
65.चिकित्सा के लिए सहायता
66.धार्मिक स्थानों का निर्माण
67.गौ सेवा
68.पशुओं को चारा देना
69.जलाशयों की सफाई
70.रास्तों का निर्माण
71.यात्री निवास बनवाना
72.स्कूलों को सहायता
73.पुस्तकालय स्थापना
74.धार्मिक उत्सवों में सहयोग
75.गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन
76.वस्त्र दान
77.औषधि दान
78.विद्या दान
79.कन्या दान
80.भूमि दान, नैतिक और मानवीय कर्म
81.विश्वासघात न करना
82.वचन का पालन
83.कर्तव्यनिष्ठा
84.समय की प्रतिबद्धता
85.धैर्य रखना
86.दूसरों की भावनाओं का सम्मान
87.सत्य के लिए संघर्ष
88.अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना
89.दुखियों के आँसू पोंछना
90.बच्चों को नैतिक शिक्षा
91.प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
92.दूसरों को प्रोत्साहन
93.मन, वचन, कर्म से शुद्धता
94.जीवन में संतुलन बनाए रखना
विधि के अधीन 6 कर्म
95.हानि
96.लाभ
97.जीवन
98.मरण
99.यश
100.अपयश
25/04/2025
रोज एक हरा नारियल घर लाओ और उसको छीलने का औजार भी लाओ फिर अच्छे से छीलना सीखो , बच्चों को भी छीलना सिखाओ 👊✊
नारियल खुद भी पियो, बच्चों को भी पिलायो 🙏
मेरे गांव के घर के आस-पास भी बहुत सी हरि हरि जहरीली झाड़ियां बढ़ गई है, उसको भी काटने के काम आएगा और वैसे भी गर्मी भी बहुत बढ़ रही हैँ देश में 😎
हर-हर महादेव 💪
23/08/2024
हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे। थक हार कर वापिस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है। 😊
1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।
2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।
3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।
4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना।
5. जयादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।
6. क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।
7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।
8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना....
9. गाँव, जंगल, से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना।
इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।
आभार स्वदेशी ❤️🙏