23/08/2026
15,000 किलोमीटर दूर से जुड़ती दो जनजातीय आवाज़ें
रविवार की रात नानकमता पब्लिक स्कूल के थारू जनजाति के कुछ बच्चे डिनर करने के बाद अपने मोबाइल फोन खोल रहे थे। उनके मोबाइल में एक लिंक था, जिसे उनके साथी ने साझा किया था।
दूसरी ओर, लगभग 15,000 किलोमीटर दूर मेक्सिको के कोको जनजातीय समुदाय के बच्चे रविवार की सुबह नींद से उठकर इस बातचीत में जुड़ रहे थे।
एक तरफ नानकमता में बच्चे डिनर करके सोने की तैयारी कर रहे थे। दूसरी तरफ मेक्सिको में सुबह की शुरुआत हो रही थी।
पिछले तीन वर्षों से दोनों समुदाय लगातार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आज की बैठक में लगभग 30 लोग शामिल हुए। NPS से कई नए साथी भी पहली बार जुड़े। इसलिए शुरुआत में परिचय का दौर थोड़ा लंबा चला। नए साथियों को बताया गया कि पिछले तीन वर्षों में यह यात्रा कैसे आगे बढ़ी है।
इस दौरान थारू बच्चों ने अपने समुदाय की फिल्म और टोकरी बुनने की परंपरा के बारे में बताया। दिल्ली में हुई प्रदर्शनी और इस समय मेक्सिको सिटी में चल रही प्रदर्शनी का भी ज़िक्र हुआ, जो इस साल के अंत तक चलेगी।
बातचीत सिर्फ अपने-अपने समुदायों के बारे में जानने तक सीमित नहीं रही। दोनों तरफ से यह कोशिश भी है कि 2027 में मेक्सिको से कुछ लोग भारत आएँ और NPS से एक शिक्षक और दो बच्चे मेक्सिको जाएँ।
भारत से फातिमा जी और मेक्सिको से Ines ने कार्यक्रम का संचालन किया।
अगली बैठक में किन विषयों पर बात की जा सकती है, इस पर भी दोनों तरफ के स्टूडेंट्स ने चर्चा की। कुछ स्टूडेंट्स ने folk songs और वीडियो डॉक्यूमेंटेशन जैसे विषयों पर काम करने की बात रखी।
आज जिस तरह से स्टूडेंट्स ने बातचीत में हिस्सा लिया, वह हौसला बढ़ाने वाला था।
शायद अगली मुलाकात में हम folk कहानी पर साथ मिलकर काम करें।
दो समुदाय। दो देश। अलग-अलग समय। लेकिन एक साझा सीखने की यात्रा।