27/09/2017
आप को हर समय सफलता की उम्मीद होना निराशा का एक बड़ा कारण है। आप जो नौकरी में, रिश्तों में, आश्वासनों में, निश्चितता चाहते हैं, असफलता उसका एक आयाम है। जैसे सफलता याद रखने चाहते हैं, वैसे ही आप को कुछ असफलताओं को भी याद रखना चाहिए।
जीवन में असफलता, हमें सफलता से ज़यादा मिलती है। कौन ऐसा 'सफल' व्यक्ति है जिसने असफलता और तिरस्कार नहीं झेला होगा! जिनको हम दुनिया के सफल व्यक्ति मानते हैं, उनकी कहानी भी रिजेक्शन और असफल प्रयास की बुनियाद पर खड़ी होती है। फिल्म इंडस्ट्रीज से लेकर प्रशासनिक सेवा में सफल रहे लोगों ने असफ़लता का सामना किया है।
सदी के महान नायक, अमिताभ बच्चन जिन दिनों मुंबई (बम्बई) की फ़िल्मी दुनिया में काम ढूंढ रहे थे, उनकी आवाज रेडियो के लिए 'उपयुक्त 'नहीं पाई गई थी। जब अमिताभ बच्चन ने एबीसीएल बनाया तो उनकी उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली और फिर 'कौन बनेगा करोड़पति' से वह टीवी की दुनिया में आये और लोगों के दिलों पर छा गए। ऐसे ही प्रतिभावान गायक कैलाश खेर की आवाज, शुरुआत के दिनों में, फिल्मों में गाने के लायक नहीं समझी गई थी। मोहमद रफ़ी को भी स्टेशन पर रातें गुज़ारनी पड़ी थीं। सिविल सेवा की परीक्षा में इंटरव्यू देने के बाद भी सफल नहीं हुए हमारे कुछ दोस्तों ने, दूसरे छात्रों की मदद की, उनको गाइड किया और उनकी सफलता में अपनी सफलता देखी।
हमें जब भी कोई बड़ी निराशा होती है, हम सोचते हैं ऐसा हमारे ही साथ हुआ है, जबकि ऐसी बात नहीं है। आप लोगों के जीवन में झांक कर देखें, जो लोग आपको ज़्यादा खुश दिखते हैं, उनसे बात कर के हमको पता चलेगा, उन्होंने कितने पापड़ बेले हैं! तो ये रिजेक्शन, हम को और रचनात्मक होने, ऊर्जावान होने और बड़े कैनवास पर, काम करने के लिए प्रेरित करता है। जिसने असफलता को महूसस किया है, जो रिजेक्शन को याद रखता है, वो अक्सर दूसरों की इज्जत और मदद ज्यादा करता है। दूसरों को अपना दुःख बताने की बजाए, उनकी बातें सुनता है, हौसला देता है कि- 'सब ठीक हो जायेगा'! हर एक चीज में कुछ सकारात्मक ढूंढने से नकारत्मकता से बचा जा सकता है।
जोहान्स हौसोफोर, प्रिंसटोन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान और पब्लिक अफेयर्स के प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपनी कुछ असफलताओं का जिक्र, अपनी उपलब्धियों के साथ किया। उनका 'सी वी ऑफ़ फेलियर' काफी चर्चा में आया। उन्होंने सफलता और असफलता के बीच एक संतुलन बनाने के अलावा, लोगों को एक दूसरा नजरिया देने के क्रम में अपने सीवी में, एक क्रम से असफलता और रिजेक्शन को दर्ज़ किया। ऐसा उन्होंने इसलिए किया कि लोग समझ सकें कि उनको भी आसानी से कोई सफलता नहीं मिली है।
असफलता से लोग गंभीर निराशा में चले जाते हैं। सफल लोगों की असफलता और रिजेक्शन की कहानी, दूसरों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। एक ऐसे समय में जब कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र, अपनी एक असफलता और असफल होने की अशंका मात्र से हताशा के शिकार हो रहे हैं उनके शिक्षक उनके लिए प्रेरणा बन सकतें हैं। एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी की अध्यापक, मेलानी स्टेफन ने सुझाव दिया कि आपको, अपने रिजेक्टेड एप्पलीकेशन्स के रिकार्ड्स रखने चाहिए, इससे दूसरों को निराशा से उबरने में मदद मिलेगी।
राजनीतिक जीवन में शायद सबसे अधिक रिजेक्शन और असफलता मिलती है। अब्राहम लिंकन से लेकर डॉ. अम्बेडकर, लोहिया जी तक ने रिजेक्शन का सामना किया है और संघर्ष जारी रखा। इतिहास में आज उन लोगों की विशेष जगह है। राजनीतिक कार्यकर्ता का धैर्य गज़ब का होता है, उनको एक पद और चुनाव के लिए 30-40 साल तक इंतज़ार करना पड़ता है फिर भी ज़रूरी नहीं उनको कि उनको वो पद मिले। राजनीतिक कार्यकर्ताओं से सीखना चाहिये कि रिजेक्शन से कैसे बाहर आएं, असफलता से कैसे सीख लें। किसी ने ठीक ही कहा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, लहरों से जो डरे, वो नौका पार नहीं होती।
तो चलिए, अपनी कुछ असफलता को जग ज़ाहिर करें, दूसरे युवा लोग, जो आप को सफल समझते हैं, उनको लड़ने और संघर्ष करने की प्रेरणा मिलेगी। रिजेक्शन को स्वीकार करें, गले लगाएँ क्योंकि सफलता के शिखर पर भी कुछ कमी रह जाती है और एक असफलता भी जीवन को कुछ कदम आगे बढ़ा देती है। दुनिया में ऐसे उदहारण भरे पड़े हैं जिन्होंने, कुछ असफलताओं के बावजूद, बुलंदियों को छुआ है। आप भी मुट्ठी तान के खड़े हो जाइये, दुनिया आप का लोहा मानेगी।
तो चलिए कुछ असफलताओं को भी याद करें और दूसरों को अपने रिजेक्शन की कहानी बताकर प्रेरित करें, लेटस सेलिब्रेट फेल्योर!
डॉ.ओ.पी.राईका
मोटीवेटर स्पीकर
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