21/03/2015
छोटी सी बिल्डिंग के आठ कमरों में संचालित यह विद्यालय मुझे दिनांक १६ मई २०१३ को जोइनिंग से मिला , छोटा सा और बहुत से अनावश्यक कागजो के ढेर से अटा हुआ छोटा सा office मुझे सोचने पर मजबूर करता था की ऐसा तो नहीं होता होगा HM का office.
दो दिनों बाद ही उन अनावश्यक कागजो की होली जलाई तो कुछ जगह निकल आई . की आ बैठ और कुछ कर संस्था के लिए .
अनुशासन से अनभिग्य बालक अपनी मस्ती को मेरे आने से दबाने का प्रयास कर रहे थे . पुचकारने पर बड़े ही प्यार से बोले ऐसा तो हमे कभी बताया ही नहीं , कभी पीरियड बजा ही नहीं , छुट्टी की घंटी कभी कभार जरुर बजती थी.
चलो कुछ नियम बनाये हमने की ऐसा ऐसा करोगे और सुबह सुबह प्रार्थना के समय पर आ जाओगे तो हम नहीं डांटेंगे . 3 दिन बाद ही किराने की दुकान वाला उलाहना दे ही गया की हेडमास्टर साहिब आपके आने के बाद दिन की ग्राहकी टूट ही गई हें .
दिसम्बर में पोषाहार स्कूल में ही बनेगा के आदेश ने हमारे office को पोषाहार कक्ष में तब्दील हो गया जिसे हाल ही हमने कुबेर कक्ष नाम दे दिया,
अब हमने दुसरे कमरे में office के साथ ही लिपिक को भी बिठा लिया .बड़े कमरे को हमने परीक्षा , खेलकूद स्टाफ रूम लाइब्रेरी peon की साफ सफाई की सामग्री वाला कमरा बना दिया. 4 कक्षा अन्दर 1 बाहर बैठने लग गई.
पिछले 2 सत्रों से जीरो रिजल्ट को सुधरने के काफी प्रयासों में सफलता २१.८८ तक ही पहुची.
समीक्षा की तो पाया क्रम्मोनती वर्ष से ही यहां विषया ध्यापको की नियुक्ति नही होने से विद्यार्थियों का शेक्षिक नेतिक स्तर कमजोर ही रहा . जिसे सम्मानजनक स्तर तक ले जाने का प्रयास कररहे हें. ये लो गणित का टीचर भी ट्रान्सफर कराके चला गया .कह गया "इन को नही पढाया जा सकता "
में कब इतना जल्दी हार मान लू . मेने भी तो चलना सिखा गिरा तभी तो उठा.
इन बच्चो को मौका तो मिले ............संसाधन तो मिले . जब से स्कूल खुला हें फर्श पर ही बैठ रहें हें . इस ठेठ ग्रामीण इलाके में अभिभावक भी 2 जून की रोटी कमाते हें बच्चो को पढने भेजते हें ...इतना ही खूब हें मेरे लिए .
संसाधनो के लिए प्रयास जारी हें
जमीन तो सरकार ने दे दी हें बिल्डिंग के लिए भी धन आएगा .....यहा भी हरियाली छाएगी ..................ये भी कदम से कदम मिला पाएंगे,
यही तो मुझे करना हें .