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07/04/2018

#शीश_कटे_पर_धड़_लड़े
#मैं_रखां_रजपूती_शान

जुंझार रायमलोत कल्ला जी ...

मुगलो का किसी भी राज्य पर आक्रमण करने का एक प्रमुख तरीका था, जिसे मुगल एक हथियार के रूप में उपयोग में लेते थे । वह हथियार था, की मुगल राजपूत कन्याओं से विवाह का प्रस्ताव रखते, जिसे स्वाभिमानी राजपूत नकार देते, कुछ राजपूत मुगलो को बेज्जत कर उस प्रस्ताव को ठुकराते , तो कुछ सम्मानपूर्वक उस प्रस्ताव को वापस कर देते, दोनो ही परिस्थिति में युद्ध अवश्य होता ।

ऐसे ही एक वीर योद्धा बूंदी के राजा भोज थे । अकबर का भरा दरबार लगा था । बातों ही बातों में अकबर ने बूंदी के राजा भोज से कहा " महाराज भोज , अगर आपकी छोटी राजकुमारी का विवाह हमारे पुत्र सलीम के साथ हो जाये, तो कैसा रहे ? मैं तो चाहता हूं हमारी मित्रता अब रिश्तेदारी में बदल जाये ।

राजा भोज के लिए यह अप्रत्याशित था । एक मल्लेछ को अपनी बेटी ब्याहने का विचार तो उनके जीवन मे कभी नही आया, लेकिन उस समय कहते भी तो क्या कहते ? कोई और होता, तो राजा भोज उसकी जीभ काट लेते, लेकिन उस समय अकबर एशिया की सबसे बड़ी शक्ति था, ओर दूसरी बात यह भी थी, की राजा भोज मुगल दरबार मे थे, जहां राजाओ की छलपूर्वक हत्या आम बात थी । राजा भोज सन्न हो गए, ओर अकबर ने भी अपना सारा ध्यान राजा भोज के जवाब सुनने पर ही केंद्रित किया ।

राजा भोज ने अपनी सहायता के लिए, वहां पर बैठे सभी राजाओ की ओर देखा , तब राजा भोज की दृष्टि कल्ला रायमलोत राठौड़ पर जाकर टिक गई, रायमलोत कल्ला जी निर्भीक तरीके से अकबर के दरबार मे अपनी मूंछो पर ताव दे रहे थे ।

राजा भोज को उत्तर मिल चुका था, उन्होंने अकबर से कहा - जहाँपनाह मेरी बेटी की तो सगाई हो चुकी है ।

अकबर ने अकड़कर पूछा, " किसके साथ " ??

तभी रायमलोत कल्ला जी मूंछो पर ताव देते हुए बोले - जहाँपनाह मेरे साथ । बूंदी की छोटी राजकुमारी मेरी होने वाली धर्मपत्नी है ।

अकबर समझ गया कि यह सारी कहानी अभी गढ़ी गयी है । फिर भी चतुर लोमड़ी अकबर ने बात टालते हुए कहा, अच्छा यह बात है, तो ठीक है । मुझे पता नही था । लेकिन सारे दरबारी हतप्रभ थे । दरबार खत्म होने के बाद वे रायमलोत कल्ला जी को समझाने लगे, बादशाह के सामने मूंछो पर ताव मत दिया करो । बादशाह आपसे बहुत नाराज है । लेकिन कल्ला जी को इन सब बातों की कोई परवाह नही थी । वे दूसरे दिन केसरिया बाना पहन ही राजदरबार पहुंचे , मूंछो पर ताव पिछले दिन से भी ज़्यादा था । अकबर भी सोचने लगा " ऐसा वीर अगर बिगड़ जाए, तो प्रलय मचा दे । उसी दिन बिना विश्राम किये कल्ला जी बूंदी की राजकुमारी को ब्याहने पहुंच गए ओर विवाह संपन्न हुआ ।

आगरा में हुई घटना के बाद राजकुमारी यह तो समझ गयी थी, की उनका सुहाग ज़्यादा दिन चलने वाला तो नही, कल्ला जी के आगरा जाते समय राजकुमारी ने कहा - प्राणनाथ , अभी तो आप हमें अकेले छोड़कर जा रहे है, लेकिन स्वर्ग में साथ लेजाना मत भूलना ।

कल्ला जी एक क्षण के लिए राजकुमारी की ओर देखा, ओर वहां से यह कहकर निकल गए , ऐसा ही होगा ।

अब तो प्रत्येक दिन कल्ला जी केसरिया बाना पहन ही मुगल दरबार मे पहुंचते । एक दिन किसी मुगल सेनापति ने कल्ला जी की मज़ाक उड़ा दी, " कल्ला जी, यह क्या स्वांग रचा रखा है, अब तो यह केसरिया बाना उतार दीजिये ।

कल्ला जी ने उस सेनापति से कहा " यह केसरिया तो अब मेरी मृत्यु के साथ ही उतरेगा । ओर तेरे में हिम्मत है, तो तू उतार दे । "

बातों ही बातों में बात ज़्यादा बढ़ गयी, ओर कल्ला जी ने मुगल सेनापति का सिर धड़ से अलग कर दिया । मुगल सेनापति को मारकर वे बागी बन बीकानेर आ गए । जहां उनकी भेंट अकबर के दरबार के कवि पृथ्वीराज से हुई, जिन्हें पीथळ भी कहा जाता है ।

कल्ला जी ने पीथळ से विनती की, की वह उनकी मृत्यु पर भी कोई मरसिया कविता लिखें, इस पर पीथळ ने कहा मरसिया कविता तो मरने के बाद लिखी जाती है, तुम तो अभी जिंदा हो ।

इसपर कल्ला जी ने कहा, में आपको वचन देता हूँ कविवर, जिस तरह आप मेरी मृत्यु लिखेंगे, उसी तरह में रणभूमि पर लड़ता लड़ता वीरगति को प्राप्त करूँगा । उनकी बहुत विनती के बाद पीथळ ने उनके जिंदा रहते ही मरसिया गीत बना दिया, जिसे गुनगुनाते कल्ला जी सिवान की तरफ रवाना हो गए ।

ऊस समय सुल्तान की फौज देवड़ा सिरोही पर कब्जा करने के निकली हुई थी । देवड़ा के राजा कल्ला जी के मामा लगते थे । यह देख कल्ला जी बीच रास्ते मे ही अकबर की सेना से भिड़ गए, ओर चुन चुन कर मुगलो को मारना शुरू किया । अकबर के सारे अफसर कल्ला जी ने बीच रास्ते मे ही मार गिराए ।

उसके बाद रायमलोत कल्ला जी ने आर-पार की ठानी, ओर सीधे मुगल सैनिको से जा भिड़े, जहां लड़ते उनका शीश धड़ से अलग हो गया, लेकिन मुगलो का संघार करना बंद नही हुआ । लड़ते लड़ते ही उनका धड़ अपनी रानीके पास पहुंच गया, जहां स्वर्ग साथ मे जाने का वचन था । जब हाड़ी रानी ने कल्ला जी के शरीर पर गंगाजल के छींटे डाले, तब जाकर वह धड़ शांत हुआ । उसके बाद हाड़ी रानी भी सती हुई , ओर दोनो वीर ओर वीरांगना से साथ साथ स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया ।

02/04/2018

A man who always think and work for nation
Ajit Kumar Doval

02/04/2018
02/04/2018

We used to say that politicians never send their children to join military but no more.
Meet BJP MP from Haridwar & Former CM of Uttarakhand Shri Ramesh Pokhriyal Nishank. His daughter Dr. Shreyasi Nishank has joined Army. She had a job offer abroad but she chose to serve the nation instead. 🙏🙏🙏

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31/03/2018

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केंद्रीय विश्वविधालय अजमेर में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि: 2 अप्रैल।
For more information go to Link given below:
http://www.curaj.ac.in/default.aspx?PageId=233

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Rajaldesar Th Ratangarh Churu
Udaipur

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