Bheru Lal Vadera Mlsu

Bheru Lal Vadera Mlsu सत्य मेव जयते..... Udaipur

📝ग्राम पंचायत के खर्चे का विवरणसेवा में, लोक सूचना अधिकारी(विभाग का नाम)(विभाग का पता)विषय : सूचना के अधिकार अधिनियम, 20...
02/10/2022

📝ग्राम पंचायत के खर्चे का विवरण

सेवा में,
लोक सूचना अधिकारी
(विभाग का नाम)
(विभाग का पता)

विषय : सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन।

महोदय,.................ग्राम पंचायत के संबध् में निम्नलिखित विवरण प्रदान करे:

1. वर्ष.............के मध्य..................ग्राम पंचायत को किन-किन मदों/याजनाओं के तहत कितनी राशि आंवटित की गई? आवंटन का वर्षवारा ब्यौरा दें।

2. उपरोक्त ग्राम पंचायत द्वारा इस दौरान कराए गए सभी कार्यो से सम्बंधित निम्नलिखित विवरण दें:
क. कार्य का नाम
ख. कार्य का संक्षिप्त विवरण
ग. कार्य के लिए स्वीकृत राशि
घ. कार्य स्वीकृत होने की तिथि
ड. कार्य समाप्त होने की तिथि अथवा चालू कार्य की स्थिति
च. कार्य कराने वाली एजेंसी का नाम
छ. कार्य शुरू होने की तिथि
ज. कार्य समाप्त होने की तिथि
झ. कार्य के लिए ठेका किस दर पर दिया गया?
×ा. कितनी राशि का भुगतान किया जा चुका है
ट. कार्य के रेखाचित्र की प्रमाणित प्रति
ठ. कार्य कराने का निर्णय कब और किस आधार पर लिया गया? इससे सम्बंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति भी उपलब्ध् कराएं।
ड. उन अधिकारियों/कर्मचारियों का नाम व पद बताएं जिहोंने कार्य का निरीक्षण किया और भुगतान की स्वीकृति दी।
ढ. कार्य के वर्क ऑर्डर रजिस्टर एवं लेबर रजिस्टर/मस्टर रोल की प्रति उपलब्ध् कराएं।

3. उपरोक्त ग्राम पंचायत में वर्ष........के दौरान कार्यो/योजनाओं पर होने वाले खर्चो की जानकारी निम्न विवरणों के साथ दें:
क. कार्य का नाम जिसके लिए खर्च किया गया
ख. कार्य का संक्षिप्त विवरण
ग. कार्य के लिए स्वीकृत राशि
घ. कार्य कराने वाली एजेंसी का नाम
ड. कार्य शुरू होने की तिथि
च. कार्य के रेखाचित्र की प्रमाणित प्रति,
ख.कार्य कराने का निर्णय कब और किस आधार पर लिया गया? इससे सम्बंधित दस्तावेजों की प्रति भी उपलब्ध् कराएं।

मैं आवेदन फीस के रूप में 10रू अलग से जमा कर रहा /रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्ड धारी हूं इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल. कार्ड नं..............है।

यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से सम्बंधित नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी को पांच दिनों के समयाविध् के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।

भवदीय

नाम:
पता:
फोन नं:

संलग्नक:
(यदि कुछ हो

🛡️जानें ग्राम पंचायत और उसके अधिकारदेश की करीब 70 फीसदी आबादी गाँवों में रहती है और पूरे देश में दो लाख 39 हजार ग्राम पं...
17/02/2022

🛡️जानें ग्राम पंचायत और उसके अधिकार

देश की करीब 70 फीसदी आबादी गाँवों में रहती है और पूरे देश में दो लाख 39 हजार ग्राम पंचायतें हैं। त्रीस्तरीय पंचायत व्यस्था लागू होने के बाद पंचायतों को लाखों रुपए का फंड सालाना दिया जा रहा है।

ग्राम पंचायतों में विकास कार्य की जिम्मेदारी प्रधान और पंचों की होती है। इसके लिए हर पांच साल में ग्राम प्रधान का चुनाव होता है, लेकिन ग्रामीण जनता को अपने अधिकारों और ग्राम पंचायत के नियमों के बारे में पता नहीं होता। बता रहा है गाँव कनेक्शन नेटवर्क...

👉🏻क्या होती है ग्राम पंचायत ?👇🏻
किसी भी ग्रामसभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना आवश्यक है। हर गाँव में एक ग्राम प्रधान होता है। जिसको सरपंच या मुखिया भी कहते हैं। 1000 तक की आबादी वाले गाँवों में 10 ग्राम पंचायत सदस्य, 2000 तक 11 तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य हाेने चाहिए। ग्राम सभा की बैठक साल में दो बार होनी जरूरी है। जिसकी सूचना 15 दिन पहले नोटिस से देनी होती है। ग्रामसभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है। बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति जरूरी होती है।

ग्राम पंचायत के 1/3 सदस्य किसी भी समय हस्ताक्षर करके लिखित रूप से यदि बैठक बुलाने की मांग करते हैं, तो 15 दिनों के अंदर ग्राम प्रधान को बैठक आयोजित करनी होगी। ग्राम पंचायत के सदस्यों के द्वारा अपने में से एक उप प्रधान का निर्वाचन किया जाता है। यदि उप प्रधान का निर्वाचन नहीं किया जा सका हो तो नियत अधिकारी किसी सदस्य को उप प्रधान नामित कर सकता है।

🔜ग्राम पंचायत की समितियां और उनके कार्य

1. नियोजन एवं विकास समिति
सदस्य :* सभापति, प्रधान, छह अन्य सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य अनिवार्य होता है।

समिति के कार्य: ग्राम पंचायत की योजना का निर्माण करना, कृषि, पशुपालन और ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का संचालन करना।

2. निर्माण कार्य समिति
सदस्य: सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित सदस्य, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की ही तरह) समिति के कार्य: समस्त निर्माण कार्य करना तथा गुणवत्ता निश्चित करना।

3. शिक्षा समिति
सदस्य: सभापति, उप-प्रधान, छह अन्य सदस्य, (आरक्षण उपर्युक्त की भांति) प्रधानाध्यापक सहयोजित, अभिवाहक-सहयोजित करना।

समिति के कार्य: प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा तथा साक्षरता आदि सम्बंधी कार्यों को देखना।

4. प्रशासनिक समिति
सदस्य: सभापति-प्रधान, छह अन्य सदस्य आरक्षण (ऊपर की तरह)

समिति के कार्य: कमियों-खामियों को देखना।

5. स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति
सदस्य :* सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित सदस्य, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की तरह)

समिति के कार्य: चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण सम्बंधी कार्य और समाज कल्याण योजनाओं का संचालन, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की उन्नति एवं संरक्षण।

6. जल प्रबंधन समिति
सदस्य: सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की तरह) प्रत्येक राजकीय नलकूप के कमांड एरिया में से उपभोक्ता सहयोजित

*समिति के कार्य :* राजकीय नलकूपों का संचालन पेयजल सम्बंधी कार्य देखना।

👉🏻ग्राम पंचायत के कार्य👇🏻
कृषि संबंधी कार्य
ग्राम्य विकास संबंधी कार्य
प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय व अनौपचारिक शिक्षा के कार्य
युवा कल्याण सम्बंधी कार्य
राजकीय नलकूपों की मरम्मत व रखरखाव
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सम्बंधी कार्य
महिला एवं बाल विकास सम्बंधी कार्य
पशुधन विकास सम्बंधी कार्य
समस्त प्रकार की पेंशन को स्वीकृत करने व वितरण का कार्य
समस्त प्रकार की छात्रवृत्तियों को स्वीकृति करने व वितरण का कार्य
राशन की दुकान का आवंटन व निरस्तीकरण
पंचायती राज सम्बंधी ग्राम्यस्तरीय कार्य आदि।
मनरेगा भी प्रधान के अंतर्गत आता है।

👉🏻ग्राम न्यायालय......
12 अप्रैल 2007 को केंद्र सरकार के एक निर्णय के अनुसार ग्रामीण भारत के निवासियों को पंचायत स्तर पर ही न्याय दिलाने के लिए प्रत्येक पंचायत स्तर पर एक ग्राम न्यायालय की स्थापना की जाएगी। इस पर प्रत्येक वर्ष 325 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें तीन वर्ष तक इन न्यायालयों पर आने वाला खर्च वहन करेंगी। ग्राम न्यायालयों की स्थापना से अन्य अदालतों में मुकदमों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

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(1) इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (उपबन्धों का अनुसूचित क्षेत्रों में उनके लागू होने के सम्बन्ध में उपान्तरण) नि...
14/02/2022

(1) इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (उपबन्धों का अनुसूचित क्षेत्रों में उनके लागू होने के सम्बन्ध में उपान्तरण) नियम, 2011 है ।

(2) इनका प्रसार किसी नगरपालिका द्वारा प्रशासित क्षेत्रों को छोड़कर, संविधान के अनुच्छेद 244 के खण्ड (1) में यथा-निर्दिष्ट राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों में होगा ।

🔜11अगस्त‚ 2021 को राज्यसभा द्वारा संविधान (127 वां संशोधन )विधेयक‚ 2021 पारित किया गया। ... यह विधेयक राज्यों एवं केन्द्...
13/02/2022

🔜11अगस्त‚ 2021 को राज्यसभा द्वारा संविधान (127 वां संशोधन )विधेयक‚ 2021 पारित किया गया। ... यह विधेयक राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची बनाने का अधिकार देता है। यह सूची कानून के तहत बनाई जाएगी और यह केन्द्रीय सूची से अलग हो सकती है।

🔜वर्ष 1993 में 73वें व 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से भारत में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर), पंचायत समिति (मध्यवर्ती स्तर पर) और ज़िला परिषद (ज़िला स्तर पर) शामिल हैं।

परन्तु 73वें संविधान संशोधन के अनुच्छेद 243-घ के द्वारा पंचायती राज व्यवस्था (पी आर एस) के सभी तीन स्तरों पर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति तथा इन समूहों की महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है । अनुच्छेद 243-ण के अनुसार हर पाँच वर्ष में पंचायत के नियमित चुनाव कराए जाने आवश्यक है।

26 जनवरी 1950 को भारत का जो संबिधान लागू हुआ उसमे दो सरकारों का प्रावधान किया गया। संविधान के भाग 5 में संघ अर्थात केंद्र सरकार का विवरण तथा भाग 6 में राज्य सरकार का विवरण है। इस प्रकार पहली सरकार केंद्र सरकार तथा दूसरी सरकार राज्य सरकार है। एक लम्बे समय अर्थात 1994 तक इन्ही दोनों सरकारों के दवारा देश का शासन चलता रहा। वर्ष 1992 में 73 वें संविधान संशोधन के द्वारा एक और सरकार का प्रावधान किया गया। संविधान के भाग 9 के अंतर्गत पंचायत व 9 A के अंतर्गत नगरपालिका को Self-Government अर्थात अपनी सरकार का प्रावधान किया गया। नीति निर्देशक तत्व के अंतर्गत अनुच्छेद 40 में भविष्य की जो संकल्पना की गई थी ,एक तरह से उसे ही समय और परिस्थिति की मांग एवं दबाव के फलस्वरूप मूर्तरूप देना पड़ा।

इस प्रकार पंचायतों को Self- Government अर्थात अपनी सरकार के रूप में पूर्ण संवैधानिक दर्जा देकर देश में नए सिरे से तीसरी सरकार की स्थापना की गई। इस अपनी सरकार की आवश्यकता और मांग आजादी से पहले व आजादी के बाद देश के सभी प्रमुख राष्ट्रनिर्माताओ एवं सामाजिक विचारकों द्वारा बराबर की जाती रही है। 1992 में 73 वें संविधान संशोधन के द्वारा ही इसे पूरा करना अब संभव हुआ है ।

लेकिन जैसा कि आप सब अवगत है कि इस तीसरी सरकार की स्थापना के लगभग 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी वह सही अर्थो में सरकार तो बन नहीं पाई बल्कि तथाकथित विकास की बदनाम एजेंसी या एजेंट के रूप में अधिक जानी जा रही है। यह एक और संवैधानिक संस्था बनने की बजाय एक व्यक्ति का संगठन बनकर रह गई है। इसके लिए जहाँ एक तरफ कुछ अधिनियम गत कमियां है वही दूसरी ओर यह आजतक सामान्यजन के विचार व भाव में अपनी सरकार का स्थान नहीं ले पाई है। जिसके चलते लोगो का कोई जुड़ाव तथा रूचि इसके प्रति नहीं बन पाई।

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