21/06/2025
आज दिनांक 21 जून 2025 को राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई सह रेड रिबन क्लब अनूपलाल यादव महाविद्यालय त्रिवेणीगंज,सुपौल,बिहार के तत्वाधान में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के सचिव श्री कपलेश्वर यादव के संरक्षण में एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी विद्यानंद यादव द्वारा योग शिविर का आयोजन किया गया।
अनुमंडल पदाधिकारी त्रिवेणीगंज अभिषेक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में तथा डीसीएलआर त्रिवेणीगंज संस्कार रंजन,बी डी ओ त्रिवेणीगंज अभिनव भारती, बीपीआरओ त्रिवेणीगंज मनीष कुमार भी योग शिविर में सम्मिलित हुए।
योग प्रशिक्षिका रितंभरा भारती, केशव कुणाल, तमन्ना आर्या द्वारा ॐ(ओम) एवं गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुरूआत किया गया। योगाभ्यास में योग प्रोटोकॉल के अनुसार ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन,अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, दंडासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्धउष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशकासान,मंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन,सेतुबंध आसन, उत्तानपाद आसन,अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन, शवासन, कपालभाति, अनुलोम विलोम प्राणायाम, शीतली प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास तथा अन्य सूक्ष्म व्यायाम एवं प्राणायाम करवाया गया।उनके द्वारा विस्तार पूर्वक योग के महत्व को बताया गया।उन्होंने निरोगी काया के लिए एकमात्र उपाय योग बताये।उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नियमित योगाभ्यास को आवश्यक बताये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी त्रिवेणीगंज ने उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मतदान और योग के महत्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाले। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त लोकतंत्र की नींव होते हैं और योग न केवल हमारे शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने सभी युवाओं से अपील की कि वे न केवल स्वयं मतदान करें, बल्कि दूसरों को भी जागरूक करें एवं मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु प्रेरित करें। योग दिवस के अवसर पर मतदान जैसे लोकतांत्रिक दायित्व को जोड़कर समाज में एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उनके प्रेरणादायी वक्तव्य ने उपस्थित सभी लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग और सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किये।
प्रो.अशोक कुमार ने बताये कि किसी भी राष्ट्र का विकास व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। योग से शरीर और चित्त दोनों शुद्ध होता है।सभी व्यक्ति सुख शांति के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। वास्तविक सुख तो योग से ही प्राप्त होता है।इसलिए कहा गया है।"योग:कर्मसु कौशलम्"।योग: चित्तवृत्ति निरोध:।योग का लोगों के शरीर एवं मानसिक विकास में अहम भूमिका है।योग से शरीर का रोग निरोधक क्षमता बढ़ता है। सभी लोगों के लिए योग आवश्यक है।इसलिए वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का थीम है-"योगा फॉर वन अर्थ: वन हेल्थ"-एक पृथ्वी:एक स्वास्थ्य के लिए योग।एनएसएस के स्वयंसेवकों को चाहिए कि जो लोग योग का महत्व नहीं समझते हैं,उसे योग के गुणों से अवगत करवाएं तथा स्वयं और समाज के लिए स्वयं के अलावा अन्य लोगों को भी नियमित योग करने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम पदाधिकारी विद्यानंद यादव ने बताया योग मन एवं शरीर सामंजस के लिए एक परिवर्तनकारी अभ्यास है,जो विचार और क्रिया के बीच संतुलन स्थापित कर शांति का प्रतिनिधित्व करता है। यह शरीर मन एवं आत्मा को एकीकृत कर व्यस्ततम जीवन में शांति लाता है।महिलाओं के अनेक बीमारी में योगाभ्यास लाभकारी है।राष्ट्र के विकास के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना आवश्यक है।योग सभी के लिए समग्र कल्याण हेतु भारत में विकसित शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है। योगाभ्यास में शारीरिक व्यायाम जिसे आसन कहा जाता है,जिसमें स्वास तकनीक और ध्यान शामिल है।योग मानव शरीर और आत्मा के बीच समन्वय स्थापित करने वाली एक प्रक्रिया है।महर्षि पतंजलि को योग का जनक कहा जाता है।महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग से मोक्ष की प्राप्ति होती है।अष्टांग योग के समाधि से प्राप्त निर्विकल्प और सविकल्प ज्ञान,ज्ञान की चरम अवस्था है, जिसके लिए संसार के सभी मानव प्रयत्नशील रहते हैं।योग की महत्ता को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र सभा द्वारा 11 दिसंबर 2014 को प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे बड़ा दिन होता है, जिसे हम लोग ग्रीष्म संक्रांति कहते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है।उक्त समय आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम होता है। इन्हीं कारणों से संपूर्ण विश्व में 21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। तरह-तरह की व्याधियों से बचने एवं मन को संयमित कर झंझट फसाद से बचने के लिए संपूर्ण विश्व में योग आवश्यक है। कहा भी गया है समत्वम योग उच्यते अर्थात सर्वत्र योग से सुख और शांति ही मिलती है जो समता की स्थिति है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक गण प्रो.अशोक कुमार, डॉ हेमंत कुमार,प्रो.प्रदीप प्रकाश,प्रो.अरुण कुमार, प्रो. महेश कुमार सराफ, डॉ. सदानंद यादव, प्रो.अरविंद कुमार राय,प्रो.गंगा प्रसाद साह,तृतीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी शंभू यादव, द्वितीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी पूनम, सुरेंद्र कुमार, भूषण कुमार, गगन कुमार, रंजन कुमार, अशोक कुमार, बालकिशोर कुमार, मनोज कुमार, हीरेंद्र कुमार, केशव कुणाल, तमन्ना आर्या,अनिका शर्मा, ईशा कुमारी, दिव्या भारती, अनुप्रिया कुमारी, शिल्पी ज्योति, चुनचुन कुमारी, आस्था कुमारी, प्रियांशु कुमारी, रंजीत, अजय, अनुपम, पिंटू तथा अन्य,द्वितीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. कुमारी पूनम,तृतीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो शंभू यादव,सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष अनुपम कुमार,लवली कुमारी,नीतू कुमारी,सरिता कुमारी,यशिका कुमारी,मनीषा कुमारी तथा अन्य योग शिविर में सम्मिलित हुए।