Solutions Competitions Classes TONK

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Photos 27/03/2016
Photos 01/07/2014

Bank of Baroda PO Recruitment 2014-15 on Various Posts

Organization Name : Bank of Baroda
Fresher’s / Exp : Fresher’s / Exp
No of Openings : Various Posts
Eligibility criteria : Qualification (As on 16.07.2014) – Degree (Graduation) with minimum 60% (55% for SC/ST/PWD) marks in any discipline from a recognized University OR any equivalent qualification as such recognized by Central Government.
Age Limit : Minimum- 20 years & Maximum- 28 years
Job Profile : PO
Location : Across India
Last Date to Apply : 16-07-2014
Details of job :
Bank of Baroda PO Recruitment Out 2014-15 on Various Posts Of Po Officers. Qualification (As on 16.07.2014) – Degree (Graduation) with minimum 60% (55% for SC/ST/PWD) marks in any discipline from a recognized University OR any equivalent qualification as such recognized by Central Government. For More Details Go To Offical Link Given below.
Skills Required :
Good Communications skill's
Application Fee :
Not Provided
How to Apply for this job :
Apply Online
Address :
http://www.bankofbaroda.co.in

Photos 24/06/2014

मोड्युलेशन

यह किसी जानकारी को लंबी दूरी तक सिग्नल के रूप में भेजने के लिए उपयोग होता हैं. मोड्युलेशन डिजिटल सिग्नल को एनालॉग रूप में बदलने की प्रक्रिया हैं. यह मोडेम (MODEM- Modulator Demodulator) के दुवारा संभव होता हैं. मोडेम एक विद्युत यंत्र हैं जो डिजिटल सिग्नल को एनालॉग मे और एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल मे बदलने का काम करता हैं.

मोड्युलेशन तीन प्रकार के होते है-

१. आयाम (Amplitude) मोड्युलेशन (AM)- इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल का आयाम सूचना युक्त डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

२. आवृति (Frequency) मोड्युलेशन (FM)- इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल की आवृति को सूचना युक्त डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

३.- चरण (Phase) मोड्युलेशन (PM)-इस प्रक्रिया में वाहक सिग्नल के फेज को डिजिटल सिग्नल के अनुरूप बदला जाता हैं.

24/06/2014

Reasoning आती है तो इस क्वेश्चन का सही उत्तर देके दिखाए।
यदि
2 x 3= 1218
4 x 3= 4836
5 x 3= 7545
तब
6 x 3= ???

I am Sure हमारे दोस्त इस प्रशन को भी जल्द ही हल कर देंगे।

24/06/2014

फीफा वर्ल्डकप 2014 मे कुल कितनी टीमें भाग ले रही हैं ?
A: 30
B: 28
C: 32
D: 34

24/06/2014

सामान्य ज्ञान
1. राष्ट्रीय खेल दिवस कब
मनाया जाता है।- 29
अगस्त
2.अंतर्राष्ट्री य मानवाधिकार दिवस
कब
मनाया जाता है।- 10 दिसंबर
३. आनासागर का निर्माण किसने
करवाया था।-
अरुणोराज
4. बूंदी का किला किसने बनवाया था।-
राजानगर
सिंह
5. तुगलकाबाद का संस्थापक था।-
ग्यासुदीन तुगलक
6. कोटा में जगमोहन महल का निर्माण
किसने
करवाया था।- राजकुमार ब्रजकुमार
7. धोलपुर में कानपुर महल किसने
बनवाया था।-
शाहजहां
8. किस शासक ने सर्वप्रथम लोक
निर्माण विभाग
की स्थापना की।- फिरोजशाह तुगलक
9. अजंता की गुफाओं का निर्माण किसने
करवाया था।- गुप्त शासकों ने
10. दरगाह अजमेर शरीफ का निर्माण
किसने
करवाया था।- सुल्तान ग्यासुद्दीन
11. उदयपुर में सहेलियों की बाड़ी किसने
बनवाई
थी।- महाराणा फतह सिंह
12. बूंदी में छत्र महल का निर्माण
किसने
करवाया था।- रानी छत्रसाल
13. कलिंग पुरस्कार किस क्षेत्र के लिए
दिया जाता है।- विज्ञान के क्षेत्र में
14. सरस्वती सम्मान किस क्षेत्र में
योगदान के लिए
दिया जाता है।- साहित्य
के क्षेत्र में
15. मैन ऑफ डेस्टिनी किसे
कहा जाता है।- नेपोलियन
बोनापार्ट
16. ग्रेंड मैन ऑफ ब्रिटेन किसे
कहा जाता है।-
ग्लेडस्टोन
17. कविगुरु कि नाम से किसे
जाना जाता है।-
रवींद्र नाथ ठाकुर
18. भारत का शेक्सपियर किसे
कहा जाता है।-
महाकवी कालिदास
19. गुजरात का जनक किसे कौन है।-
रविशंकर
महाराज
20. तोता ए हिंद के नाम से
जाना जाता है।- अमीर
खुसरो
21. एतमादूद्दौला का मकबरा किसने
बनवाया।-
नूरजहां
22. हैदराबाद में चार मीनार
का निर्माण किसने
करवाया।- कुली कुतुबशाह
23. अकबर का मकबरा किसने बनवाया।-
जहांगीर
24. पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव किस
अधिवेशन में
दिया गया।- कांग्रेस का लाहौर
अधिवेशन
25. कांग्रेस नरम व गरम दल में कब
विभाजित हुई।-
1907
26. आज़ाद हिंद सरकार
की स्थापना किसने की।-
सुभाष चंद्र बोस
27. वीमेन्स इंडिया एसोसिएशन
की स्थापना किसने
की।- लेडी सदाशिव अय्यर
28. किस एक्ट को काला कानून कहा है।-
रौलेक्ट
एक्ट
29. मुगल काल में कृषक कितने वर्गो में
विभाजित थे।-
तीन
30. शिवाजी ने कौनसे कर लगाए थे।-
चौथ व
सरदेशमुखी

Photos 10/05/2014

ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा ?------------

वैज्ञानिक को “ब्रह्मांड की उत्पत्ति” की बजाय उसके “अंत” पर चर्चा करना ज्यादा भाता है। ऐसे सैकड़ों तरिके है जिनसे पृथ्वी पर जीवन का खात्मा हो सकता है, पिछले वर्ष रूस मे हुआ उल्कापात इन्ही भिन्न संभावनाओं मे से एक है। लेकिन समस्त ब्रह्मांड के अंत के तरिके के बारे मे सोचना थोड़ा कठिन है। लेकिन हमे अनुमान लगाने, विभिन्न संभावनाओं पर विचार करने से कोई रोक नही सकता है।

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत “महाविस्फोट(The Big Bang)” के अनुसार अब से लगभग 14 अरब वर्ष पहले एक बिन्दु से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुयी है। उस समय ब्रह्मांड के सभी कण एक दूसरे से एकदम पास पास थे। वे इतने ज्यादा पास पास थे कि वे सभी एक ही जगह थे, एक ही बिंदु पर। सारा ब्रह्मांड एक बिन्दु की शक्ल में था। यह बिन्दु अत्यधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दु(infinitesimally small ) था। ब्रह्मांड का यह बिन्दु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म(infinitely hot) रहा होगा। इस स्थिती में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिती है जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिती में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल या समय के कोई मायने नहीं रहते है। इस स्थिती में किसी अज्ञात कारण से अचानक ब्रह्मांड का विस्तार होना शुरू हुआ। एक महा विस्फोट के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और ब्रह्मांड में पदार्थ ने एक दूसरे से दूर जाना शुरू कर दिया।

Photos 10/05/2014

गैलीलियो गैलीली-----------

गैलीलियो गैलीली एक इटालियन भौतिक विज्ञानी, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और दार्शनिक थे; जिन्होने आधुनिक वैज्ञानिक क्रांति की नींव रखी थी। उनका जन्म 15 फरवरी 1564 को हुआ था, तथा मृत्यु 8 जनवरी 1642 मे हुयी थी।

गैलीलियो गैलीली की उपलब्धियों मे उन्नत दूरबीन का निर्माण और खगोलिय निरिक्षण तथा कोपरनिकस के सिद्धांतो का समर्थन है। गैलीलियो को आधुनिक खगोलशास्त्र का पिता, आधुनिक भौतिकि का पिता, आधुनिक विज्ञान का पिता के नामो से सम्मान दिया जाता है।

“गैलेलियो, शायद किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना मे, आधुनिक विज्ञान के जन्मदाता थे।” - स्टीफन हांकिस

समरूप से त्वरित पिंडो की गति जिसे आज सभी पाठशालाओ और विश्वविद्यालयो मे पढाया जाता है, गैलीलियो द्वारा काईनेमेटीक्स(शुद्ध गति विज्ञान) विषय के रूप मे विकसित किया गया था। उन्होने अपनी उन्नत दूरबीन से शुक्र की कलाओ का सत्यापन किया था; बृहस्पति के चार बड़े चन्द्रमा खोजे थे(जिन्हे आज गैलेलीयन चन्द्रमा कहते है) तथा सूर्य धब्बो का निरिक्षण किया था। गैलीलियो ने विज्ञान और तकनिक के अनुप्रयोगो के लिये भी कर्य किया था, उन्होने सैन्य दिशादर्शक(Military Compass) और अन्य उपकरणो का आविष्कार किया था।

गैलीलियो द्वारा कोपरनिकस के सूर्य केन्द्रित सिद्धांत का समर्थन उनके संपूर्ण जीवन काल मे विवादास्पद बना रहा, उस समय अधिकतर दार्शनिक और खगोल विज्ञानी प्राचिन दार्शनिक टालेमी के भू केन्द्रित सिद्धांत का समर्थन करते थे जिसके अनुसार पृथ्वी ब्रम्हांड का केन्द्र है। 1610 के जब गैलीलियो ने सूर्यकेन्द्र सिद्धांत (जिसमे सूर्य ब्रम्हांड का केन्द्र है) का समर्थन करना शुरू किया उन्हे धर्मगुरुओ और दार्शनिको के कट्टर विरोध का सामना करना पडा़ और उन्होने 1615 मे गैलेलियो को धर्मविरोधी करार दे दिया। फरवरी 1616 मे वे आरोप मुक्त हो गये लेकिन चर्च ने सूर्य केन्द्रित सिद्धांत को गलत और धर्म के विपरित कहा। गैलेलियो को इस सिद्धांत का प्रचार न करने की चेतावनी दी गयी जिसे गैलीलियो ने मान लिया। लेकिन 1632 मे अपनी नयी किताब “डायलाग कन्सर्निंग द टू चिफ वर्ल्ड सीस्टमस” मे उन्होने सूर्य केन्द्री सिद्धांत के समर्थन के बाद उन्हे चर्च ने फिर से धर्मविरोधी घोषित कर दिया और इस महान वैज्ञानिक को अपना शेष जीवन अपने घर ने नजरबंद हो कर गुजारना पड़ा।

गैलीलियो का जन्म पीसा इटली मे हुआ था, वे वीन्सेन्ज़ो गैलीली की छः संतानो मे सबसे बड़े थे। उनके पिता एक संगितकार थे, गैलीलियो का सबसे छोटा भाई माइकलेन्जेलो भी एक प्रसिद्ध संगितकार हुये है। गैलीलियो का पूरा नाम गैलीलियो दी वीन्सेन्ज़ो बोनैउटी दे गैलीली था। आठ वर्ष की उम्र मे उनका परिवार फ्लोरेंस शहर चला गया था। उनकी प्राथमिक शिक्षा कैमलडोलेसे मान्स्टेरी वाल्लोम्ब्रोसा मे हुआ था।
गैलीलियो रोमन कैथोलिक थे। उन्होने किशोरावस्था मे पादरी बनने की सोची थी लेकिन पिता के कहने पर पीसा विश्वविद्यालय से चिकित्सा मे पदवी के लिये प्रवेश लिया लेकिन यह पाठ्यक्रम पूरा नही किया। उन्होने गणित मे शिक्षा प्राप्त की।

Photos 18/04/2014

Join Rscit -------

16/04/2014

जंतु विज्ञान से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

सबसे बड़ा स्तनधारी -नीली व्हेल
सबसे विशाल स्थलीय स्तनी -हाथी
सबसे बड़ी अस्थि- फीमर
सबसे बड़ा सर्प -अजगर
सबसे बड़ी मछली -रिनोडोन टाइप्स
सबसे बड़ा मोलस्क -जाइंट स्कीवड
सबसे बड़ा सिलेंट्रेट साईनिया,- जैलिफिश
सबसे बड़ा अंडा -शुतुरमुर्ग का
सबसे बड़ी शिरा इन्फीरियर -वेना केवा
सबसे बड़ा स्थलीय पक्षी- शुतुरमुर्ग
विशालतम जीवित सरीसृप टर-टिल
विश्व में सबसे विषैला सर्प -आस्ट्रेलिया का पेनिन्सुलर टाइगर सर्प
सबसे लम्बा स्तनी -जिराफ
सबसे छोटी चिड़िया- हमिंग बर्ड
दाँत रहित स्तनी -चींटीखोर
शरीर की सबसे भारी ग्रंथि- यकृत
सबसे मजबूत पेशी -जबड़े की पेशी
आदमी को प्रतिदिन आवश्यक कैलोरी -३९०० कि. कैलोरी
महिलाओं को प्रतिदिन आवश्यक कैलोरी -२४०० कि. कैलोरी
सबसे पुराना प्राइमेट -लीमर
सबसे पुराना आथ्रोपोड -पेरीपैटस
सबसे पुराना स्तनी- एकडीना
सबसे पुराना कपि -गिब्बन
सबसे विषैला भारतीय सर्प -किंग कोबरा
विषैली छिपकली -हीलोडर्मा
विषैली मछली -स्टोन मछली
अंडे देने वाले स्तनी -एकडीना, डक बिल्ड प्लेटिपस
भारत में सबसे विशाल म्यूजियम -चेन्नई में
भारत में सबसे विशाल चिड़ियाघर -कोलकाता में
भारत में सबसे विशाल एक्वेरियम -मुंबई में
विश्व में सबसे बड़ा चिड़ियाघर -क्रुगर नेशनल पार्क(दक्षिण अफ्रीका)

Photos 15/04/2014

राम के जन्म के लिए करवाए गए यज्ञ से हुए हनुमान अवतरित, जानिए पवनपुत्र के जन्म से जुड़ी एक चमत्कारिक घटना-----------

हिंदू धर्म ग्रंथों में 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र किया गया है, जिनकी अलग-अलग महिमा और भिन्न-भिन्न आदर्श हैं. इन्हीं देवी-देवताओं में से एक हैं राम भक्त, पवनपुत्र हनुमान, जिनका आज जन्मदिन है. अंजना और केसरी के लाल हनुमान के जन्मदिन को हिंदू धर्म के अनुयायी हनुमान जयंती के रूप में बड़े धूमधाम से मनाते हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन से जुड़ी रामायण, जो हिन्दुओं का एक पवित्र ग्रंथ है, में हनुमान को भी एक अभिन्न हिस्से के रूप में पेश किया गया है, इसलिए इनसे संबंधित घटनाओं, शिव के अवतार के रूप में इनका जन्म और बालपन में इनकी अठखेलियों के बारे में आपने कई बार सुना या पढ़ा होगा. लेकिन आज हम आपको उनकी मां अंजना और उनके पिता की मुलाकात कैसे हुई, कैसे हनुमान शिव के रूप में इस धरती पर अवतरित हुए इससे संबंधित पुराणों में लिखी एक बड़ी रहस्यमय घटना से अवगत करवाने जा रहे हैं.

हनुमान का जन्म कैसे हुआ, ये जानने के लिए पहले हम उनके माता-पिता के विवाह की भेंट कैसे हुई इस बारे में जान लेते हैं. हनुमान के जन्म की दैवीय घटना की शुरुआत होती है ब्रह्मा, जिनके हाथ में पृथ्वी के सृजन की कमान है, के दरबार से. स्वर्ग में स्थित उनके महल में हजारों सेविकाएं थीं, जिनमें से एक थीं अंजना. अंजना की सेवा से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें मनचाहा वरदान मांगने को कहा.

अंजना ने हिचकिचाते हुए उनसे कहा कि उन पर एक तपस्वी साधु का श्राप है, अगर हो सके तो उन्हें उससे मुक्ति दिलवा दें. ब्रह्मा ने उनसे कहा कि वह उस श्राप के बारे में बताएं, क्या पता वह उस श्राप से उन्हें मुक्ति दिलवा दें.

अंजना ने उन्हें अपनी कहानी सुनानी शुरू की. अंजना ने कहा ‘बालपन में जब मैं खेल रही थी तो मैंने एक वानर को तपस्या करते देखा, मेरे लिए यह एक बड़ी आश्चर्य वाली घटना थी, इसलिए मैंने उस तपस्वी वानर पर फल फेंकने शुरू कर दिए. बस यही मेरी गलती थी क्योंकि वह कोई आम वानर नहीं बल्कि एक तपस्वी साधु थे. मैंने उनकी तपस्या भंग कर दी और क्रोधित होकर उन्होंने मुझे श्राप दे दिया कि जब भी मुझे किसी से प्रेम होगा तो मैं वानर बन जाऊंगी. मेरे बहुत गिड़गिड़ाने और माफी मांगने पर उस साधु ने कहा कि मेरा चेहरा वानर होने के बावजूद उस व्यक्ति का प्रेम मेरी तरफ कम नहीं होगा’.

अपनी कहानी सुनाने के बाद अंजना ने कहा कि अगर ब्रह्म देव उन्हें इस श्राप से मुक्ति दिलवा सकें तो वह उनकी बहुत आभारी होंगी. ब्रह्म देव ने उन्हें कहा कि इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए अंजना को धरती पर जाकर वास करना होगा, जहां वह अपने पति से मिलेंगी. शिव के अवतार को जन्म देने के बाद अंजना को इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी.

ब्रह्मा की बात मानकर अंजना धरती पर चली गईं और एक शिकारन के तौर पर जीवन यापन करने लगीं. जंगल में उन्होंने एक बड़े बलशाली युवक को शेर से लड़ते देखा और उसके प्रति आकर्षित होने लगीं. जैसे ही उस व्यक्ति की नजरें अंजना पर पड़ीं, अंजना का चेहरा वानर जैसा हो गया. अंजना जोर-जोर से रोने लगीं, जब वह युवक उनके पास आया और उनकी पीड़ा का कारण पूछा तो अंजना ने अपना चेहरा छिपाते हुए उसे बताया कि वह बदसूरत हो गई हैं. अंजना ने उस बलशाली युवक को दूर से देखा था लेकिन जब उसने उस व्यक्ति को अपने समीप देखा तो पाया कि उसका चेहरा भी वानर जैसा था.

अपना परिचय बताते हुए उस व्यक्ति ने कहा कि वह कोई और नहीं वानर राज केसरी हैं जो जब चाहें इंसानी रूप में आ सकते हैं. अंजना का वानर जैसा चेहरा उन दोनों को प्रेम करने से नहीं रोक सका और जंगल में केसरी और अंजना ने विवाह कर लिया.

भगवान शिव के भक्त होने के कारण केसरी और अंजना अपने आराध्य की तपस्या में मग्न थे. तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. अंजना ने शिव को कहा कि साधु के श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें शिव के अवतार को जन्म देना है, इसलिए शिव बालक के रूप में उनकी कोख से जन्म लें.

‘तथास्तु’ कहकर शिव अंतर्ध्यान हो गए. इस घटना के बाद एक दिन अंजना शिव की आराधना कर रही थीं और किसी दूसरे कोने में महाराज दशरथ, अपनी तीन रानियों के साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे. अग्नि देव ने उन्हें दैवीय ‘पायस’ दिया जिसे तीनों रानियों को खिलाना था लेकिन इस दौरान एक चमत्कारिक घटना हुई, एक पक्षी उस पायस की कटोरी में थोड़ा सा पायस अपने पंजों में फंसाकर ले गया और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया.

अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया और कुछ ही समय बाद उन्होंने वानर मुख वाले हनुमान जी को जन्म दिया.

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