17/11/2025
हमारे विधालय टीटागढ़ एंग्लो वर्नाक्यूलर हाई स्कूल से भूगोल विभाग का excursion कालिंपोंग के झांडी नामक स्थान पर आयोजित गया था। यह excursion (4/11/2025 से 7/11/2025) तक आयोजित किया गया।
हमारे जीवन का अमूल्य पलो मे से यह एक था। जिसमे विद्यालय के छात्रों एवं छात्राओं ने पहली बार कही घूमने गए और साथ मे खुल कर मौज मस्ती किये। और उन्हें बहुत कुछ नया सिखने को भी मिला । वह का माहौल बिल्कुल शांत शुद्ध वातावरण हवा मे नमी और शुद्धता, रास्ते मे अनेको प्रकार के जीवधारी, पेड़ पौधे नदिया, पहाड़- चट्टान दिखे जो की एक मनोरम दृष्य रहा जो कि बिल्कुल कल्पनिक से लगता था।
इस पूरे excursions को अर्पिता मैडम ने organize किया और सहायक के रूप मे संजय सर , और इस excursions को और भी मज़ेदार बनाने मे हमारे पथ प्रदर्शक सुदीप्तो सर का महत्वपूर्ण योगदान है। इस excursion में अलग अलग दिनों में क्या किया गया जिसका विस्तार दिनांक के साथ विवरण निम्नलिखित है।
1st day (4/11/2025)
को साम को हम सब टीटागढ़ रेलवे स्टेशन पर मिले। वहां पर प्रायः सभी मित्रों के माता पिता आये थे। वहां पर अर्पिता मैडम सभी का हाजरी लिया और हमे केक टॉफी और और बिस्कुट दिया। फिर वहां से हम सियालदह स्टेशन पहुँचे। रात 8.30 पर कंचनकन्या एक्सप्रेस पर चढ़ कर अपने अपने सीट पर बैठ गए। कुछ समय पश्चात भोजन करके हम सब सो गए। दूसरे दिन
2nd day-(5/11/2025)
पहले दिन हम सब ट्रेन से न्यू माल जंकशन पर करीब 11 बजे सुबह उतरे और वह से हमारा सफर शुरू होता है सभी को 3+3+1 (3 लड़का, 3 लड़की, 1 टीचर) के ration मे अलग अलग ग्रुप बनाया जाता है।
और फिर सभी दल अपनी अपनी 4 गाड़ियों मे बैठते हैं और वहां से सफर प्रारंभ होता है कुछ दूर जाने के बाद हम सभी राँगामटी चाय बगं पहुँचते है वह पर नास्ता के रूप में पूड़ी और सब्जी दिया जाता है। नास्ता समाप्त करने के बाद हम सभी बागान मे घूमते है।
इस बागान मे घूमने के बाद हम सभी पहाड़ की और आगे की तरफ बढ़ते हैं ।
रास्ते मे अनेको सुंदर और मनोरम दृष्य दिखे (पहाड़ पर चढ़ने के लिए जो रास्ते थे सारे घुमावदार थे और हम जितना उपर की ओर बढ़ रहे थे उतनी ही ठंड बढ़ रही थी। पूरे रास्ते हम कई तरह के नदी, पहाड़ -चट्टान, चाय बागान, फूल की बाग बगीचे, इत्यादि दिखे।
हम लगभग 3 घंटे का सफर तय करके जब पहाड़ के उपर पहुँचे तब हम सब थक गए और खाना पीना करके कुछ लोग आराम करने लगे । जब हम शाम को उठे तब सब एक अलग ही जुनून मे थे ।
शाम को वह एक अलग ही माहौल था बीच मे कैंप फायर जल रहा था और उसके चारो ओर हम सब बैठे सर, मैडम, सुदीप्तो सर और उनके साथ सब सांस्कृतिक गानों पर नाच - गाना कर रहे थे।
हमारे बीच सुदीप्तो सर और अर्पिता मैडम और तुषार का गाना एक अलग ही जोसिला था और पूरे ग्रुप ने कैम्प फायर के चारो तरफ नाच किया । इतना सब होने के बाद हम सब भोजन करने के बाद सो गए।
3rd day- (6.11.2025)
दूसरे दिन हम सब झांडी से करीब 6 किलोमीटर दूर एक झील खोला वॉटर फाल (झरना) गए। वह जाने के लिए हम पहाड़ से नीचे लगभग 2.30 घंटे तक चलते रहे। नीचे की तरफ जाना था तो कुछ समझ नही आया। हम सब मस्ती में गाते बजाते गुनगुनाते हुए और आसपास का मनोरम दृश्यों को देखते हुए चलते रहे।
जब हम वह पहुँचे तो वहा का माहौल कुछ अलग सा था , ज्यादातर लोग तो झरने के पानी को बहता हुआ देख सब भूल गए पर झरने का पानी इतना ठंडा था कि असमंजस में पड़ गए कि झरने में जाए या नही जाएं। अंततः हम उसमें गए तो फिर मज़ा इतना आया की हमे वहा से आने का मन ही नही कर रहा था , वहा हमे अनेको तरह के पत्थर चट्टान देखने को मिला, कुछ ऐसी जीवो के बारे मे सुना जो हमारे केवल कहानियों में ही सुना था।
वहा पर हम सब चिकन और चावल बनाये और वही भोजन करके वापस से अपने होटल की तरफ चढ़ाई शुरू करने लगे। चढ़ाई इतना कस्थदायक था पर मैडम हमे हर जगह कुछ न कुछ पढ़ाते हुए समझते हुए पहाड़ी ढाल के सहारे चढ़ती रही। उसमे मै और मेरे बाकी कुछ मित्र 2.30 घंटे मे ही ऊपर पहुँच गए। बाकी ज्यादातर लोगों को 3 घंटे से भी अधिक समय लगा ऊपर पहुचने में। उस दिन ज्यादातर लोग थके हुए थे तो उस रात कुछ खास नही हो पाया। पर रात को पुनः कैम्प फायर आयोजित किया गया। उसपर चिकन तंदूरी बनाया गया और सभी चाव से चिकन तंदूरी को साम के नाश्ते के रूप में खाया गया। और रात को भोजन करके फिर सभी सो गए।
3rd day (7.11.2025)
तीसरे दिन हम सब लावा तथा मोंनस्ट्री गए , यह काफी शांति थी यहाँ एक मन्दिर था जहां जाने पर एक अलग सा सकरात्मक ऊर्जा कार्य कर रही थी।
जिस समय हम वह पहुँचे उसके कुछ देर बाद वहा debate session शुरू होने
वाला था जिस कारण हम वह ज्यादा देर घूम नही पाए। पास मे ही एक दुकान से लगभग सभी ने अपने या अपने लिए समान खरीदें। बाद हम वह से वापस अपने होटल की और रवाना हुए। वहां सिर्फ दोपहर का भोजन करने के तुरंत बाद ही हम सब वापस घर आने के लिए तैयार होने लगे। लौटते समय हम सब उस नदी के पास गए जो उस झरने मे बनी थी। जहां हम पिछले दिन गए थे । और उस नदी का नाम तीस्ता नदी था। उसे देखने के बाद हम सब दुखी मन से गाड़ी मे बैठे और कालिंपोग को बाय किया
आने के समय रास्ते ने हमे एक बृज को पर करना था जिसके नीचे नदी थी जिससे विधुत उत्पादन किया जाता था।
अब हम लगभग 3.40 घंटे सफर तय करके सिलिगुड़ी स्टेशन ट्रेन पकड़ने पहुँचे। और इस तरह हमारे जीवन का एक अनमोल पल अब समाप्ति की ओर था। आंखों में आंसुओं को लिए हम सब नही चाहते हुए भी ट्रेन पर चढ़ गए। और भोजन करके सभी बिना मन के सो गए।
4th day (8.11.2025)
सुबह 8 बजे तक हम सियालदह स्टेशन उतरे। वहाँ से मैडम और सर हम सभी को सियालदह से टीटागढ़ लेकर आये। यहाँ सभी को मैडम और सर सावधानी से घर जाने के लिए बोला। और बोला गया कि घर पहुँच कर सभी मैसेज कीजिए। हम सब अपने अपने घरों में पहुँच कर ग्रुप में मैसेज किये।
इस पूरे 3 दिन के टूर में मानो हमने अपनी जिंदगी जी ली और अपने जीवन मे वह देखा जो कल्पना या फिल्मों में देखा करता था। अगर मुझे पुनः मौका मिला तो वह पल मैं पुनः जीना चाहूंगा। मैं अपने और अपने मित्रों के तरफ से तहेदिल से अर्पिता मैडम और संजय सर को सुक्रिया करना चाहूंगा।
देव हेला
12 आर्ट्स (भूगोल विभाग)