Sri Siddh Guru

Sri Siddh Guru Shree Brahmrishi Parivaar

12/06/2024
    ऊँ श्री गणपति नम:        ऊँ श्री रामचंद्र नम:         ऊँ श्री हनुमते  नम:     जय श्री बालाजी महाराज  जय श्र...
26/03/2024

 ऊँ श्री गणपति नम: 
 ऊँ श्री रामचंद्र नम: 
 ऊँ श्री हनुमते नम: 
जय श्री बालाजी महाराज
 जय श्री मोहनदास जी 
 जय श्री कानी दादी की 
आप सभी का दिन मंगलम हो

दिनांक........*26-मार्च-2024*
वार-.…….... *मंगलवार*
तिथि......... 🌕 प्रतिपदा 14:55
नक्षत्र........ हस्त
माह......... चैत्र
पक्ष.......... कृष्ण पक्ष
ऋतु ...... वसन्त ऋतू
विक्रम सम्वंत .........2080

राहू काल 15:40 से 17:12
गुली काल 12:36 से 14:48
अभिजीत 12:11 से 13:01

चोघडिया, दिन
रोग 06:28 - 08:00 अशुभ
उद्वेग 08:00 - 09:32 अशुभ
चर 09:32 - 11:04 शुभ
लाभ 11:04 - 12:36 शुभ
अमृत 12:36 - 14:08 शुभ
काल 14:08 - 15:40 अशुभ
शुभ 15:40 - 17:12 शुभ
रोग 17:12 - 18:44 अशुभ
चोघडिया, रात
काल 18:44 - 20:11 अशुभ
लाभ 20:11 - 21:39 शुभ
उद्वेग 21:39 - 23:07 अशुभ
शुभ 23:07 - 24:35* शुभ
अमृत 24:35* - 26:03* शुभ
चर 26:03* - 27:31* शुभ
रोग 27:31* - 28:59* अशुभ
काल 28:59* - 30:27* अशुभ

*सुमित पुजारी सालासर*
☎️+91 8877000100

🌻""""""""""""""""""""""""""""""""""""🌻      *_🪴 तप का प्रभाव  🪴_*🌻""""""""""""""""""""""""""""""""""""🌻           _एक बा...
01/03/2024

🌻""""""""""""""""""""""""""""""""""""🌻
*_🪴 तप का प्रभाव 🪴_*
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_एक बार पृथ्वी पर जल-वृष्टि न होने के कारण चारों ओर सूखा-अकाल पड़ गया था- ताल-तलैया और सरोवर सूख गए थे! कुओं में भी पानी नहीं रह गया था! कहीं भी हरियाली देखने को नहीं मिलती थी। मनुष्य,पशु और पक्षी जल के अभाव में तड़प रहे थे।_
_किन्तु महर्षि गौतम के आश्रम पर- उस भीषण अकाल का नाम-निशान भी नहीं था। आश्रम के आस- पास घनी हरियाली तो थी ही,सरोवर में भी स्वच्छ जल लहराया करता था। जब चारों ओर जल का अभाव हो गया- तो दूर-दूर के पशु-पक्षी सरोवर के पास आकर रहने लगे- और सरोवर के पानी को पीकर सुख से जीवन बिताने लगे।_
_मनुष्यों को भी जब उस सरोवर का पता चला तो झुंड के झुंड गौतम ऋषि के पास पहुंचे- और उनसे विनीत स्वर में बोले: “ऋषिवर! हम सब पानी के बिना दुख पा रहे हैं। अनुमति दीजिए,ताकि हम सब आपके सरोवर के जल का उपयोग कर सकें।”_

_गौतम ऋषि ने कहा: “आश्रम आप सबका है, सरोवर भी आप सबका ही है! आप स्वतंत्रतापूर्वक सरोवर के जल का उपयोग कर सकते हैं।”_
_बस, फिर क्या था,झुंड के झुंड लोग तरह-तरह की सवारियों पर अपना सामान लादकर सरोवर के पास आकर बसने लगे। कुछ ही दिनों में सरोवर के आस पास चारों ओर अच्छा- खासा नगर बस गया। सरोवर के जल से सबको नया जीवन मिलने लगा। सब गौतम ऋषि के तप और त्याग की भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे। पर मनुष्यों में कुछ ऐसे भी लोग थे,जो दुष्ट प्रकृति के थे। उन्होंने जब जन-जन के मुख से गौतम ऋषि की प्रशंसा सुनी, तो उनके मन में गौतम ऋषि के प्रति ईर्ष्याग्नि जल उठी। उन्हें गौतम ऋषि की प्रशंसा नहीं सुहाई। वे कोई ऐसा उपाय सोचने लगे जिससे गौतम ऋषि को नीचा देखना पड़े।_
_उनके इस प्रयत्न में कुछ ऋषि-मुनि भी सम्मिलित हो गए,पर गौतम ऋषि को नीचा दिखाना- सरल काम नहीं था,क्योंकि वे बड़ी निष्ठा से सदा मानव की भलाई में लगे रहते थे। जब दुष्ट स्वभाव के मनुष्यों का किसी तरह वश नहीं चला, तो वे सब मिलकर गणपति की सेवा में उपस्थित हुए। सबने हाथ जोड़कर निवेदन किया है “गणपति महाराज! ऋषि गौतम गर्व से फूलकर पथ-भ्रष्ट हो रहे हैं। कोई ऐसा उपाय कीजिए,जिससे उनका गर्व धूल में मिल जाए।”_
_गणपति ने कहा: “आश्चर्य है,आप लोग गौतम ऋषि के संबंध में मन में ऐसी धारणा रखते हैं! गौतम ऋषि तो तप और त्याग की मूर्ति हैं। उन्होंने वरुण की उपासना करके उस स्वच्छ जल वाले सरोवर को प्राप्त किया। यदि आज वह सरोवर न होता,तो क्या आप लोगों का जीवन सुरक्षित रह सकता था.....?”_
_पर उन दुष्ट मनुष्यों के हृदय पर गणपति की बात का कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ा। वे अपनी बात पर अड़े रहे- और प्रार्थना पूर्वक गणपति से आग्रह करते रहे।_
_गणपति ने विवश होकर कहा: “आप लोग नहीं मानते,तो मैं कुछ करूंगा- लेकिन उससे आप लोगों का ही अहित होगा।”_
_गणपति की बात सुनकर दुष्ट स्वभाव के सभी मनुष्य तुष्ट होकर अपने-अपने घर चले गए।_
_एक दिन दोपहर के बाद गौतम ऋषि अपने आश्रम की वाटिका में पुष्पों के पौधों को सींच रहे थे। हठात एक दुबली-पतली गाय वाटिका में घुसकर पौधों को खाने लगी। गौतम ऋषि गाय को पकड़कर उसे अलग कर देना चाहते थे,पर ज्यों ही उन्होंने गाय को हाथ लगाया वह गिर पड़ी और निष्प्राण हो गई।_
_यह देख गौतम ऋषि स्तब्ध रह गए- और गाय की ओर देखकर बोले- “ओह,यह कैसा अनर्थ हो गया।"_
_तभी गौतम ऋषि के कानों में एक आवाज पड़ी- *“गौतम पापी है- गाय का हत्यारा है।”*_
_गौतम ऋषि ने पीछे मुड़कर देखा, बहुत से लोग खड़े थे। उनके साथ कुछ ऋषि-मुनि भी थे। वे सम्मिलित स्वर में गौतम ऋषि को पापी और हत्यारा घोषित कर रहे थे।_
_चारों ओर गौतम ऋषि की निंदा होने लगी। गौतम ऋषि बहुत दु:खी हुए। वे अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए अहिल्या को साथ लेकर आश्रम छोड़कर चले गए।दुष्ट स्वभाव के मनुष्य बहुत प्रसन्न हुए।उनका मनचाहा पूरा हो गया।_
_गौतम ऋषि एक वन में गए। वन के वृक्षों को काटकर,उन्होंने एक कुटी बनाई- और वहां रहकर तप करने लगे।_
_अहिल्या दिन-रात उनकी सेवा में लगी रहती थी।_
_तप करते हुए गौतम ऋषि को बहुत दिन बीत गए। प्राय: ऋषि-मुनि भी वहां आया करते थे।उन्होंने गौतम ऋषि से कहा: *“तप से गौ हत्या का पाप दूर नहीं होगा। यदि आप भी गौ हत्या के पाप से मुक्त होना चाहते हैं तो गंगा में स्नान कीजिए।”*_
_पर गौतम ऋषि गंगा में स्नान करें,तो कैसे करें....? गंगा तो वहां थी ही नहीं।गौतम ऋषि गंगा को प्रकट करने के लिए भगवान शिव की आराधना करने लगे। गौतम ऋषि के तप, त्याग और आराधना से भगवान शंकर प्रसन्न हुए।वे प्रकट होकर बोले- “महामुने! मैं आपकी आराधना से प्रसन्न हूं। बोलिए,आपको क्या चाहिए?”_

_गौतम ऋषि ने निवेदन किया- “प्रभु! मुझे गौ हत्या का पाप लगा है। *कृपा करके मुझे गंगा दीजिए- मैं गंगा में स्नान कर पाप से मुक्त होना चाहता हूं।”*_
_भगवान शंकर मुस्कुराकर बोले: “महामुने! आपको गौ हत्या का पाप नहीं लगा है। आपको छल का शिकार बनाया गया है। जिन्होंने आपके साथ षड्यंत्र किया है, उनका कभी भी कल्याण नहीं होगा। आप कोई और वर मांगें।”_
_गौतम ऋषि ने कहा: “प्रभो! जिन्होंने मेरे साथ छल किया है, मैं तो उन्हें अपना परम हितैषी मानता हूं। यदि उन्होंने मेरे साथ वैसा न किया होता,तो आज मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य कैसे मिलता....? मुझे तो केवल गंगा दीजिए।”_
_गौतम ऋषि के त्याग पर भगवान शिव और भी अधिक प्रसन्न हो उठे। उन्होंने कहा: “महामुने आप धन्य हैं,जो अपने शत्रुओं को भी अपना हितैषी मान रहे हैं। आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी, गंगा अब अवश्य प्रकट होंगी।”_
_शिव के इस कथन पर गंगा जी प्रकट होकर बोलीं- *“मैं जलधारा के रूप में प्रकट होने के लिए तैयार हूं, पर आपको भी मेरे साथ ही रहना पड़ेगा।”*_
_शिव ने कहा: “मैं बिना देवताओं के किसी जगह कैसे रह सकता हूं...?”_
_गौतम ऋषि ने हाथ जोड़कर निवेदन किया- “प्रभो! आप देवाधिदेव हैं।आप जहां रहेंगे, देवता भी वहीं रहेंगे।”_
_गौतम ऋषि के कथन पर शिव मुस्कुरा उठे। उनकी मुस्कुराहट के साथ ही साथ देवता वहां उपस्थित होने लगे।_
_देवताओं ने कहा: “हम अवश्य यहां रहेंगे। प्रकृति के रूप में निवास करेंगे! भांति-भांति के फूल बनकर खिलेंगे- हरी-हरी फसलों के रूप में लहराएंगे,और हरितमा के रूप में चारों ओर छा जाएंगे।”_
_देवताओं के कथन के साथ ही गंगा की जलधारा फूट उठी और ‘हर-हर’ ध्वनी के साथ लहराने लगी। उस जलधारा के प्रभाव से अकाल दूर हो गया,धरती तृप्त हो गई। *गौतम ऋषि के तप से प्रकट हुई उस जलधारा का नाम पड़ा गौतमी,और कालांतर में गौतमी ही गोदावरी बन गई..!!*_
*_🌸 जय श्री राधे 🌸_
*_🪴।।जय जय श्री राम।। 🪴_*
*_🪷 ।।हर हर महादेव।। 🪷_*

*बांस की लकड़ी को क्यों नहीं जलाया जाता है।*इसके पीछे धार्मिक कारण है या वैज्ञानिक कारण।हम अक्सर शुभ (जैसे हवन अथवा पूजन...
01/03/2024

*बांस की लकड़ी को क्यों नहीं जलाया जाता है।*

इसके पीछे धार्मिक कारण है या वैज्ञानिक कारण।

हम अक्सर शुभ (जैसे हवन अथवा पूजन) और अशुभ (दाह संस्कार) कामों के लिए विभिन्न प्रकार के लकड़ियों को जलाने में प्रयोग करते है लेकिन क्या आपने कभी किसी काम के दौरान बांस की लकड़ी को जलता हुआ देखा है।

नहीं ना- भारतीय संस्कृती, परंपरा और धार्मिक महत्व के अनुसार, हमारे शास्त्रों में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित माना गया है।

यहां तक की हम अर्थी के लिए बांस की लकड़ी का उपयोग तो करते है लेकिन उसे चिंता में जलाते नहीं।

हिन्दू धर्मानुसार बांस जलाने से पितृ दोष लगता है वहीं जन्म के समय जो नाल माता और शिशु को जोड़ के रखती है, उसे भी बांस के वृक्षो के बीच मे गाड़ते है ताकि वंश सदैव बढ़ता रहे।

*क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण है।* बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। लेड जलने पर लेड ऑक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते हैं।

लेकिन जिस बांस की लकड़ी को जलाना शास्त्रों में वर्जित है यहां तक कि चिता मे भी नही जला सकते, उस बांस की लकड़ी को हमलोग रोज़ अगरबत्ती में जलाते हैं।

अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है। यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है जो कि श्वांस के साथ शरीर में प्रवेश करता है, इस प्रकार अगरबत्ती की तथाकथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम हेप्टोटोक्सिक को भी स्वांस के साथ शरीर मे पहुंचाती है।

इसकी लेश मात्र उपस्थिति केन्सर अथवा मष्तिष्क आघात का कारण बन सकती है। हेप्टो टॉक्सिक की थोड़ी सी मात्रा लीवर को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है।

शास्त्रो में पूजन विधान में कही भी अगरबत्ती का उल्लेख नही मिलता सब जगह धूप ही लिखा है। हर स्थान पर धूप,दीप,नैवेद्य का ही वर्णन है।

हिन्दू धर्म की हर एक बातें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार मानवमात्र के कल्याण के लिए ही बनी है।

*अतः* कृपया अगरबत्ती की जगह धूप धुना का ही उपयोग करना चाहिए।

*ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।**नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।।**केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।**हारी हिरण्यमय वप...
28/02/2024

*ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।*
*नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।।*
*केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।*
*हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।।*

*भावार्थः-👉 सौर-मण्डल के मध्य में, कमल के आसन पर विराजमान (सूर्य) नारायण जो बाजूबंद, मकर की आकृति के कुण्डल, मुकुट, शंख, चक्र धारण किये हुए तथा स्वर्ण आभायुक्त शरीर वाले हैं, का सदैव ध्यान करते हैं।*
🙏🙏 *जय जय श्री गुरुदेव*🙏🙏

ॐ परमात्मने नमः।।ॐ श्री सिद्ध गुरवे नमः।।*मनुष्य के मनोबल की महिमा*👉 *कहा जाता है-"मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।" य...
25/02/2024

ॐ परमात्मने नमः।।
ॐ श्री सिद्ध गुरवे नमः।।

*मनुष्य के मनोबल की महिमा*
👉 *कहा जाता है-"मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।" यह साधारण सी लोकोक्ति एक असाधारण सत्य को प्रकट करती है और वह है-मनुष्य के "मनोबल" की महिमा।* जिसका *"मन"* हार जाता है, वह बहुत कुछ शक्तिशाली होने पर भी पराजित हो जाता है और शक्ति न होते हुए भी जो *"मन"* से हार नहीं मानता, उसको कोई शक्ति पराजित नहीं कर सकती।
👉 *मनुष्य की वास्तविक शक्ति "मनोबल" ही है।* *"मनोबल"* से हीन मनुष्य को निर्जीव ही समझना चाहिए। *संसार के सारे कार्य शरीर द्वारा ही संपादित होते हैं, किंतु उसका संचालक "मन" ही हुआ करता है।* मन का सहयोग पाए बिना शरीर-यंत्र उसी प्रकार निष्क्रिय रहा करता है, जैसे बिजली के अभाव में सुविधा-उपकरण अथवा मशीनें आदि।
👉 बहुत बार देखा जा सकता है कि साधन-शक्ति तथा आवश्यकता होने पर भी जब मन नहीं चाहता तो अनेक कार्य बिना किए पड़े रहते हैं। *शरीर के अक्षत रहते हुए भी मानसिक सहयोग के बिना कोई काम नहीं बनता और जब "मन" चाहता है तो एक बार रुग्ण शरीर भी कार्य में प्रवृत्त हो जाता है।* जो काम मन से किया जाता है वह अच्छा भी होता है, और जल्दी भी। बेमन किए हुए काम न केवल अकुशल ही होते हैं, बल्कि बुरी तरह शिथिल भी कर देते हैं। मनोयोग रहने से मनुष्य न जाने कितनी देर तक बिना थकान अनुभव किए, कार्य में संलग्न रहा करता है, किंतु मन के उचटते ही जरा भी काम करने में मुसीबत आ जाती है। *इस प्रकार देखा जा सकता है कि मनुष्य का वास्तविक बल, "मनोबल" ही है।*
👉 *"मनोबल" के इस उत्थान-पतन से घटित होने वाले न जाने कितने परिवर्तन इतिहास में भरे पड़े हैं।* सिकंदर जीता और पोरस हार गया। यह मोटा-सा ऐतिहासिक सत्य है। किंतु यदि गहराई से देखा जाए तो तथ्य इसके विपरीत है। *विजयी होते हुए भी सिकंदर हारा और विजित होते हुए भी पोरस जीता।* पोरस बंदी हुआ, उसकी सेनाओं ने तलवारें नीची कर लीं, यह शारीरिक हार थी। *पर पोरस मन से नहीं हारा, यह सच्ची जीत थी।* सिकंदर के यह पूछने पर, कि आपके साथ क्या व्यवहार किया जाए? पोरस का यह उत्तर कि, *"एक राजा जो व्यवहार दूसरे राजा से करता है।" उसकी मानसिक विजय थी*, जिसे सिकंदर को मान्यता देनी पड़ी और *इतिहास को स्वीकार करना पड़ा कि पोरस हारकर भी नहीं हारा और सिकंदर जीतकर भी नहीं जीता।*
🙏🙏 *जय जय श्री सिद्ध गुरुदेव*🙏🙏

04/02/2024

*संस्कार चैनल पर विशेष प्रसारण*

जय गुरुदेव,

"सिद्धगुरु" श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव, तिरुपति के दिव्य आशीर्वाद से *श्री आनंद महोत्सव 2024 का विशेष प्रसारण संस्कार चैनल* पर हो रहा है।

_*दिनांक: रविवार, 4 फरवरी 2024 (आज)*_
_*समय: साँय 7:50 बजे से - 8:30 तक*_

अपने परिवार एवं मित्रों तक यह संदेश पहुँचायें ताकि अधिक से अधिक सँख्या में लोग लाभ ले सकें।

निवेदक:
विश्व धर्म चेतना मंच - बेंगलुरु केंद्र,
श्री सिद्धेश्वर तीर्थ - श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति.
🙏🙏🙏
_________________________________________

_*SPECIAL TELECAST on SANSKAR CHANNEL*_

Jai Gurudev,

With the divine blessings of "SIDDHGURU" Sri Sidheshwar Brahmrishi Gurudev, Tirupati *Special telecast of Sri Anand Mahotsav 2024* will be relayed on *Sanskar channel.*

_*Date: Sunday, 4th February 2024 (Today)*_
_*Time: 7:50 PM - 8:30 PM*_

Please share the message with your family and friends so that maximum people can benefit from it.

Invited by:
Vishwa Dharma Chetana Manch - Bengaluru Kendra,
Sri Sidheshwar Tirth - Sri Brahmrishi Ashram, Tirupati.
🙏🙏🙏

*"मां तो मां है"**एक सौदागर राजा के महल में दो गायों को लेकर आया - दोनों ही स्वस्थ, सुंदर व दिखने में लगभग एक जैसी थीं।*...
03/02/2024

*"मां तो मां है"*

*एक सौदागर राजा के महल में दो गायों को लेकर आया - दोनों ही स्वस्थ, सुंदर व दिखने में लगभग एक जैसी थीं।*

*सौदागर ने राजा से कहा "महाराज - ये गायें माँ - बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन - क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है।*

*मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ - बेटी की पहचान नहीं कर पाया*

*बाद में मुझे किसी ने यह कहा कि आपका बुजुर्ग मंत्री बेहद कुशाग्र बुद्धि का है और यहाँ पर मुझे अवश्य मेरे प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा...*

*इसलिए मैं यहाँ पर चला आया - कृपया मेरी समस्या का समाधान किया जाए।"*

*यह सुनकर सभी दरबारी मंत्री की ओर देखने लगे मंत्री अपने स्थान से उठकर गायों की तरफ गया।*

*उसने दोनों का बारीकी से निरीक्षण किया किंतु वह भी नहीं पहचान पाया कि वास्तव में कौन मां है और कौन बेटी ?*

*अब मंत्री बड़ी दुविधा में फंस गया, उसने सौदागर से एक दिन की मोहलत मांगी।*

*घर आने पर वह बेहद परेशान रहा - उसकी पत्नी इस बात को समझ गई। उसने जब मंत्री से परेशानी का कारण पूछा तो उसने सौदागर की बात बता दी।*

*यह सुनकर पत्नी बोली 'अरे ! बस इतनी सी बात है - यह तो मैं भी बता सकती हूँ ।'*

*अगले दिन मंत्री अपनी पत्नी को वहाँ ले गया जहाँ गायें बंधी थीं।*

*मंत्री की पत्नी ने दोनों गायों के आगे अच्छा भोजन रखा - कुछ ही देर बाद उसने माँ व बेटी में अंतर बता दिया - लोग चकित रह गए।*
*मंत्री की पत्नी बोली "पहली गाय जल्दी - जल्दी खाने के बाद दूसरी गाय के भोजन में मुंह मारने लगी और दूसरी वाली ने पहली वाली के लिए अपना भोजन छोड़ दिया, ऐसा केवल एक मां ही कर सकती है - यानि दूसरी वाली माँ है।*

*भारतीय संस्कारो से परिपूर्ण माँ अथवा गौमाता ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है - माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममत्व के गुण विद्यमान होते है.*

जय जय श्री सिद्ध गुरु।

Address

Contact@sribrahmrishiashram. Org
Tirupathi
517561

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