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09/03/2025
14/08/2021

15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है।

सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ न पूरी है।।

उपरोक्त पंक्तियां अटल जी की पुस्तक ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ से उद्धृत है। हम इस वर्ष 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। अटल जी ऐसा क्यों कहा कि आजादी अभी अधूरी है और क्या है रावी की शपथ। इन दोनों बिंदुओं पर जरा विचार करते है।

15 अगस्त 1947 को भारत देश को स्वतंत्रता मिली। परंतु यह स्वतंत्रता अधूरी थी। भारत माता की स्वतंत्रता के लिए इस देश के सपूतों, वीरांगनाओं ने अपना जीवन व प्राण न्योछावर कर दिया। कितने ही परिवार बलिदान हो गए। परंतु स्वतंत्रता मिली तो भी अधूरी, स्वतंत्रता के साथ मिला देश का विभाजन। आज की पीढ़ी को ये बातें शायद स्मरण न हो लेकिन जिन परिवारों ने विभाजन का दंभ झेला हो, जिन्होंने अपना सब कुछ छोड़ कर वर्षों गरीबी में बिताए हो, वे इस बात को कैसे भूल सकते है। उस समय का पश्चिम पंजाब और आधा बंगाल जो आज का पाकिस्तान (पूर्वी पाकिस्तान) व बंगला देश (पश्चिम पाकिस्तान) है, वह भारत से अलग हो गया। विभाजन के कारण वहां से हिन्दू समाज को पलायन करना पड़ा। इस पलायन में गांव, शहर, घर, खेत, संपत्ति आदि सब छुटा और कितने ही लोगों की लाशें वहां छूट गई और कितने ही लोगों की लाशें ट्रेनों में भरकर भारत आई। यह वो अविस्मरणीय व कष्टदायक पल है, जिनके बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है।

क्या थी रावी की शपथ?

1930 में रावी नदी के तट पर तत्कालीन कांग्रेस ने अखण्ड भारत व पूर्ण स्वराज्य का संकल्प लिया, कांग्रेस ने 17 वर्षों में ही इस शपथ को भुला दिया और देश की जनता से द्रोह कर विभाजन को स्वीकार किया। इस विभाजन में तीन करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए, इस दौरान 10 लाख से अधिक हत्याएं हुई।

यह विभाजन पहला था क्या?

गत 2500 वर्षों में भारत के हुए विभाजनों में से यह 24वां विभाजन था। 1874 से आज तक हुए विभाजनों में से एक। आज का युवा सोचेगा कि 1874 से आज तक विभाजनों में से एक! अकल्पनीय।

भारत का कौनसा हिस्सा कब अलग हुआ – अफगानिस्तान (1874), नेपाल (1904), भूटान (1906), तिब्बत (1914), श्रीलंका (1935), बर्मा (1937), पाकिस्तान (1947), बंगला देश (1947), पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर POJK (1948), अक्साई चीन (1962) ।

भारत वर्ष इतना विभाजित हुआ तो पहले क्या था? इसका उत्तर निम्न श्लोक से मिलता है –

उत्तरं यत्त समुदस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।

वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र संतति।।

अर्थात समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में जो भूभाग है, इसका नाम भारत वर्ष है और इस पर रहने वाला समाज इसकी संतति भारतीय कहलाती है।

पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में अरुणाचल तक, उत्तर में माउंट एवरेस्ट से लेकर श्रीलंका से आगे सुदर दक्षिणपूर्व तक भारत वर्ष था। इतना विशाल भूभाग विभाजित होते होते आज की स्थिति तक पहुंच गया। 1857 से पूर्व भारत की भूमि 83 लाख वर्ग किलोमीटर थी और आज 33 लाख वर्ग कि०मी० है। बात केवल यही तक नहीं रुकी। अरुणाचल प्रदेश पर चीन अपना कब्जा जमाना चाहता है। बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल और असम में घुसपैठ निरंतर हो रही है। पश्चिम बंगाल के तीन जिले जिनको ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, उस चिकन नेक में योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी बढ़ाई जा रही है ताकि उस क्षेत्र को अलग कर दिया जाए और भारत का संबंध पूर्वोत्तर के सात राज्यों से टूट जाए। पंजाब में आज भी खालिस्तान की मांग कभी कभी उठती हुई दिखाई देती हैं।

क्या भारत का विभाजन स्थाई है?

नहीं। महर्षि अरविंद ने कहा है कि यह विभाजन अप्राकृतिक है इसलिए यह लंबे समय तक नहीं रहेगा। क्या विभाजन समाप्त हो सकता है? हां, हो सकता है। अपने ही देश में 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था। बंगाल का ही क्यों? क्योंकि बंगाल स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का बड़ा केंद्र था इसलिए उसकी शक्ति कम करने के लिए ऐसा अंग्रेजों ने किया था परंतु वहां के लोगों के प्रयास के कारण अंग्रेजी सरकार ने 1911 में बंग-भंग को समाप्त कर दिया था तो जब बंग-भंग हो सकता है तो देश का बाकी विभाजन भी समाप्त हो सकता है।

कैसे मिलेगी पूर्ण आजादी?

पूर्ण स्वतंत्रता के तीन बिंदु है – एक, भारत का जो हिस्सा भारत से अलग हुआ वो भारत में मिले यानि खंडित भारत पुनः अखण्ड बने। इसके लिए वर्तमान व नई पीढ़ी के मन में अखण्ड भारत का स्वप्न संजोने की आवश्यकता है। स्वप्न बना रहेगा तो उस पर कार्य भी होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंचम सरसंघचालक कहा करते थे कि 2011 के बाद का समय विश्व में हिंदुत्व यानि भारत के उदय का है। गत कुछ वर्षों से यह प्रतीत भी हो रहा है। धारा 370 का समाप्त होना, सीमा से चीनी सेना का पीछे हटना, सोशल मीडिया में POJK की चर्चा चलना आदि अखण्ड भारत के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा के संकेत है। आज अनेक विषयों के लिए विश्व भारत, भारतीय जीवन दृष्टि व भारतीय चिन्तन की ओर आशा भरी आँखों से देखता है।

दुसरा बिंदु है, मानसिक गुलामी से आजादी। 2014 में गार्जियन पत्रिका में लेख छपा, जिसका शीर्षक था Finally they left India. यानि अंग्रेज भारत से 1947 में चले गए लेकिन अब तक भारतीय समाज मानसिक गुलामी में जी रहा है। डॉ० डी.एस. कोठारी ने 1962 में उदयपुर में एक भाषण में कहा था कि भारत के सब प्रकार के बुद्धिजीवियों का गुरुत्वाकर्षण केंद्र यूरोप की बजाय भारत होना चाहिए। 2020 में शिक्षा नीति आई है, जिसका केंद्र बिंदु है भारत। भारतीय ज्ञान-विज्ञान, भारतीय भाषाओँ में शिक्षा, भारतीय कला, संगीत, साहित्य अब भारत की शिक्षा का अंग बनेगा। यानि भारत का बुद्धिजीवी व नीति-निर्धारक वर्ग अब भारत केन्द्रित सोचने लगा है।

और तीसरा है आत्मनिर्भर भारत। भारत की अर्थव्यवस्था ग्राम केन्द्रित, कृषि आधारित व आत्म निर्भर व्यवस्था रही है। अपनी आवश्यकताएं यहाँ का समाज स्वयं पूर्ति करता रहा है। स्वतंत्रता का सही अर्थ भारत की अर्थ व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना भी है और यह स्वदेशी आचार-विचार से पुष्ट हो सकता है।

अखण्ड भारत का संकल्प, मानसिक गुलामी से मुक्ति व आत्मनिर्भर भारत से हम स्वतंत्रता के सही अर्थ को समझ सकते है।


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