T-code for SAP MM( Material Management) module
Material Master
MM01 - Create Material
MM02 - Change Material
MM03 - Display Material
MB03 - Display Material Document
Vendor Master
XK01 - Create Vendor
XK02 - Change Vendor
XK03 - Display Vendor
Purchasing Info Record
ME11 - Create Purchasing Info Record
ME12 - Change Purchasing Info Record
ME13 - Display Purchasing Info Record
Source List
ME01 - Create Source List
ME03 - Change Source List
ME04 - Display Source List
Purchase Requisition
ME51N - Create Purchase Requisition
ME52N - Change Purchase Requisition
ME53N - Display Purchase Requisition
ME54 - Purchase Requisition
ME55 - Collective of Purchase Reqs.
ME56 - Assign Source to Purch. Requisition
Req. for Quotation
ME41 - Create Req. for Quotation
ME42 - Change Req. for Quotation
ME43 - Display Req. for Quotation
Quotations
ME47 - Create Quotation
ME48 - Change Quotation
ME49 - Price Comparison
Purchase Order
ME21N - Create Purchase Order
ME22N - Change Purchase Order
ME23N - Display Purchase Order
Reservation
MB21 - Create Reservation
MB22 - Change Reservation
MB23 - Display Reservation
MB24 - Reservations by Material
MB25 - Reservations by Account Assignment
Physical Inventory Document
MI01 - Create Physical Inventory Document
MI02 - Change Physical Inventory Document
MI03 - Display Physical Inventory Document
Inventory Count
MI04 - Enter Inventory Count with Document
MI05 - Change Inventory Count
MI06 - Display Inventory Count
MI09 - Enter Inventory Count w/o Document
MI08 - Create List of Differences with Doc.
MI10 - Create List of Differences w/o Doc.
MI20 - Print List of Differences
ME57 - Assign and Process Requisitions
ME58 - Ordering: Assigned Requisitions
ME59 - Automatic Generation of POs
ME2C- Display Purchase Orders by Material Group
ME2N - List Purchase Orders by Number
ME5K - Requisitions by Account Assignment
ME2K - List Purchase Orders by Account Assignment
ME2L - Display Purchase Orders by Vendor
ME2M - Display PO by Material
IH09 - Display Material
MM50 - List Extendable Materials
MB51 - Material Doc. List
MB52 - Display Storage Location
MMBE - Stock Overview
MMI1 - Create Operating Supplies
MMN1 - Create Non-Stock Material
MMS1 - Create Service
ME5A - Purchase Requisitions: List Display
ME5J - Purchase Requisitions for Project
MELB - Purch. Transactions by Tracking No.
ME5F - Reminder: Purch. Requisition
MB1C - Other Goods Receipts
MB90 - Output Processing for Mat. Documents
MBRL - Return Delivery per Mat. Document
MB1C - Other Goods Receipts
MB90 - Output Processing for Mat. Documents
MB1B - Transfer Posting
MI11 - Physical Inventory Document Recount
MI07 - Process List of Differences
MI37 - Batch Input: Post Differences
MIGO - Goods Receipt (GR)
MIGO/MB1A - Goods Issue
MIRO - Logistic Invoice Verification
AaradhyaAcademy
Tuitons For 11th To 15th Arts , Science and Commerce all subjects, Chartered Accountants
Friday, 17th March, 2023
Markets are likely to open positive. Oil $ 74, Bitcoin $ 24,000 and Rupee at 82.74. Yesterday, FII sold stocks worth Rs 282 crores but DII bought stocks worth Rs 2,206 crores.
*Stocks to Watch*
Infosys: The company’s subsidiary Infosys Finacle implemented the liquidity management solution for Netherlands-based financial services provider ABN AMRO.
Voltas: Universal MEP Projects & Engineering Services, a wholly owned subsidiary of the company, has bagged multiple power distribution and solar projects worth Rs 1,770 crore.
Glenmark Pharmaceuticals: The company received U.S. FDA acceptance for investigational new drug.
Rail Vikas Nigam: The company was selected as the lowest bidder for certain works in certain regions of Jabalpur. The project cost without taxes is Rs 112 crore.
*💐💐सच्चा पुरुषार्थ💐💐*
समय के साथ ही स्वामी विवेकानंद का ज्ञान और बातें पूरी दुनिया में फैल रही थीं। उनके भाषण और बातों से भारत के लोग ही नहीं, बल्कि विदेशी भी प्रभावित थे। हर कोई उन्हें अपना आदर्श मानने लगा था।
स्वामी विवेकानंद की बातों और विचारों से एक विदेशी महिला इतनी प्रभावित हुई कि मन ही मन में उन्होंने स्वामी से शादी करने की ठान ली। वो हर दिन उनके बारे में ही सोचती रहती थी। उस महिला ने स्वामी से मिलने की भी बहुत कोशिश की, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
कुछ समय बाद एक बार वह विदेशी महिला उस प्रोग्राम में पहुंच गई जहां स्वामी विवेकानंद भी मौजूद थे। वो बिना किसी डर के स्वामी के पास पहुंची और बिना किसी डर के कहा, ”मैं आपसे शादी करना चाहती हूं।” महिला की मन की बात को सुनकर स्वामी विवेकानंद ने उनसे सवाल किया कि आखिर आप मुझसे ही शादी क्यों करना चाहती हैं। मुझमें ऐसा क्या आपने देखा है?
स्वामी के सवाल का जवाब देते हुए उस विदेशी महिला ने कहा कि आपसे मैं बहुत प्रभावित हूं। आप बड़े ज्ञानी और गुणवान हैं। मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा भी बिल्कुल आपके जैसा ही हो। इसी वजह से मैं आपसे शादी करना चाह रही हूं।
महिला की इस इच्छा को जानकर स्वामी ने महिला से कहा कि ऐसा होना असंभव है, क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं। फिर उन्होंने आगे कहा कि भले ही मैं आपसे शादी नहीं कर सकता, लेकिन आपकी इच्छा को पूरा कर सकता हूं। महिला ने स्वामी से पूछा कि वो कैसे होगा। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि आप मुझे ही अपना बेटा मान लीजिए और आपको मां मान लेता हूं। ऐसा करने से आपको मेरे जैसा ही बेटा मिल जाएगा।
स्वामी विवेकानंद की बातों को सुनते ही महिला उनके पैरों पर गिर गई। उसने आगे कहा कि आप सचमुच बहुत बुद्धिमान हैं। मुझे आप पर गर्व है।
ऐसा करके स्वामी विवेकानंद ने खुद को अच्छा पुरुष साबित किया और सच्चे पुरुषार्थ का उदाहरण दिया। असली पुरुषार्थ वही होता है जब पुरुष के मन में नारी के लिए मां जैसा सम्मान का भाव होता है।
*💐💐शिक्षा💐💐*
हर पुरुष को महिला को सम्मान के भाव से देखना चाहिए। ऐसा माना भी गया है कि जहां महिला का सम्मान होता है, वहां देवता का वास होता है।
*||फारच सुंदर लेख आहे||*
*!! हे परमेश्वरा !!*
कोणताही अर्ज केला नव्हता की, कुणाचीही शिफारस नव्हती, असे कोणतेही असामान्य कर्त्तृत्वही नाही,
तरीही
डोक्याच्या *केसांपासून* पायाच्या *अंगठ्यापर्यंत* 24 तास देवा तु *रक्त* फिरवतोस...
*जिभेवर* नियमित अभिषेक करत आहेस.......
अखंडपणे तू माझे हे *हृदय* चालवतोस....
चालणारे कोणते *यंत्र* तू फिट करुन दिले आहेस *रे देवा .....*
*पायाच्या नखापासून ते डोक्याच्या केसापर्यंत विना अडथळा संदेशवहन करणारी प्रणाली ..........*
कोणत्या *अदृष्य शक्तीने* चालते आहे
काही समजत नाही.
*हाडांमासामध्ये* तयार होणारे *रक्त* कोणते जगावेगळे *आर्किटेक्चर* आहे....
याचा मला मागमूसही नाही.
*हजार हजार मेगापिक्सलवाले दोन दोन कॅमेरे* अहोरात्र सगळी दृश्ये टिपत आहेत.
*दहा दहा हजार* टेस्ट करणारा *जीभ* नावाचा टेस्टर,
अगणित *संवेदनांची* जाणीव करुन देणारी *त्वचा* नावाची *सेन्सर प्रणाली* .....
आणि......
वेगवेगळया *फ्रिक्वेंसीची* आवाजनिर्मिती करणारी *स्वरप्रणाली*
आणि
त्या फ्रिक्वेंसीचे *कोडींग डीकोडींग* करणारे *कान* नावाचे यंत्र........
*पंचाहत्तर टक्के पाण्याने भरलेला शरीररुपी टँकर हजारो छिद्रे असतानाही कुठेही लिक होत नाही....*
*स्टॅण्डशिवाय* मी उभा राहू शकतो...गाडीचे *टायर* झिजतात, पण पायांचे *तळवे* कधीही झिजत नाही.
*अद्भुत* अशी रचना आहे.
*संभाळणे, स्मृती, शक्ती, शांती हे सर्व देवा तु देतोस.* तुच आत बसुन *शरीर* चालवत आहेस.
*अद्भूत* आहे हे सर्व, *अविश्वसनीय,*
*अनाकलनीय.*
अशा *शरीररुपी* मशीनमध्ये कायम तुच आहेस,
याची जाणीव करुन देणारा *आत्मा* देवा तू असा काही *फिट* बसविला आहे की आणखी काय तुझ्याकडे मागाव......
तुझ्या या *जीवाशिवाच्या* खेळाचा निखळ, *निस्वार्थी आनंदाचा* वाटेकरी राहीन! .......
अशी *सद्बुद्धी* मला दे!!
तूच हे सर्व सांभाळतो आहेस याची *जाणीव* मला सदैव राहू दे!!!
*रोज क्षणोक्षणी कृतज्ञतेने तुझा ऋणी असल्याचे स्मरण, चिंतन व्हावे, हीच परमेश्वराच्या चरणी प्रार्थना !*.
*🙏🙏 🙏🙏*
वर्तमान समय मे युवा विद्यार्थियों को Distraction की समस्या ज़्यादा होने लगी है। जिसका बड़ा कारण है मोबाइल तकनीक के सदुपयोग में कमी।
लेकिन आपको निराश नही होना है, आपके बेहतर और खूबसूरत जीवन के लिये ही है, और यही तो आप कब से चाहते है
अतः निराश नही होना है
🔸अपनी सारी कमियों की एक लिस्ट बनाइए
🔸गलतियों से प्राप्त शिक्षा अपनी डायरी में लिखिये
और एक नया सन्कल्प लेकर आगे बढ़िए. ..
✨ताकि History Delete करने के बजाय HISTORY बनाने पर हमारा फोकस रहे✨
Believe Yourself 👌
YOU WILL DEFINITELY DO IT...
🔥विश्वास की लौ जलाए रखिये🔥
सुबह होगी ज़रूर
बस
माहौल बनाए रखिये...
30/12/2022
*💐💐वो सुनो जो ना कहा गया हो💐💐*
बहुत समय पहले की बात है,नयासर के एक राजा ने अपने बेटे को अच्छा शासक बनाने के मकसद से एक मास्टर के पास भेजा।
मास्टर ने कुछ दिन अपने साथ रखने के बाद युवराज गुर्वित को एक साल के लिए जंगल में अकेले रहने के लिए भेज दिया।
जब युवराज गुर्वित लौटे तो मास्टर ने पूछा, “बताओ तुमने जंगल में क्या सुना?”
“मैंने कोयल की कूक सुनी, नदियों की कल-कल सुनी, पत्तियों की सरसराहट सुनी, मधुमक्खियों की गुंजन सुनी, मैंने झींगुरों का शोर सुना, हवा की धुन सुनी…” युवराज अपना अनुभव सुनाता चला गया।
जब युवराज गुर्वित ने अपनी बात पूरी कर ली तब मास्टर बोले, “अच्छा है, अब तुम एक बार फिर जंगल जाओ और जब तक तुम्हे कुछ नयी आवाजें ना सुनाई दे दें तब तक मत लौटना।
एक साल जंगल में बिताने के बाद युवराज अपने राज्य को लौटना चाहता था, पर मास्टर की बात को टाल भी नहीं सकता था, इसलिए वह बेमन ही जंगल की ओर बढ़ चला।
कई दिन गुजर गए पर युवराज को कोई नयी आवाज़ नहीं सुनाई दी। वह परेशान हो उठा। उसने निश्चय किया कि अब वह हर आवाज़ को बड़े ध्यान से सुनेगा!
फिर एक सुबह उसे कुछ अनजानी सी आवाजें हल्की-हल्की सुनाई देने लगीं. इस घटना के कुछ दिनों बाद वह मास्टर के पास वापस लौटा और बोला, “पहले ती मुझे वही ध्वनियाँ सुनाई दीं जो पहले देती थीं, लेकिन एक दिन जब मैंने बहुत ध्यान से सुनना शुरू किया तो मुझे वो सुनाई देने लगा जो पहले कभी नहीं सुनाई दिया था…. मुझे कलियों के खिलने की आवाज सुनाई देने लगी, मुझे धरती पर पड़ती सूर्य की किरणों, तितलियों के गीत, और घांस द्वारा सुबह की ओस पीने की ध्वनियाँ सुनाएं देने लगीं….”
यह सुनकर मास्टर खुश हो गए और मुस्कुराकर बोले, “अनसुने को सुनने की क्षमता होना एक अच्छे राजा की निशानी है। क्योंकि जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख लेता है, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं को समझ लेता है, जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ लेता है, अपने लोगों की अनकही शिकायतों को सुन लेता है, केवल वही अपनी प्रजा का विश्वास जीत सकता है, कुछ गलत होने पर उसे समझ सकता है और अपने नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरी कर सकता है।”
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, अगर हमें अपनी फील्ड का लीडर बनना है तो हमें भी वो सुनना सीखना चाहिए जो नहीं कहा गया है। यानी हमें उस युवराज की तरह बिलकुल अलर्ट हो कर अपना काम करना चाहिए और अपने साथ काम करने वालों की ज़रूरतों और भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए तभी हम खुद को एक ट्रू लीडर की तरह स्थापित कर सकेंगे।
29/12/2022
What's app your name and no on +91 93724 54646
*💐💐सोशल मीडिया फ्रेंड💐💐*
अभय एक सीधा-साधा लड़का था। ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए अब उसे अपना गाँव छोड़कर शहर में दाखिला लेना था। किसान पिता ने एक-एक पैसा जोड़कर अभय के लिए शहर में सारी व्यवस्था कर दी और ये सोचकर एक स्मार्ट फोन भी दिला दिया कि ऑनलाइन पढाई करने में इसका उपयोग होगा।
स्वभाव से अंतर्मुखी अभय को अब अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करनी थी। अपने संकोची स्वभाव के कारण वह शहर के बच्चों के साथ उतना घुल-मिल नहीं पाया और दोस्त बनाने के लिए उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ऐसे ही फेसबुक पर उसी शहर के मयंक नाम के एक लड़के से उसकी दोस्ती हो गई। मयंक का प्रोफाइल अभय को बहुत पसंद आया था। दोनों के बीच मैसेजेस का आदान-प्रदान होना शुरू हो गया।
पढाई के लिए लिए गए फोन का प्रयोग अब दोस्ती और मनोरंजक वीडियोस देखने में होने लगा। यहाँ तक की क्लास करते हुए भी अभय का ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर ही लगा रहता।
मयंक और अभय की दोस्ती भी गहरी होती गयी, यहाँ तक कि मयंक कई बार उसका फ़ोन भी रिचार्ज करा देता।
देखते-देखते उनकी फ्रेंडशिप को दो-तीन महीने बीत गए, पर अभी भी उनकी एक बार भी मुलाक़ात नहीं हुई थी।
फिर एक दिन मयंक ने अभय को एक जगह बुलाने के लिए कॉल की, ” यार एक बहुत अच्छी opportunity है, तू सुबह दस बजे Whatsapp किये पते पर आ जा, अब पढाई के साथ -साथ तू हर महीने 5000 रु भी कमा सकता है, और इसी बहाने हम दोनों पहली बार face to face मिल भी लेंगे।”
अभय की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, दोस्त से मिलने की ख़ुशी और पैसा कमाने का अवसर मिलने की बात से वो फूला नहीं समा रहा था। अगले दिन वह सुबह जल्दी उठा और तैयार होकर मयंक के दिए पते की ओर बढ़ गया। वो जगह शहर से कुछ दूर थी, इसलिए अभय उधर जा रही एक बस पर सवार हो गया। एक घंटे के सफ़र के बाद आखिरकार वो पूछते-पाछते दिए हुए पते पर पहुंचा।
अभी वह दरवाजा खटखटाता की इससे पहले एक कार उसके पास आकर रुकी। उसमे से पैंताली-पचास साल का एक अधेड़ व्यक्ति बाहर निकला और बोला, “सुनो बेटा क्या तुम्हारा नाम अभय है?
“जी अंकल”, अभय बोला।
“मुझे मयंक ने भेजा है, दरअसल, अचानक मीटिंग का स्थान बदल गया है, आओ कार में बैठो मैं तुम्हे सही जगह ले चलता हूँ।”, व्यक्ति बोला।
अभय फौरन कार में बैठ गया और वे आगे बढ़ गए।
व्यक्ति ने अभय की केयर करते हुए उसे पीने के लिए फ्रूटी दी!
फ्रूटी पीने के करीब तीन घंटे बाद जब अभय की आँखें खुलीं तो उसने खुद को एक पार्क में लेटा हुआ पाया, उसे पेट के एक तरफ काफी दर्द महसूस हो रहा था, मोबाइल और पैसे भी गायब थे।
कुछ देर तक तो उसे समझ ही नहीं आया कि वो आखिर कार से यहाँ कैसे पहुँच गया। फिर उसने शर्ट उठा कर दर्द वाली जगह देखी तो वहां एक चीरा लगा हुआ था.
अभय का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह समझ चुका था कि उसके साथ कुछ बहुत गलत हो चुका है।
वह फ़ौरन भाग कर डॉक्टर के पास गया।
पर डॉक्टर ने जो बात उसे बताई, उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उसके शरीर से एक किडनी गायब थी। अब उसकी “काटो तो खून नहीं” वाली हालत हो गई।
सोचने लगा, “क्या सपने लेकर गांव से शहर आया था। अब अपने पिताजी को क्या जवाब देगा।”
वह भागा-भागा पुलिस के थाने पहुंचा। वहां जाकर तो उसके सामने डिजिटल दुनिया की सारी सच्चाई सामने आ गई। यह जो फेसबुक पर मयंक का प्रोफाइल था वह कोई युवा नहीं बल्कि वही अधेड़ व्यक्ति था जिसने उसे कार में बैठाया था।
वह आकर्षक अकाउंट बनाकर अभय जैसे लोगों को, जो सफलता शॉर्टकट में चाहते थे और ऐसे छलावे पे विश्वाश करते थे, फांसता था। फिर धीरे-धीरे पर्सनल लाइफ में घुसकर उन्हें नौकरी का झांसा देकर बुलाता। उसके बाद शरीर के अंगों की चोरी करता था। ऐसे कितने सारे cases उसके नाम थे।
सोशल मीडिया पर सोशल ना होकर अगर अभय वास्तविक दुनिया में social होता तो शायद ऐसी नौबत ही नहीं आती। स्क्रीन के पीछे का सच अब आईने की तरह साफ हो चुका था। इतनी बड़ी ठोकर लगने के बाद अब उसने मोबाइल स्क्रीन पर अपना समय गवाना बंद कर दिया। वास्तविक और आभासी दुनिया के बीच का फर्क अब उसकी समझ में आ चुका था ,पर बहुत कुछ खोने के बाद।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, ऑनलाइन वर्ल्ड में किसी पर आँख मूँद कर विश्वास करना आपको मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए सोशल मीडिया और इन्टरनेट को प्रयोग पूरी सावधानी के साथ करें ताकि आपको कभी अभय की तरह पछताना ना पड़े।
लकड़ी का कटोरा
•━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━•
एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे। लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।
बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी।
“हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा।
बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली, “आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करते रहेंगे, और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते।”
अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया, अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था। यहाँ तक कि उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था, ताकि अब और बर्तन ना टूट-फूट सकें।
बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी -कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते। यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता,वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते। वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता, और अपने में मस्त रहता।
एक रात खाने से पहले, उस छोटे बालक को उसके माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा, “तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने पूछा,
बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया-
अरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें।
और वह पुनः अपने काम में लग गया। पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत गहरा असर हुआ, उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे। वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है। उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये, और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।
शिक्षा:- अक्सर अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा देने की बात करते हैं पर हम ये भूल जाते हैं की असल शिक्षा शब्दों में नहीं हमारे कर्म में छुपी होती है। अगर हम बच्चों को बस ये उपदेश देते रहे कि बड़ों का आदर करो…सबका सम्मान करो…और खुद इसके उलट व्यवहार करें तो बच्चा भी ऐसा ही करना सीखता है। इसलिए कभी भी अपने पेरेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार ना करें कि कल को आपकी संतान भी आपके लिए लकड़ी का कटोरा तैयार करने लगे!
🪴आज का प्रेरक प्रसंग 🪴
!! पत्थर की कीमत !!
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एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था, किन्तु गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया। जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने कहा-बेटा, मरने से पहले तुम्हारे पिताजी ये पत्थर छोड़ गए थे, तुम इसे लेकर बाज़ार जाओ और इसकी कीमत का पता लगा, ध्यान रहे कि तुम्हे केवल कीमत पता करनी है, इसे बेचना नहीं है।”
युवक पत्थर लेकर निकला, सबसे पहले उसे एक सब्जी बेचने वाली महिला मिली।” अम्मा, तुम इस पत्थर के बदले मुझे क्या दे सकती हो ?”, युवक ने पूछा।
देना ही है तो दो गाजरों के बदले मुझे ये दे दो… तौलने के काम आएगा।” सब्जी वाली बोली।
युवक आगे बढ़ गया। इस बार वो एक दुकानदार के पास गया और उससे पत्थर की कीमत जानना चाही। दुकानदार बोला-
“इसके बदले मैं अधिक से अधिक 500 रूपये दे सकता हूँ… देना हो तो दो नहीं तो आगे बढ़ जाओ।”
युवक इस बार एक सुनार के पास गया। सुनार ने पत्थर के बदले 20 हज़ार देने की बात की। फिर वह हीरे की एक प्रतिष्ठित दुकान पर गया वहां उसे पत्थर के बदले 1 लाख रूपये का प्रस्ताव मिला और अंत में युवक शहर के सबसे बड़े हीरा विशेषज्ञ के पास पहुंचा और बोला-
“श्रीमान, कृपया इस पत्थर की कीमत बताने का कष्ट करें।”
विशेषज्ञ ने ध्यान से पत्थर का निरीक्षण किया और आश्चर्य से युवक की तरफ देखते हुए बोला-
“यह तो एक अमूल्य हीरा है, करोड़ों रूपये देकर भी ऐसा हीरा मिलना मुश्किल है।”
शिक्षा:- यदि हम गहराई से सोचें तो ऐसा ही मूल्यवान हमारा मानव जीवन भी है। यह अलग बात है कि हममें से बहुत से लोग इसकी कीमत नहीं जानते और सब्जी बेचने वाली महिला की तरह इसे मामूली समझा तुच्छ कामो में लगा देते हैं।
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