21/08/2023
प्रेरणास्रोत आत्मबल बढ़ाने वाला इतिहास ।
ऐतिहासिक कलाकारों ने भारतीयों का मनोबल तोड़ने की भांति भांति की कला से इतिहास लिखा है। वे कहते हैं कि मुट्ठी भर आक्रांता आए और उन्होंने पूरे देश पर कब्जा कर लिया। लेकिन यह बात एकदम झूठ है।
क्या आप जानते है, की महमूद गजनवी, जिसने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था, उसका साम्राज्य 3,400,000 वर्ग किमी (1,300,000 sq mi ) मे फैला हुआ था जो की आज के भारत से भी बड़ा लैंड एरिया है।
और यदि केवल गुजरात का देखें, जहां सोमनाथ था, तो पूरा का पूरा गुजरात ही महमूद गजनवी के साम्राज्य से कम से कम 35 गुणा छोटा था। यह आक्रमण वैसा ही था जैसे किसी गांव पर अमेरिका का हमला हो जाएं। लेकिन भारतीयों की वीरता को देखें, इतने बड़े साम्राज्य के स्वामी को भी उन्होंने पीछे धकेलने को मजबूर कर दिया, वह भी मुट्ठी भर सेना लेकर। मुट्ठी भर सेना तो हमारी थी। वह तो विशाल लूटेरा दल था ।
बहुत से मित्र अपना और दूसरे लोगों का मनोबल यह कहकर भी तोड़ते है की सोमनाथ में ब्रह्मण लोग अवतार की प्रतीक्षा में बैठे रहें और गजनवी सोमनाथ लूटकर चला गया। जबकि सत्य यह है की उस समय के सोमनाथ क्षेत्र का राजा कौन था ? यह पता कीजिए?
वहां केवल ब्राह्मणों का नहीं , बल्कि जैनों का भी पूरा प्रभाव था। लेकिन समाज का हर गलती का ठीकरा ब्राह्मणों पर फोड़ने की आदत जो है। और वहां जैनी हो या ब्रह्मण, अवतार की प्रतीक्षा नहीं करते, तो करते भी क्या ? कल्पना कीजिए, किसी एक व्यक्ति को मारने 100 लोग आ जाएं, तो वह अवतार की और ही देखेगा ।।
2 दिन तक सोमनाथ के ब्रह्मण हों या जैनी, अपना गला कटवाते रहे, उसके बाद ही सोमनाथ पर गजनवी कब्जा कर सका था, सोमनाथजी मंदिर को लूट सका था। बाकी भक्तों की अरदास झूठी भी कहां गई ? परमारों की सेना कोई अवतार बनकर ही सोमनाथ की रक्षा के लिए प्रस्तुत हुई, और उन्होंने गजनवी सेना को वापस लौटने पर मजबूर भी किया।
वैसे अवतार का नाम लेने से भी कुछ मित्र भड़क जाते है। तो हम उनसे यही कहते है। अगर थोड़ा जानी मानी व्यक्ति भी वचन दे दे, प्रधानमंत्री वचन दे दे, तो भी हम भरोसा करते है। यहां तो भगवान ने हमें वचन दिया है : " यदा यदा हि धर्मस्य ....।" ज्ञात तो है न उनका वचन ?? जब भी धर्म की हानि होगी, मैं आ जाऊंगा ।। तो क्या अब भगवान के वचनों पर भी भरोसा नहीं करें ??
अमेरिका से लेकर मध्य एशिया तक मूर्तिपूजक थे, किंतु आज कहां है? अमेरिका कुछ दिन में स्पेनिश सैनिकों से हार गया और आज वे एक सम्पूर्ण ईसाई देश है।
मध्य एशिया को मुस्लिमों ने जीत लिया और पूरा क्षेत्र मुस्लिम हो गया, इंडोनेशिया ने तो व्यापार के लिए ही धर्म बदल लिया।
किंतु भारत? आज तक अजेय है, 1,300 वर्ष से लगातार देश का एक बड़ा हिस्सा युद्ध में संलग्न रहा, मंदिर टूट गए, जातियों में विभाजित हो गए किंतु एक चीज महत्वपूर्ण हैं, हम अब भी हैं और पूरी मजबूती से हैं।
हम हिंदू है, हम भारतीय है।
भारतीय का अर्थ गलत न पाले, राजा भरत की भूमि भारत है और उनके वंशज मात्र भारतीय है।