03/11/2021
जिन लोगोको सही तरीके से एज्युकेशन चाहिए उनके लिए हे जिनको शिक्षा से कुछ लेना देना नहीं हे उनके लिए नहीं हे
-क्या आप स्वयं से यह नहीं पूछते कि आप क्यों पढ़-लिख रहे हैं?
-क्या आप जानते हैं कि आपको शिक्षा क्यों दी जा रही है और इस तरह की शिक्षा का क्या अर्थ है?
-अभी की हमारी समझ में शिक्षा का अर्थ है स्कूल जाना, पढ़ना-लिखना सीखना, परीक्षाएं पास करना और कुछ खेल आदि खेलना। विद्यालय की शिक्षा पूरी कर लेने के बाद आप कॉलेज में जाने लगते हैं, वहां फिर से कुछ महीनों या कुछ वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं, परीक्षाएं पास करते हैं और कोई छोटी-मोटी नौकरी पा जाते हैं, फिर जो कुछ आपने सीखा होता है उसे भूल जाते हैं। क्या इसे ही हम शिक्षा नहीं कहते? क्या आप समझ रहे हैं कि मैं क्या कह रहा हूं? क्या हम सब यही नहीं कर रहे हैं? लड़कियां बी. ए. या एम. ए. जैसी कुछ परीक्षाएं पास कर लेती हैं, विवाह कर लेती हैं, खाना पकाती हैं या कुछ और बन जाती हैं, बच्चों को जन्म देती हैं और इस तरह से अनेक वर्षों में पाई जाने वाली शिक्षा पूर्णतः व्यर्थ हो जाती है। हां, यह ज़रूर है कि वे जान जाती हैं कि अंग्रेजी कैसे बोली जाती है, वे थोड़ी-बहुत चतुर, सलीकेदार, सुव्यवस्थित हो जाती हैं और अधिक साफ-सुथरी रहने लगती हैं, पर बस उतना ही होता है, है न? इसी प्रकार लड़के कोई तकनीकी काम पा जाते हैं, क्लर्क बन जाते हैं या किसी तरह की शासकीय सेवा में लग जाते हैं, इसके साथ ही सब समाप्त हो जाता है। ऐसा ही होता है न?
आप देख सकते हैं कि जिसे आप जीना कहते हैं, वह नौकरी पा लेने, बच्चे पैदा करने, परिवार का पालन-पोषण करने, समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं को पढ़ने, बढ़-चढ़ कर बातें कर सकने और कुशलतापूर्वक वाद-विवाद कर सकने तक ही सीमित होता है। इसे ही हम शिक्षा कहते हैं—है न ऐसा? क्या आपने कभी अपने माता-पिता और बड़े लोगों को ध्यान से देखा है? उन्होंने भी परीक्षाएं पास की हैं, वे भी नौकरिंया करते हैं और पढ़ना-लिखना जानते हैं। क्या शिक्षा का कुल अभिप्राय इतना ही है?
Krishnamurti, J.. Shiksha Kya Hai (Hindi)